भविष्यपुराण – प्रतिसर्गपर्व द्वितीय – अध्याय १७ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (प्रतिसर्गपर्व — द्वितीय भाग) अध्याय – १७ गुणाकराख्यद्विजसुत -यक्षिणीकथा सूत जी बोले — उस ब्राह्मण रूपधारी वैताल ने पुनः राजा से कहा — राजन् महाभाग ! मैं तुम्हें मनोहर कथा सुना रहा हूँ सुनो — महाभाग ! उज्जयिनी… Read More


भविष्यपुराण – प्रतिसर्गपर्व द्वितीय – अध्याय १६ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (प्रतिसर्गपर्व — द्वितीय भाग) अध्याय – १६ अधिक साहसी कौन ? कामावरूथिन्याख्य वैश्य कन्या कथा सूत जी बोले — उस वैताल ने पुनः ज्ञान निपुण उस राजा से कहा — दक्षिण प्रदेश में राजा चन्द्रशेखर की राजधानी है… Read More


भविष्यपुराण – प्रतिसर्गपर्व द्वितीय – अध्याय १५ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (प्रतिसर्गपर्व — द्वितीय भाग) अध्याय – १५ जीवन-दान का आदर्श जीमूतवाहन-शंखचूड-गरुडकथा सृत जी बोले — विप्र ! रुद्रगण उस वैताल ने राजा की प्रशंसा करते हुए पुनः एक सुन्दर आख्यान का वर्णन करना आरम्भ किया — महाराज !… Read More


भविष्यपुराण – प्रतिसर्गपर्व द्वितीय – अध्याय १४ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (प्रतिसर्गपर्व — द्वितीय भाग) अध्याय – १४ चन्द्रावलीकथा सूत जी बोले — भृगुवर्य, महाभाग ! वैताल ने राजा से कहा — राजन् ! पुष्पावती नामक रमणीक नगरी में सुविचार नामक राजा राज करता था । वह प्रजाओं के… Read More


भविष्यपुराण – प्रतिसर्गपर्व द्वितीय – अध्याय १३ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (प्रतिसर्गपर्व — द्वितीय भाग) अध्याय – १३ (सुखभाविनी वैश्य कन्या-चोरकथा) सूत जी बोले — कृतकृत्य होकर उस वैताल ने प्रसन्नचित्त से राजा से कहा — चन्द्रहृदय नामक नगर में रणधीर नामक राजा राज कर रहा था । उसी… Read More


भविष्यपुराण – प्रतिसर्गपर्व द्वितीय – अध्याय १२ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (प्रतिसर्गपर्व — द्वितीय भाग) अध्याय – १२ किये गये कर्मों का फल अवश्य भोगना पड़ता है (ब्राह्मण हत्या कथा) शौनक ने कहा — वैताल ने हँसकर राजा से कहा — राजन् ! चूड़ापुर में चूड़ामणि नामक राजा राज… Read More


भविष्यपुराण – प्रतिसर्गपर्व द्वितीय – अध्याय ११ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (प्रतिसर्गपर्व — द्वितीय भाग) अध्याय – ११ विषयी राजा राज्य के विनाश का कारण बनता है (राजा धर्मवल्लभ और मंत्री बुद्धिप्रकाश की कथा) सूत जी बोले — महाभाग ! शौनक ! उस वैताल देव ने पुनः शुभ एवं… Read More


भविष्यपुराण – प्रतिसर्गपर्व द्वितीय – अध्याय १० ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (प्रतिसर्गपर्व — द्वितीय भाग) अध्याय – १० सबसे अधिक श्रेष्ठ कौन? (गुणशेखर राज पत्नी कथा) सूत जी बोले — महाभाग ! वैताल ने राजा से यह कहा कि — महाराज ! गौड़ देश में वर्धन नामक नगर है,… Read More


भविष्यपुराण – प्रतिसर्गपर्व द्वितीय – अध्याय ९ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (प्रतिसर्गपर्व — द्वितीय भाग) अध्याय – ९ किसका सत्य श्रेष्ठ (कामालसाख्य वैश्य कन्या कथा) सूतजी बोले — महाबुद्धे, शौनक ! उस महाकुशल राजा का सम्मान करता हुआ वैताल ने उनसे कहा — राजन् ! रमणीक कामपुर नामक नगर… Read More


भविष्यपुराण – प्रतिसर्गपर्व द्वितीय – अध्याय ८ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (प्रतिसर्गपर्व — द्वितीय भाग) अध्याय – ८ (कुसुमदा देवी चिरंजीव कथा) सूत जी बोले — इसे सुनकर वैताल ने राजा से कहा — राजन् ! विदेह प्रदेश में मिथिला नामक नगरी है, धन-धान्य सम्पन्न गुणाधिप नामक राजा वहाँ… Read More