भविष्यपुराण – प्रतिसर्गपर्व तृतीय – अध्याय १२ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (प्रतिसर्गपर्व — तृतीय भाग) अध्याय – १२ सूत जी बोले — उदय सिंह के बारहवें वर्ष की अवस्था में जो कुछ हुआ मैं कह रहा हूँ, सुनो — कान्यकुब्ज (कन्नौज) नामक राजधानी में आश्विन शुक्ल दशमी के दिन… Read More


भविष्यपुराण – प्रतिसर्गपर्व तृतीय – अध्याय ११ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (प्रतिसर्गपर्व — तृतीय भाग) अध्याय – ११ सूत जी बोले— उस विष्णु की शक्ति के अवतार— उदयसिंह के दशवें वर्ष की अवस्था के आरम्भ में एक दिन राजकुमारों ने वसन्त ऋतु के रमणीक आगमन में आनन्द का अनुभव… Read More


भविष्यपुराण – प्रतिसर्गपर्व तृतीय – अध्याय १० ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (प्रतिसर्गपर्व — तृतीय भाग) अध्याय – १० मनोरथ, कराल, मेघपुष्प और बलाहक नामक चार घोड़ों की उत्त्पति सूत जी बोले — नवे वर्ष के आरम्भ में वह सबल कृष्णांश (उदयसिंह) राजनीति विद्या, चौंसठ कलाओं और धर्मशास्त्र में निपुणता… Read More


भविष्यपुराण – प्रतिसर्गपर्व तृतीय – अध्याय ९ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (प्रतिसर्गपर्व — तृतीय भाग) अध्याय – ९ कृष्णांश ‘आह्लाद’ (आल्हा) का जन्म सूत जी बोले — राज-सेवक दोनों भाइयों ने कालिय (करिया) को पराजित करके गोपालक राज्य के अधीश्वर राजा दलवाहन के यहाँ प्रस्थान किया । वहाँ सहस्र… Read More


भविष्यपुराण – प्रतिसर्गपर्व तृतीय – अध्याय ८ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (प्रतिसर्गपर्व — तृतीय भाग) अध्याय – ८ सहदेव अंश देवसिंह का जन्म सूत जी बोले — जम्बूक नामक राजा ने भयभीत होकर अपने पुत्र कालिय (करिया) को साथ लेकर नर्मदा के तट पर देवाधिदेव पिनाकपाणि शिव की आराधना… Read More


भविष्यपुराण – प्रतिसर्गपर्व तृतीय – अध्याय ७ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (प्रतिसर्गपर्व — तृतीय भाग) अध्याय – ७ राजागणों द्वारा अपने इष्टदेवों की आराधना सूत जी बोले — भीष्मसिंह ने गंगा जी के तट पर इन्द्र की पूजा करना आरम्भ किया । पश्चात् इन्द्र को सूर्यमय जानकर तप द्वारा… Read More


भविष्यपुराण – प्रतिसर्गपर्व तृतीय – अध्याय ६ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (प्रतिसर्गपर्व — तृतीय भाग) अध्याय – ६ संयोगिनी का अपहरण सूत जी बोले — एक बार रत्नभानु (रतीमान्) ने पृथ्वीराज के राज्य के दक्षिणी प्रदेश पर विजय प्राप्तकर उसके कोष (खजाने) का अपहरण कर लिया था । उसे… Read More


भविष्यपुराण – प्रतिसर्गपर्व तृतीय – अध्याय ५ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (प्रतिसर्गपर्व — तृतीय भाग) अध्याय – ५ पृथ्वीराज व जयचन्द्र सूत जी बोले — इन्द्रप्रस्थ (दिल्ली) के राजा अनंगपाल ने पुत्रार्थ (पुत्रेष्टि नामक) यज्ञ का सविधान अनुष्ठान आरम्भ किया । भगवान् शिव की प्रसन्नता से चन्द्रकान्ति और कीर्तिमालिनी,… Read More


भविष्यपुराण – प्रतिसर्गपर्व तृतीय – अध्याय ४ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (प्रतिसर्गपर्व — तृतीय भाग) अध्याय – ४ देशराज एवं वत्सराज आदि राजाओं का आविर्भाव सूतजी ने कहा — भोजराज के स्वर्गारोहण के पश्चात् उनके वंश में सात राजा हुए, किंतु अल्पायु होने के नाते उन भाग्यहीनों का राजकाल… Read More


भविष्यपुराण – प्रतिसर्गपर्व तृतीय – अध्याय ३ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (प्रतिसर्गपर्व — तृतीय भाग) अध्याय – ३ राजा भोज और महामद की कथा सूतजी ने कहा —  शालिवाहन के वंश में दश राजाओं ने क्रमशः जन्म ग्रहणकर पाँच सौ वर्ष तक राज्य का उपभोग किया है । पश्चात्… Read More