श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-नवमः स्कन्धः-अध्याय-11 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ उत्तरार्ध-नवमः स्कन्धः-एकादशोऽध्यायः ग्यारहवाँ अध्याय गंगा की उत्पत्ति एवं उनका माहात्म्य गङ्‌गोपाख्यानवर्णनम् नारदजी बोले — हे वेदवेत्ताओं में श्रेष्ठ ! पृथ्वी का यह परम मनोहर उपाख्यान मैं सुन चुका; अब आप गंगा का उपाख्यान कहिये । सुरेश्वरी, विष्णुस्वरूपा और स्वयं विष्णुपदी —… Read More


श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-नवमः स्कन्धः-अध्याय-10 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ उत्तरार्ध-नवमः स्कन्धः-दशमोऽध्यायः दसवाँ अध्याय पृथ्वी के प्रति शास्त्र-विपरीत व्यवहार करने पर नरकों की प्राप्ति का वर्णन पृथिव्युपाख्याने नरकफलप्राप्तिवर्णनम् नारदजी बोले — भूमि का दान करने से होने वाले पुण्य तथा उसका हरण करने से होने वाले पाप, दूसरे की भूमि छीनने… Read More


श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-नवमः स्कन्धः-अध्याय-09 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ उत्तरार्ध-नवमः स्कन्धः-नवमोऽध्यायः नौवाँ अध्याय पृथ्वी की उत्पत्ति का प्रसंग, ध्यान और पूजन का प्रकार तथा उनकी स्तुति नारायणनारदसंवादे कलिमाहात्म्यवर्णनम् नारदजी बोले — [ हे भगवन्!] आपने बतलाया कि देवी के निमेषमात्र व्यतीत होने पर ब्रह्मा का अन्त हो जाता है और… Read More


श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-नवमः स्कन्धः-अध्याय-08 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ उत्तरार्ध-नवमः स्कन्धः-अष्टमोऽध्यायः आठवाँ अध्याय कलियुग का वर्णन, परब्रह्म परमात्मा एवं शक्तिस्वरूपा मूलप्रकृति की कृपा से त्रिदेवों तथा देवियों के प्रभाव का वर्णन और गोलोक में राधा-कृष्ण का दर्शन नारायणनारदसंवादे कलिमाहात्म्यवर्णनम् श्रीनारायण बोले — [ हे नारद!] गंगा के शाप से सरस्वती… Read More


श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-नवमः स्कन्धः-अध्याय-07 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ उत्तरार्ध-नवमः स्कन्धः-सप्तमोऽध्यायः सातवाँ अध्याय भगवान् नारायण का गंगा, लक्ष्मी और सरस्वती से उनके शाप की अवधि बताना तथा अपने भक्तों के महत्त्व का वर्णन करना गङ्‌गादीनां शापोद्धारवर्णनम् श्रीनारायण बोले — हे नारद! ऐसा कहकर जगत् के स्वामी भगवान् विष्णु चुप हो… Read More


श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-नवमः स्कन्धः-अध्याय-06 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ उत्तरार्ध-नवमः स्कन्धः-षष्ठोऽध्यायः छठा अध्याय लक्ष्मी, सरस्वती तथा गंगा का परस्पर शापवश भारतवर्ष में पधारना लक्ष्मीगङ्‌गासरस्वतीनां भूलोकेऽवतरणवर्णनम् श्रीनारायण बोले — हे मुने! साक्षात् भगवान् विष्णु के पास वैकुण्ठ में रहने वाली सरस्वती कलह के कारण गंगाजी के द्वारा दिये गये शाप से… Read More


श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-नवमः स्कन्धः-अध्याय-05 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ उत्तरार्ध-नवमः स्कन्धः-पञ्चमोऽध्यायः पाँचवाँ अध्याय याज्ञवल्क्य द्वारा भगवती सरस्वती की स्तुति याज्ञवल्क्यकृतं सरस्वतीस्तोत्रवर्णनम् श्रीनारायण बोले —  हे मुने ! अब आप वाग्देवी सरस्वती का वह स्तोत्र सुनिये, जो सभी मनोरथों को पूर्ण करने वाला है और जिसके द्वारा महामुनि याज्ञवल्क्य ने प्राचीन… Read More


श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-नवमः स्कन्धः-अध्याय-04 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ उत्तरार्ध-नवमः स्कन्धः-चतुर्थोऽध्यायः चौथा अध्याय सरस्वती की पूजा का विधान तथा कवच सरस्वतीस्तोत्रपूजाकवचादिवर्णनम् नारदजी बोले — हे भगवन्! मैंने आपकी कृपा से यह अमृततुल्य सारी कथा तो सुन ली, अब आप प्रकृतिदेवियों के पूजन का विस्तृत वर्णन कीजिये ॥ १ ॥ किसने… Read More


श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-नवमः स्कन्धः-अध्याय-03 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ उत्तरार्ध-नवमः स्कन्धः-तृतीयोऽध्यायः तीसरा अध्याय परिपूर्णतम श्रीकृष्ण और चिन्मयी राधा से प्रकट विराट्रूप बालक का वर्णन ब्रह्मविष्णुमहेश्वरादिदेवतोत्पत्तिवर्णनम् श्रीनारायण बोले — वह बालक जो पहले जल में छोड़ दिया गया था, ब्रह्माजी की आयुपर्यन्त जल में ही पड़ा रहा। उसके बाद वह समय… Read More


श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-नवमः स्कन्धः-अध्याय-02 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ उत्तरार्ध-नवमः स्कन्धः-द्वितीयोऽध्यायः दुसरा अध्याय परब्रह्म श्रीकृष्ण और श्रीराधा से प्रकट चिन्मय देवताओं एवं देवियों का वर्णन पञ्चप्रकृतितद्‍भर्तृगणोत्पत्तिवर्णनम् नारदजी बोले — हे प्रभो ! देवियों का सम्पूर्ण चरित्र मैंने संक्षेप में सुन लिया, अब सम्यक् प्रकार से बोध प्राप्त करने के लिये… Read More