श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-अष्टमः स्कन्धः-अध्याय-15 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ उत्तरार्ध-अष्टमः स्कन्धः-पञ्चदशोऽध्यायः सोलहवाँ अध्याय सूर्य की गति का वर्णन भुवनकोशवर्णने सूर्यगतिवर्णनम् श्रीनारायण बोले — हे नारद! अब मैं सूर्य की उत्तम गति का वर्णन करूँगा । शीघ्र, मन्द गतियों के द्वारा सूर्य का गमन होता है ॥ १ ॥ हे सुरश्रेष्ठ!… Read More


श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-अष्टमः स्कन्धः-अध्याय-14 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ उत्तरार्ध-अष्टमः स्कन्धः-चतुर्दशोऽध्यायः चौदहवाँ अध्याय लोकालोक पर्वत का वर्णन सूर्यगतिवर्णनम् श्रीनारायण बोले — [ हे नारद!] उसके आगे लोकालोक नामक पर्वत है, जो प्रकाशित तथा अप्रकाशित — दो प्रकार के लोकों का विभाग करने के लिये उनके मध्य में स्थित है ॥… Read More


श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-अष्टमः स्कन्धः-अध्याय-13 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ उत्तरार्ध-अष्टमः स्कन्धः-त्रयोदशोऽध्यायः तेरहवाँ अध्याय क्रौंच, शाक और पुष्करद्वीप का वर्णन भुवनकोशवर्णने क्रौञ्चशाकपुष्करद्वीपवर्णनम् नारदजी बोले — हे सर्वार्थदर्शन ! अब आप शेष द्वीपों के परिमाण बतलाइये, जिन्हें जाननेमात्र से मनुष्य परम आनन्दमय हो जाता है ॥ १ ॥ श्रीनारायण बोले — [… Read More


श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-अष्टमः स्कन्धः-अध्याय-12 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ उत्तरार्ध-अष्टमः स्कन्धः-द्वादशोऽध्यायः बारहवाँ अध्याय प्लक्ष, शाल्मलि और कुशद्वीप का वर्णन भुवनकोशवर्णने प्लक्षद्वीपकुशद्वीपवर्णनम् श्रीनारायण बोले — [हे नारद!] यह जम्बूद्वीप जैसा और जितने परिमाण वाला बताया गया है, वह उतने ही परिमाण वाले क्षारसमुद्र से चारों ओर से उसी प्रकार घिरा है,… Read More


श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-अष्टमः स्कन्धः-अध्याय-11 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ उत्तरार्ध-अष्टमः स्कन्धः-एकादशोऽध्यायः ग्यारहवाँ अध्याय जम्बूद्वीप स्थित भारतवर्ष में श्रीनारदजी के द्वारा नारायणरूप की स्तुति-उपासना तथा भारतवर्ष की महिमा का कथन भुवनकोशवर्णने भारतवर्षवर्णनम् श्रीनारायण बोले — [ हे नारद!] भारत नामक इस वर्ष में आदिपुरुष मैं सदा विराजमान रहता हूँ और यहाँ… Read More


श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-अष्टमः स्कन्धः-अध्याय-10 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ उत्तरार्ध-अष्टमः स्कन्धः-दशमोऽध्यायः दसवाँ अध्याय हिरण्मयवर्ष में अर्यमा के द्वारा कच्छपरूप की आराधना, उत्तरकुरुवर्ष में पृथ्वी द्वारा वाराहरूप की एवं किम्पुरुषवर्ष में श्रीहनुमान् जी के द्वारा श्रीरामचन्द्ररूप की स्तुति-उपासना भुवनकोशवर्णने हिरण्मयकिम्पुरुषवर्षवर्णनम् श्रीनारायण बोले — [ हे नारद!] हिरण्मय नामक वर्ष में भगवान्… Read More


श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-अष्टमः स्कन्धः-अध्याय-09 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ उत्तरार्ध-अष्टमः स्कन्धः-नवमोऽध्यायः नौवाँ अध्याय हरिवर्ष में प्रह्लाद के द्वारा नृसिंहरूप की आराधना, केतुमालवर्ष में श्रीलक्ष्मीजी के द्वारा कामदेवरूप की तथा रम्यकवर्ष में मनुजी के द्वारा मत्स्यरूप की स्तुति-उपासना भुवनकोशवर्णने हरिवर्षकेतुमालरम्यकवर्षवर्णनम् श्रीनारायण बोले — [ हे नारद!] पापों का नाश करने वाले,… Read More


श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-अष्टमः स्कन्धः-अध्याय-08 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ उत्तरार्ध-अष्टमः स्कन्धः-अष्टमोऽध्यायः आठवाँ अध्याय इलावृतवर्ष में भगवान् शंकर द्वारा भगवान् श्रीहरि के संकर्षणरूप की आराधना तथा भद्राश्ववर्ष में भद्रश्रवा द्वारा हयग्रीव रूप की उपासना भुवनकोशवर्णने इलावृतभद्राश्ववर्षवर्णनम् श्रीनारायण बोले — उन नौ वर्षों में रहने वाले सभी देवेश पूर्वोक्त स्तोत्रों तथा जप,… Read More


श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-अष्टमः स्कन्धः-अध्याय-07 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ उत्तरार्ध-अष्टमः स्कन्धः-सप्तमोऽध्यायः सातवाँ अध्याय सुमेरुपर्वत का वर्णन तथा गंगावतरण का आख्यान भुवनकोशवर्णने पर्वतनदीवर्षादिवर्णनम् श्रीनारायण बोले — हे नारद! सुमेरुगिरि के पूर्व में अठारह हजार योजन लम्बाई तथा दो हजार योजन चौड़ाई तथा ऊँचाई वाले दो पर्वत हैं । वे दोनों श्रेष्ठ… Read More


श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-अष्टमः स्कन्धः-अध्याय-06 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ उत्तरार्ध-अष्टमः स्कन्धः-षष्ठोऽध्याय छठा अध्याय भूमण्डल के विभिन्न पर्वतों से निकलने वाली विभिन्न नदियों का वर्णन भुवनकोशवर्णनेऽरुणोदादिनदीनां निसर्गस्थानवर्णनम् श्रीनारायण बोले — हे नारद! मैंने अरुणोदा नामक जिस नदी का वर्णन किया है, वह मन्दरपर्वत से निकलकर इलावृत के पूर्व भाग में प्रवाहित… Read More