श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-दशम स्कन्धः-अध्याय-01 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ उत्तरार्ध-दशम स्कन्धः-प्रथमोऽध्यायः पहला अध्याय स्वायम्भुव मनु की उत्पत्ति, उनके द्वारा भगवती की आराधना मनुकृतं देवीस्तवनम् नारदजी बोले — हे नारायण ! हे धरा के आधार ! हे सर्वपालनकारण! आपने पापों का नाश करने वाले देवीचरित्र का वर्णन कर दिया ॥ १… Read More


श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-नवमः स्कन्धः-अध्याय-50 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ उत्तरार्ध-नवमः स्कन्धः-पञ्चाशत्तमोऽध्यायः पचासवाँ अध्याय भगवती श्रीराधा तथा श्रीदुर्गा के मन्त्र, ध्यान, पूजा-विधान तथा स्तवन का वर्णन देव्या आवरणपूजाविधिवर्णनम् नारदजी बोले — [ हे भगवन् ! ] मूलप्रकृतिरूपा देवियों का सारा आख्यान मैंने यथार्थरूप में सुन लिया, जिसका श्रवण करके प्राणी जन्म-मरणरूपी… Read More


श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-नवमः स्कन्धः-अध्याय-49 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ उत्तरार्ध-नवमः स्कन्धः-एकोनपञ्चाशत्तमोऽध्यायः उनचासवाँ अध्याय आदि गौ सुरभिदेवी का आख्यान सुरभ्युपाख्यानवर्णनम् नारदजी बोले — हे ब्रह्मन् ! गोलोक से जो सुरभिदेवी आयी थीं, वे कौन थीं? मैं ध्यानपूर्वक उनका जन्मचरित्र सुनना चाहता हूँ ॥ १ ॥ श्रीनारायण बोले — [ हे नारद!]… Read More


श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-नवमः स्कन्धः-अध्याय-48 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ उत्तरार्ध-नवमः स्कन्धः-अष्टचत्वारिंशोऽध्यायः अड़तालीसवाँ अध्याय भगवती मनसा का पूजन-विधान, मनसा-पुत्र आस्तीक का जनमेजय के सर्पसत्र में नागों की रक्षा करना, इन्द्र द्वारा मनसादेवी का स्तवन करना मनसोपाख्यानवर्णनम् श्रीनारायण बोले — हे मुनिश्रेष्ठ ! मैंने देवी मनसा के विषय में विधानपूर्वक कह दिया… Read More


श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-नवमः स्कन्धः-अध्याय-47 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ उत्तरार्ध-नवमः स्कन्धः-सप्तचत्वारिंशोऽध्यायः सैंतालीसवाँ अध्याय भगवती मंगलचण्डी तथा भगवती मनसा का आख्यान मङ्‌गलचण्डीमनसयोरुपाख्यानवर्णनम् श्रीनारायण बोले — हे ब्रह्मपुत्र ! आगमशास्त्र के अनुसार मैंने षष्ठीदेवी का आख्यान कह दिया, अब भगवती मंगलचण्डी का आख्यान और उनका पूजा- विधान आदि सुनिये, जिसे मैंने धर्मदेव… Read More


श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-नवमः स्कन्धः-अध्याय-46 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ उत्तरार्ध-नवमः स्कन्धः-षट्चत्वारिंशोऽध्यायः छियालीसवाँ अध्याय भगवती षष्ठी की महिमा के प्रसंग में राजा प्रियव्रत की कथा षष्ठ्युपाख्यानवर्णनम् नारदजी बोले — हे ब्रह्मन् ! हे वेदवेत्ताओंमें श्रेष्ठ ! मैंने अनेक उत्तम देवियोंका उत्तम आख्यान सुन लिया; अब आप दूसरी देवियोंके चरित्रका वर्णन कीजिये… Read More


श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-नवमः स्कन्धः-अध्याय-45 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ उत्तरार्ध-नवमः स्कन्धः-पञ्चचत्वारिंशोऽध्यायः पैंतालीसवाँ अध्याय भगवती दक्षिणा का उपाख्यान दक्षिणोपाख्यानवर्णनम् श्रीनारायण बोले — [ हे नारद!] मैंने भगवती स्वाहा तथा स्वधा का अत्यन्त मधुर तथा कल्याणकारी उपाख्यान बता दिया। अब मैं भगवती दक्षिणा का आख्यान कह रहा हूँ, सावधान होकर सुनिये ॥… Read More


श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-नवमः स्कन्धः-अध्याय-44 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ उत्तरार्ध-नवमः स्कन्धः-चतुश्चत्वारिंशोऽध्यायः चौवालीसवाँ अध्याय भगवती स्वधा का उपाख्यान स्वधोपाख्यानवर्णनम् श्रीनारायण बोले — हे नारद! सुनिये, अब मैं स्वधा का उत्तम आख्यान कहूँगा, जो पितरों के लिये तृप्ति-कारक तथा श्राद्धान्न के फल की वृद्धि करने वाला है ॥ १ ॥ जगत् का… Read More


श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-नवमः स्कन्धः-अध्याय-43 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ उत्तरार्ध-नवमः स्कन्धः-त्रिचत्वारिंशोऽध्यायः तैंतालीसवाँ अध्याय भगवती स्वाहा का उपाख्यान स्वाहोपाख्यानवर्णनम् नारदजी बोले — हे नारायण ! हे महाभाग ! हे महाप्रभो ! आप रूप, गुण, यश, तेज और कान्ति में साक्षात् नारायण ही हैं ॥ १ ॥ हे मुने! हे वेदवेत्ताओं में… Read More


श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-नवमः स्कन्धः-अध्याय-42 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ उत्तरार्ध-नवमः स्कन्धः-द्विचत्वारिंशोऽध्यायः बयालीसवाँ अध्याय इन्द्र द्वारा भगवती लक्ष्मी का षोडशोपचार पूजन एवं स्तवन महालक्ष्म्याः ध्यानस्तोत्रवर्णनम् नारदजी बोले — हे प्रभो ! मैंने भगवान् श्रीहरि का कल्याणप्रद गुणानुवाद, उनका उत्तम ज्ञान तथा भगवती लक्ष्मी का अभीष्ट उपाख्यान सुना। अब उन देवी के… Read More