भविष्यपुराण – प्रतिसर्गपर्व प्रथम – अध्याय ३ भविष्यपुराण – प्रतिसर्गपर्व प्रथम – अध्याय ३ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (प्रतिसर्गपर्व — प्रथम भाग) अध्याय – ३ द्वापरयुग के चन्द्रवंशीय राजाओं का वृतान्त महर्षि शौनक ने पूछा — लोमहर्षणजी ! आप यह बताइये कि महाराज संवरण… Read More
भविष्यपुराण – प्रतिसर्गपर्व प्रथम – अध्याय २ भविष्यपुराण – प्रतिसर्गपर्व प्रथम – अध्याय २ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (प्रतिसर्गपर्व — प्रथम भाग) अध्याय – २ त्रेतायुग के सूर्य एवं चन्द्र-राजवंशो का वर्णन सूतजी बोले — महामुने ! वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि में बृहस्पतिवार के दिन महाराज सुदर्शन अपने परिकरों के साथ हिमालयपर्वत… Read More
भविष्यपुराण – प्रतिसर्गपर्व प्रथम – अध्याय १ भविष्यपुराण – प्रतिसर्गपर्व प्रथम – अध्याय १ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (प्रतिसर्गपर्व — प्रथम भाग) अध्याय – १ सत्ययुग के राजवंश का वर्णन “नारायणं नमस्कृत्य नरं चैव नरोत्तमम् । देवीं सरस्वतीं व्यासं ततो जयमुदीरयेत् ॥” ‘भगवान् नर-नारायण के अवतार-स्वरुप भगवान् श्रीकृष्ण एवं उनके सखा नरश्रेष्ठ अर्जुन, उनकी लीलाओं को… Read More
भविष्यपुराण – मध्यमपर्व तृतीय – अध्याय २० भविष्यपुराण – मध्यमपर्व तृतीय – अध्याय २० ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (मध्यमपर्व — तृतीय भाग) अध्याय – २० दिव्य, भौम एवं अन्तरिक्षजन्य उत्पात तथा उनकी शान्तिके उपाय सूतजी कहते हैं — ब्राह्मणो ! अब मैं विविध प्रकार के अपशकुनों, उत्पातों एवं उनके फलों का वर्णन कर रहा हूँ ।… Read More
भविष्यपुराण – मध्यमपर्व तृतीय – अध्याय १८ से १९ भविष्यपुराण – मध्यमपर्व तृतीय – अध्याय १८ से १९ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (मध्यमपर्व — तृतीय भाग) अध्याय – १८ से १९ एकाह-प्रतिष्ठा तथा काली आदि देवियों की प्रतिष्ठा-विधि सूतजी ने कहा — ब्राह्मणों ! कलियुग में अल्प सामर्थ्यवान् व्यक्ति देवता आदि की प्रतिष्ठा एक दिन में भी कर… Read More
भविष्यपुराण – मध्यमपर्व तृतीय – अध्याय १४ से १७ भविष्यपुराण – मध्यमपर्व तृतीय – अध्याय १४ से १७ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (मध्यमपर्व — तृतीय भाग) अध्याय – १४ से १७ पुष्पवाटिका तथा तुलसी की प्रतिष्ठा-विधि सूतजी कहते हैं — ब्राह्मणो ! पुष्पवाटिका की प्रतिष्ठा में तीन हाथ की एक वेदी का निर्माण कर उस पर घट की… Read More
भविष्यपुराण – मध्यमपर्व तृतीय – अध्याय १२ से १३ भविष्यपुराण – मध्यमपर्व तृतीय – अध्याय १२ से १३ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (मध्यमपर्व — तृतीय भाग) अध्याय – १२ से १३ मण्डप, महायूप और पौंसले आदि की प्रतिष्ठा-विधि सूतजी कहते हैं — द्विजगणो ! अब मैं यागादि के निमित निर्मित होनेवाले मण्डपकी प्रतिष्ठा-विधि बतलाता हूँ । वह मण्डप… Read More
भविष्यपुराण – मध्यमपर्व तृतीय – अध्याय ९ से ११ भविष्यपुराण – मध्यमपर्व तृतीय – अध्याय ९ से ११ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (मध्यमपर्व — तृतीय भाग) अध्याय – ९ से ११ वट, बिल्व तथा पूगीफल आदि वृक्ष-युक्त उद्यान की प्रतिष्ठा-विधि सूतजी कहते हैं — ब्राह्मणो ! वट वृक्ष की प्रतिष्ठा में वृक्ष के दक्षिण दिशा में उसकी जड़… Read More
भविष्यपुराण – मध्यमपर्व तृतीय – अध्याय ४ से ८ भविष्यपुराण – मध्यमपर्व तृतीय – अध्याय ४ से ८ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (मध्यमपर्व — तृतीय भाग) अध्याय – ४ से ८ अश्वत्थ, पुष्करिणी तथा जलाशय के प्रतिष्ठा की विधि सूतजी बोले — ब्राह्मणो ! अश्वत्थ-वृक्ष की प्रतिष्ठा करनी हो तो उसकी जड़ के पास दो हाथ लम्बी-चौड़ी एक… Read More
भविष्यपुराण – मध्यमपर्व तृतीय – अध्याय २ से ३ भविष्यपुराण – मध्यमपर्व तृतीय – अध्याय २ से ३ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (मध्यमपर्व — तृतीय भाग ) अध्याय – २ से ३ गोचर-भूमि के उत्सर्ग तथा लघु उद्यानों की प्रतिष्ठा-विधि सूतजी कहते हैं — ब्राह्मणों ! अब मैं गोचर-भूमि के विषयमें बता रहा हूँ, आप सुनें । गोचर… Read More