भविष्यपुराण – प्रतिसर्गपर्व द्वितीय – अध्याय २७ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (प्रतिसर्गपर्व — द्वितीय भाग) अध्याय – २७ सत्यनारायण-व्रत के प्रसंग में लकड़हारों की कथा सूतजी बोले — ऋषियों ! अब इस सम्बन्ध में सत्यनारायण-व्रत के आचरण से कृतकृत्य हुआ भिल्लों की कथा सुनें । एक समय की बात… Read More


भविष्यपुराण – प्रतिसर्गपर्व द्वितीय – अध्याय २६ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (प्रतिसर्गपर्व — द्वितीय भाग) अध्याय – २६ सत्यनारायण व्रत – कथा में राजा चन्द्रचूड का आख्यान सूतजी बोले — ऋषियों ! प्राचीन काल में केदारखण्ड के मणिपूरक नामक नगर में चन्द्रचूड नामक एक धार्मिक तथा प्रजावत्सल राजा रहते… Read More


भविष्यपुराण – प्रतिसर्गपर्व द्वितीय – अध्याय २५ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (प्रतिसर्गपर्व — द्वितीय भाग) अध्याय – २५ सत्यनारायण की व्रत-कथा में शतानन्द ब्राह्मण की कथा सूतजी बोले — ऋषियों ! भगवान् नारायण ने स्वयं कृपापूर्वक देवर्षि नारदजी द्वारा जिस प्रकार इस व्रत का प्रचार किया, अब मैं उस… Read More


भविष्यपुराण – प्रतिसर्गपर्व द्वितीय – अध्याय २४ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (प्रतिसर्गपर्व — द्वितीय भाग) अध्याय – २४ सत्यनारायण की कथा ॥ कथा ॥ व्यासजी बोले – एक समय की बात है, नैमिषारण्य में शौनकादि ऋषियों ने पौराणिक श्रीसूतजी से विनयपूर्वक पूछा — ‘भगवन ! संसार के कल्याण के… Read More


भविष्यपुराण – प्रतिसर्गपर्व द्वितीय – अध्याय २३ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (प्रतिसर्गपर्व — द्वितीय भाग) अध्याय – २३ विक्रमस्य यज्ञकरणम्, चंद्रलोकं प्रतिगमनम्, भर्तृहरिवृत्तान्त व्यास जी बोले-विशाला नगरी में स्थित महर्षि वृन्द ने इसे सुनकर केदार कुण्ड में स्नान करके शिव जी की मानसिक अर्चना प्रारम्भ की । इसी प्रकार… Read More


भविष्यपुराण – प्रतिसर्गपर्व द्वितीय – अध्याय २२ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (प्रतिसर्गपर्व — द्वितीय भाग) अध्याय – २२ क्षत्रसिंहनृपतिकथावर्णनम्, विक्रमाख्यानकालवर्णनम् वैताल बोले — राजन् ! गंगा-यमुना के मध्य प्रदेश में बिल्वती नामक गाँव है। जन्मान्तर में मैं वहाँ का क्षत्रसिह नामक राजा था। उसी गाँव में शम्भुदत्त नामक ब्राह्मण… Read More


भविष्यपुराण – प्रतिसर्गपर्व द्वितीय – अध्याय २१ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (प्रतिसर्गपर्व — द्वितीय भाग) अध्याय – २१ विष्णुस्वामिचतुष्पुत्रकथा सूत जी बोले — इतना कहने पर उस वैताल ने विनम्र होकर राजा से कहा — जयस्थल नगर में वर्धमान नामक राजा हुआ । उसकी राजधानी में विष्णु स्वामी नामक… Read More


भविष्यपुराण – प्रतिसर्गपर्व द्वितीय – अध्याय २० ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (प्रतिसर्गपर्व — द्वितीय भाग) अध्याय – २० अनंगमञ्जरीकथा सूत जी बोले — इतना सुनकर वैताल ने पुनः राजा से कथा कहना आरम्भ किया । उस रमणीक विशाल नामक नगर में विपुलेश नामक राजा राज्य करता था । उस… Read More


भविष्यपुराण – प्रतिसर्गपर्व द्वितीय – अध्याय १९ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (प्रतिसर्गपर्व — द्वितीय भाग) अध्याय – १९ विप्रपुत्रकथा चित्रकूट में रूपदत्त नामक राजा रहता था । वह मृगया (शिकार) के लिए एक वन से दूसरे वन में पहुँच गया । वहां मध्याह्न के समय सरोवर के तट पर… Read More


भविष्यपुराण – प्रतिसर्गपर्व द्वितीय – अध्याय १८ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (प्रतिसर्गपर्व — द्वितीय भाग) अध्याय – १८ मोहिनीनामकचोरविप्रपत्नी-चोरपिण्ड कथा सूतजी बोले  —  शौनक, महाप्राज्ञ ! वैताल ने राजा से कहा-कम्बल नगर में सूदक्ष नामक राजा रहता था, जो न्यायी, धार्मिक, शूर, दानी एवं शिव जी का उपासक था।… Read More