भविष्यपुराण – मध्यमपर्व तृतीय भाग – अध्याय १ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (मध्यमपर्व — तृतीय भाग) अध्याय – १ उद्यान-प्रतिष्ठा-विधि सूतजी कहते हैं — ब्राह्मणों ! उद्यान आदि की प्रतिष्ठा में जो कुछ विशेष विधि है, अब उसे बता रहा हूँ, आपलोग सुनें । सर्वप्रथम एक चौकोर मण्डल की… Read More


भविष्यपुराण – मध्यमपर्व द्वितीय – अध्याय १९ से २१ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (मध्यमपर्व — द्वितीय भाग) अध्याय – १९ से २१ प्रतिष्ठा-मुहूर्त एवं जलाशय आदिकी प्रतिष्ठा-विधि सूतजी कहते हैं — ब्राह्मणों ! ऋषियों ने देवता आदि की प्रतिष्ठा माघ, फाल्गुन आदि छः मास नियत किये हैं । जब… Read More


भविष्यपुराण – मध्यमपर्व द्वितीय – अध्याय १७ से १८ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (मध्यमपर्व — द्वितीय भाग) अध्याय – १७ से १८ अधिवासन-कर्म एवं यज्ञ-कर्म में उपयोज्य उत्तम ब्राह्मण तथा धर्मदेवता का स्वरूप सूतजी कहते हैं — ब्राह्मणों ! देव-प्रतिष्ठा के पहले दिन देवताओं का अधिवासन करना चाहिये और… Read More


ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (मध्यमपर्व — द्वितीय भाग) अध्याय – १४ से १६ कुशकण्डिका-विधान तथा अग्नि-जिह्वाओं के नाम सूतजी कहते हैं — ब्राह्मणों ! अब मैं याग-विशेषों में स्वगृह्याग्नि-विधि कह रहा हूँ । अपनी वेदादि शाखा के अनुकूल ही गृह्माग्नि-विधि करनी चाहिये । दूसरे की शाखा के विधान से याग-विशेषों का अनुष्ठान करने पर… Read More


भविष्यपुराण – मध्यमपर्व द्वितीय – अध्याय १० से १३ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (मध्यमपर्व — द्वितीय भाग) अध्याय – १० से १३ वास्तु-मंडल के निर्माण एवं वास्तु-पूजन की संक्षिप्त विधि सूतजी कहते हैं — ब्राह्मणों ! अब मैं वास्तु मण्डल का संक्षित वर्णन कर रहा हूँ । पहले भूमि… Read More


भविष्यपुराण – मध्यमपर्व द्वितीय – अध्याय ९ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (मध्यमपर्व — द्वितीय भाग) अध्याय ९ गोत्र-प्रवर आदि के ज्ञान की आवश्यकता सूतजी कहते हैं — ब्राह्मणों ! गोत्र-प्रवर की परम्परा को जानना अत्यन्त आवश्यक होता है, इसलिये अपने-अपने गोत्र या प्रवर को पिता, आचार्य तथा शास्त्र द्वारा… Read More


भविष्यपुराण – मध्यमपर्व द्वितीय – अध्याय ७ से ८ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (मध्यमपर्व — द्वितीय भाग) अध्याय ७ से ८ काल-विभाग, तिथि-निर्णय एवं वर्षभर के विशेष पर्वो तथा तिथियों के पुण्यप्रद कृत्य सूतजी बोले — ब्राह्मणों ! देव-कर्म या पैतृक-कर्म काल के आधार पर ही सम्पन्न होते हैं… Read More


भविष्यपुराण – मध्यमपर्व द्वितीय – अध्याय ६ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (मध्यमपर्व — द्वितीय भाग) अध्याय ६ चतुर्विध मास-व्यवस्था एवं मलमास-वर्णन सूतजी बोले — ब्राह्मणों ! अब मैं (विभिन्न प्रकार के) मासों का वर्णन करता हूँ । मास चार प्रकार के होते हैं – चान्द्र, सौर, सावन तथा नाक्षत्र… Read More


भविष्यपुराण – मध्यमपर्व द्वितीय – अध्याय ३ से ५ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (मध्यमपर्व — द्वितीय भाग) अध्याय ३ से ५ यज्ञादि कर्म में दक्षिणाका माहात्म्य, विभिन्न कर्मों में पारिश्रमिक व्यवस्था और कलश-स्थापन का वर्णन सूतजी बोले — ब्राह्मणों ! शास्त्रविहित यज्ञादि कार्य दक्षिणा-रहित एवं परिमाण-विहीन कभी नहीं करना… Read More


भविष्यपुराण – मध्यमपर्व द्वितीय – अध्याय १ से २ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (मध्यमपर्व — द्वितीय भाग) अध्याय १ से २ यज्ञादि कर्मों के मण्डल-निर्माण का विधान तथा क्रौञ्चादि पक्षियों के दर्शन का फल सूतजी ने कहा — ब्राह्मणगण ! अब मैं आप लोगों से पुराणों में वर्णित मण्डल-निर्माण… Read More