श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-सप्तमः स्कन्धः-अध्याय-35 श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-सप्तमः स्कन्धः-अध्याय-35 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ उत्तरार्ध-सप्तमः स्कन्धः-पञ्चत्रिंशोऽध्यायः पैंतीसवाँ अध्याय भगवती द्वारा यम, नियम, आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार, धारणा तथा कुण्डली जागरण की विधि बताना देवीगीतायां मन्त्रसिद्धिसाधनवर्णनम् हिमालय बोले —– हे महेश्वरि ! अब आप ज्ञान प्रदान करने वाले योग का सांगोपांग वर्णन कीजिये, जिसकी साधना से मैं… Read More
श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-सप्तमः स्कन्धः-अध्याय-34 श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-सप्तमः स्कन्धः-अध्याय-34 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ उत्तरार्ध-सप्तमः स्कन्धः-चतुस्त्रिंशोऽध्यायः चौंतीसवाँ अध्याय भगवती का हिमालय तथा देवताओं से परमपद की प्राप्ति का उपाय बताना देवीगीतायां ज्ञानस्य मोक्षहेतुत्ववर्णनम् देवी बोलीं — कहाँ तुम सब मन्दभाग्य देवता और कहाँ मेरा यह अद्भुत रूप, तथापि भक्तवत्सलता के कारण मैंने आप लोगों को… Read More
श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-सप्तमः स्कन्धः-अध्याय-33 श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-सप्तमः स्कन्धः-अध्याय-33 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ उत्तरार्ध-सप्तमः स्कन्धः-त्रयस्त्रिंशोऽध्यायः तैंतीसवाँ अध्याय भगवती का अपनी सर्वव्यापकता बताते हुए विराट्रूप प्रकट करना, भयभीत देवताओं की स्तुति से प्रसन्न भगवती का पुनः सौम्यरूप धारण करना श्रीदेवीविराड्रूपदर्शनसहितं देवकृततत्स्तववर्णनम् देवी बोलीं — [ हे हिमालय ! ] यह सम्पूर्ण चराचर जगत् मेरी मायाशक्ति… Read More
श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-सप्तमः स्कन्धः-अध्याय-32 श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-सप्तमः स्कन्धः-अध्याय-32 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ उत्तरार्ध-सप्तमः स्कन्धः-द्वात्रिंशोऽध्यायः बतीसवाँ अध्याय देवीगीता के प्रसंग में भगवती का हिमालय से माया तथा अपने स्वरूप का वर्णन देव्या व्यष्टिसमष्टिरूपवर्णनम् देवी बोलीं — सभी देवता मेरे द्वारा कहे जाने वाले वचन को सुनें, जिसके श्रवणमात्र से मनुष्य मेरे स्वरूप को प्राप्त… Read More
श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-सप्तमः स्कन्धः-अध्याय-31 श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-सप्तमः स्कन्धः-अध्याय-31 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ उत्तरार्ध-सप्तमः स्कन्धः-एकत्रिंशोऽध्यायः इकतीसवाँ अध्याय तारकासुर से पीड़ित देवताओं द्वारा भगवती की स्तुति तथा भगवती का हिमालय की पुत्री के रूप में प्रकट होने का आश्वासन देना हिमालयगृहे पार्वतीजन्मविषये देवान् प्रति देवीकथनवर्णनम् जनमेजय बोले — [ हे मुने!] हिमालय के शिखर पर… Read More
श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-सप्तमः स्कन्धः-अध्याय-30 श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-सप्तमः स्कन्धः-अध्याय-30 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ उत्तरार्ध-सप्तमः स्कन्धः-त्रिंशोऽध्यायः तीसवाँ अध्याय शक्तिपीठों की उत्पत्ति की कथा तथा उनके नाम एवं उनका माहात्म्य देवीपीठवर्णनम् व्यासजी बोले — हे राजन् ! तत्पश्चात् वे वन-प्रदेश में हिमालय की तलहटी में स्थित रहकर समाहितचित्त हो मायाबीज (भुवनेश्वरीमन्त्र ) – के जप में… Read More
श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-सप्तमः स्कन्धः-अध्याय-29 श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-सप्तमः स्कन्धः-अध्याय-29 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ उत्तरार्ध-सप्तमः स्कन्धः-एकोनत्रिंशोऽध्यायः उन्नतीसवाँ अध्याय व्यासजी का राजा जनमेजय से भगवती की महिमा का वर्णन करना और उनसे उन्हीं की आराधना करने को कहना, भगवान् शंकर और विष्णु के अभिमान को देखकर गौरी तथा लक्ष्मी का अन्तर्धान होना और शिव तथा विष्णु… Read More
श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-सप्तमः स्कन्धः-अध्याय-28 श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-सप्तमः स्कन्धः-अध्याय-28 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ उत्तरार्ध-सप्तमः स्कन्धः-अष्टाविंशोऽध्यायः अट्ठाईसवाँ अध्याय दुर्गम दैत्य की तपस्या; वर-प्राप्ति तथा अत्याचार, देवताओं का भगवती की प्रार्थना करना, भगवती का शताक्षी और शाकम्भरी रूप में प्राकट्य, दुर्गम का वध और देवगणों द्वारा भगवती की स्तुति शताक्षीचरित्रवर्णनम् जनमेजय बोले — हे मुने !… Read More
श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-सप्तमः स्कन्धः-अध्याय-27 श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-सप्तमः स्कन्धः-अध्याय-27 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ उत्तरार्ध-सप्तमः स्कन्धः-सप्तविंशोऽध्यायः सताईसवाँ अध्याय चिता बनाकर राजा का रोहित को उसपर लिटाना और राजा-रानी का भगवती का ध्यानकर स्वयं भी पुत्र की चिता में जल जाने को उद्यत होना, ब्रह्माजीसहित समस्त देवताओं का राजा के पास आना, इन्द्र का अमृत वर्षा… Read More
श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-सप्तमः स्कन्धः-अध्याय-26 श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-सप्तमः स्कन्धः-अध्याय-26 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ उत्तरार्ध-सप्तमः स्कन्धः-षड्विंशोऽध्यायः छब्बीसवाँ अध्याय रानी का चाण्डालवेशधारी राजा हरिश्चन्द्र से अनुमति लेकर पुत्र के शव को लाना और करुण विलाप करना, राजा का पत्नी और पुत्र को पहचानकर मूर्च्छित होना और विलाप करना हरिश्चन्द्रोपाख्याने राज्ञो हुताशनप्रवेशोद्योगवर्णनम् सूतजी बोले — तत्पश्चात् राजा… Read More