श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-सप्तमः स्कन्धः-अध्याय-25 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ उत्तरार्ध-सप्तमः स्कन्धः-पञ्चविंशोऽध्यायः पच्चीसवाँ अध्याय सर्पदंश से रोहित की मृत्यु, रानी का करुण विलाप, पहरेदारों का रानी को राक्षसी समझकर चाण्डाल को सौंपना और चाण्डाल का हरिश्चन्द्र को उसके वध की आज्ञा देना चाण्डालाज्ञया हरिश्चन्द्रस्य खड्गग्रहणवर्णनम् सूतजी बोले — [ हे शौनक… Read More


श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-सप्तमः स्कन्धः-अध्याय-24 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ उत्तरार्ध-सप्तमः स्कन्धः-चतुर्विंशोऽध्यायः चौबीसवाँ अध्याय चाण्डाल का राजा हरिश्चन्द्र को श्मशानघाट में नियुक्त करना हरिश्चन्द्रचिन्तावर्णनम् शौनक बोले — हे श्रेष्ठ सूतजी ! चाण्डाल के घर जाकर राजा हरिश्चन्द्र ने क्या किया ? आप मेरे प्रश्न का उत्तर शीघ्र ही दीजिये ॥ १… Read More


श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-सप्तमः स्कन्धः-अध्याय-23 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ उत्तरार्ध-सप्तमः स्कन्धः-त्रयोविंशोऽध्यायः तेईसवाँ अध्याय विश्वामित्र का राजा हरिश्चन्द्र को चाण्डाल के हाथ बेचकर ऋणमुक्त करना हरिश्चन्द्रोपाख्यानवर्णनम् व्यासजी बोले — राजा हरिश्चन्द्र से इस प्रकार का दयाहीन एवं निष्ठुर वचन कहकर और वह सम्पूर्ण धन लेकर कुपित विश्वामित्र वहाँ से चले गये… Read More


श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-सप्तमः स्कन्धः-अध्याय-22 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ उत्तरार्ध-सप्तमः स्कन्धः-द्वाविंशोऽध्यायः बाईसवाँ अध्याय राजा हरिश्चन्द्र का रानी और राजकुमार का विक्रय करना और विश्वामित्र को ग्यारह करोड़ स्वर्णमुद्राएँ देना तथा विश्वामित्र का और अधिक धन के लिये आग्रह करना हरिश्चन्द्रस्य पत्‍नीपुत्रविक्रयवर्णनम् व्यासजी बोले — हे राजन् ! अपनी धर्मपत्नी के… Read More


श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-सप्तमः स्कन्धः-अध्याय-21 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ उत्तरार्ध-सप्तमः स्कन्धः-एकविंशोऽध्यायः इक्कीसवाँ अध्याय विश्वामित्र का राजा हरिश्चन्द्र से दक्षिणा माँगना और रानी का अपने को विक्रय हेतु प्रस्तुत करना हरिश्चन्द्रोपाख्यानवर्णनम् सूतजी बोले — इतने में यमराज के समान क्रोधयुक्त महान् तपस्वी विश्वामित्र मन में संकल्पित अपना दक्षिणा-सम्बन्धी धन माँगने के… Read More


श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-सप्तमः स्कन्धः-अध्याय-20 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ उत्तरार्ध-सप्तमः स्कन्धः-विंशोऽध्यायः बीसवाँ अध्याय हरिश्चन्द्र का दक्षिणा देने हेतु स्वयं, रानी और पुत्र को बेचने के लिये काशी जाना हरिश्चन्द्रोपाख्यानवर्णनम् हरिश्चन्द्र बोले — उत्तम व्रत का पालन करने वाले हे मुनिवर ! आप विषाद छोड़िये, मेरी प्रतिज्ञा है कि आपको बिना… Read More


श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-सप्तमः स्कन्धः-अध्याय-19 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ उत्तरार्ध-सप्तमः स्कन्धः-एकोनविंशोऽध्यायः उन्नीसवाँ अध्याय विश्वामित्र की कपटपूर्ण बातों में आकर राजा हरिश्चन्द्र का राज्यदान करना कौशिकाय सर्वस्वसमर्पणं तद्दक्षिणादानवर्णनम् व्यासजी बोले — हे नृप [ जनमेजय ] ! हरिश्चन्द्र की यह बात सुनकर मुनि विश्वामित्र हँस करके उनसे कहने लगे — ॥… Read More


श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-सप्तमः स्कन्धः-अध्याय-18 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ उत्तरार्ध-सप्तमः स्कन्धः-अष्टादशोऽध्यायः अठारहवाँ अध्याय विश्वामित्र का मायाशूकर के द्वारा हरिश्चन्द्र के उद्यान को नष्ट कराना हरिश्चन्द्रद्वारा वृद्धब्राह्मणाय धनदानप्रतिज्ञावर्णनम् व्यासजी बोले — राजन् ! किसी समय राजा हरिश्चन्द्र आखेट करने के लिये वन में गये हुए थे I उन्होंने वहाँ मनोहर नेत्रोंवाली… Read More


श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-सप्तमः स्कन्धः-अध्याय-17 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ उत्तरार्ध-सप्तमः स्कन्धः-सप्तदशोऽध्यायः सत्रहवाँ अध्याय विश्वामित्र का शुनःशेप को वरुणमन्त्र देना और उसके जप से वरुण का प्रकट होकर उसे बन्धनमुक्त तथा राजा को रोगमुक्त करना, राजा हरिश्चन्द्र की प्रशंसा से विश्वामित्र का वसिष्ठ पर क्रोधित होना वसिष्ठविश्वामित्रपणवर्णनम् व्यासजी बोले — राजन्… Read More


श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-सप्तमः स्कन्धः-अध्याय-16 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ उत्तरार्ध-सप्तमः स्कन्धः-षोडशोऽध्यायः सोलहवाँ अध्याय राजा हरिश्चन्द्र का शुनःशेप को स्तम्भ में बाँधकर यज्ञ प्रारम्भ करना यज्ञपशुभूतस्य ब्राह्मणपुत्रस्य वधकरणाय विश्वामित्रनिषेधवर्णनम् व्यासजी बोले — [ हे राजन् ! ] वरुणदेव के चले जाने पर राजा हरिश्चन्द्र [ जलोदर ] रोग से अत्यन्त पीड़ित… Read More