श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-नवमः स्कन्धः-अध्याय-31 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ उत्तरार्ध-नवमः स्कन्धः-एकत्रिंशोऽध्यायः इकतीसवाँ अध्याय सावित्री का यमाष्टक द्वारा धर्मराज का स्तवन यमाष्टकवर्णनम् श्रीनारायण बोले — [ हे नारद!] यम के मुख से भगवती के नामकीर्तन की महिमा सुनकर सावित्री के नेत्रों में अश्रु भर आये और उसका शरीर पुलकित हो गया।… Read More


श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-नवमः स्कन्धः-अध्याय-30 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ उत्तरार्ध-नवमः स्कन्धः-त्रिंशोऽध्यायः तीसवाँ अध्याय दिव्य लोकों की प्राप्ति कराने वाले पुण्यकर्मों का वर्णन यमेन कर्मविपाककथनम् सावित्री बोली — हे यम ! जिस कर्म के प्रभाव से पुण्यवान् मनुष्य स्वर्ग आदि अन्य लोकों में जाते हैं, उसे मुझे बताने की कृपा कीजिये… Read More


श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-नवमः स्कन्धः-अध्याय-29 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ उत्तरार्ध-नवमः स्कन्धः-एकोनत्रिंशोऽध्यायः उन्नतीसवाँ अध्याय सावित्री-धर्मराज के प्रश्नोत्तर और धर्मराज द्वारा सावित्री को वरदान सावित्र्युपाख्याने कर्मविपाकवर्णनम् श्रीनारायण बोले — [ हे नारद!] सावित्री की बात सुनकर यमराज आश्चर्य में पड़ गये और हँसकर उन्होंने प्राणियों के कर्मफल के विषय में बताना आरम्भ… Read More


श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-नवमः स्कन्धः-अध्याय-28 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ उत्तरार्ध-नवमः स्कन्धः-अष्टाविंशोऽध्यायः अठ्ठाईसवाँ अध्याय सावित्री – यमराज – संवाद सावित्र्युपाख्याने यमसावित्रीसंवादवर्णनम् श्रीनारायण बोले — [ हे मुने!] यमराज की बात सुनकर पतिव्रता तथा दृढ़ निश्चय वाली सावित्री ने परम भक्ति के साथ उनकी स्तुति की और वह उनसे कहने लगी ॥… Read More


श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-नवमः स्कन्धः-अध्याय-27 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ उत्तरार्ध-नवमः स्कन्धः-सप्तविंशोऽध्यायः सत्ताईसवाँ अध्याय भगवती सावित्री की उपासना से राजा अश्वपति को सावित्री नामक कन्या की प्राप्ति, सत्यवान्‌ के साथ सावित्री का विवाह, सत्यवान् की मृत्यु, सावित्री और यमराज का संवाद सावित्र्युपाख्याने यमसावित्रीसंवादवर्णनम् श्रीनारायण बोले — हे नारद! राजा अश्वपति ने… Read More


श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-नवमः स्कन्धः-अध्याय-26 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ उत्तरार्ध-नवमः स्कन्धः-षड्‌विंशोऽध्यायः छब्बीसवाँ अध्याय सावित्रीदेवी की पूजा-स्तुति का विधान सावित्रीपूजाविधिकथनम् नारदजी बोले — तुलसी की यह अमृततुल्य कथा तो मैंने सुन ली, अब आप सावित्री की कथा कहने की कृपा कीजिये। ऐसा सुना गया है कि वे सावित्री वेदों की जननी… Read More


श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-नवमः स्कन्धः-अध्याय-25 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ उत्तरार्ध-नवमः स्कन्धः-पञ्चविंशोऽध्यायः पच्चीसवाँ अध्याय तुलसी-पूजन, ध्यान, नामाष्टक तथा तुलसीस्तवन का वर्णन तुलसीपूजाविधिवर्णनम् नारदजी बोले — जिस समय विष्णुप्रिया तुलसी की पूजा की गयी थी, उस समय उनके लिये किये गये पूजन- विधान तथा स्तोत्र को अब आप मुझे बताइये । हे… Read More


श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-नवमः स्कन्धः-अध्याय-24 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ उत्तरार्ध-नवमः स्कन्धः-चतुर्विंशोऽध्यायः चौबीसवाँ अध्याय शंखचूड़रूपधारी श्रीहरि का तुलसी के भवन में जाना, तुलसी का श्रीहरि को पाषाण होने का शाप देना, तुलसी-महिमा, शालग्राम के विभिन्न लक्षण एवं माहात्म्य का वर्णन तुलसीमाहात्म्येन सह शालग्राममहत्त्ववर्णनम् नारदजी बोले — भगवान् नारायण ने कौन-सा रूप धारणकर… Read More


श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-नवमः स्कन्धः-अध्याय-23 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ उत्तरार्ध-नवमः स्कन्धः-त्रयोविंशोऽध्यायः तेईसवाँ अध्याय भगवान् शंकर और शंखचूड़ का युद्ध, भगवान् श्रीहरि का वृद्ध ब्राह्मण के वेश में शंखचूड़ से कवच माँग लेना तथा शंखचूड़ का रूप धारणकर तुलसी से हास – विलास करना, शंखचूड़ का भस्म होना और सुदामागोप के… Read More


श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-नवमः स्कन्धः-अध्याय-22 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ उत्तरार्ध-नवमः स्कन्धः-द्वाविंशोऽध्यायः बाईसवाँ अध्याय कुमार कार्तिकेय और भगवती भद्रकाली से शंखचूड़ का भयंकर युद्ध और आकाशवाणी का पाशुपतास्त्र से शंखचूड़ की अवध्यता का कारण बताना कालीशङ्‌खचूडयुद्धवर्णनम् श्रीनारायण बोले — [ हे नारद!] दानवराज प्रतापी शंखचूड़ सिर झुकाकर शिवजी को प्रणाम करके… Read More