भविष्यपुराण – ब्राह्म पर्व – अध्याय १७ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (ब्राह्मपर्व) प्रतिपत्कल्प – निरूपण में ब्रह्माजी की पूजा-अर्चा की महिमा राजा शतानीक ने कहा — ब्रह्मन् ! आप प्रतिपदा तिथि में किये जाने वाले कृत्य, ब्रह्माजी के पूजन की विधि और उसके फल का विस्तारपूर्वक वर्णन करें । सुमन्तु मुनि बोले — हे राजन् !… Read More
भविष्यपुराण – ब्राह्म पर्व – अध्याय १६ ॐ श्रीपरमात्मने नम : श्रीगणेशाय नम: ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (ब्राह्मपर्व) पंचमहायज्ञों का वर्णन तथा व्रत-उपवासों के प्रकरण में आहार का निरूपण एवं प्रतिपदा तिथि की उत्पत्ति, व्रत-विधि और माहात्म्य सुमन्तु मुनि ने कहा – राजन् ! इस प्रकार स्त्रियों के लक्षण और सदाचार का वर्णन करके ब्रह्माजी अपने लोक, तथा ऋषिगण भी अपने-अपने… Read More
भविष्यपुराण – ब्राह्म पर्व – अध्याय १० – १५ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ भविष्यपुराण ॥ (ब्राह्मपर्व) पतिव्रता स्त्रियों के कर्तव्य एवं सदाचार का वर्णन, स्त्रियों के लिये ग्रहस्थ-धर्म के उत्तम व्यवहार की आवश्यक बातें ब्रह्माजी बोले — मुनीश्वरो ! गृहस्थ-धर्म का मूल पतिव्रता स्त्री है, पतिव्रता स्त्री पति का आराधन किस विधि से करें, उसका अब मैं वर्णन… Read More
भविष्यपुराण – ब्राह्म पर्व – अध्याय ८-९ ॐ श्रीपरमात्मने नम : श्रीगणेशाय नम: ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (ब्राह्मपर्व) धन एवं स्त्री के तीन आश्रय तथा स्त्री-पुरुषों के पारस्परिक व्यवहार का वर्णन ब्रह्माजी बोले — मुनीश्वरो ! उत्तम रीति से विवाह सम्पन्न कर गृहस्थ को जो करना चाहिये, उसका मैं वर्णन करता हूँ। सर्वप्रथम गृहस्थ को उत्तम देश में ऐसा आश्रय ढूँढना… Read More
भविष्यपुराण – ब्राह्म पर्व – अध्याय ७ ॐ श्रीपरमात्मने नम : श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (ब्राह्मपर्व) विवाह-सम्बन्धी तत्त्वों का निरूपण, विवाहयोग्य कन्या के लक्षण, आठ प्रकार के विवाह, ब्रह्मावर्त, आर्यावर्त आदि उत्तम देशों का वर्णन ब्रह्माजी बोले — मुनीश्वरो ! जो कन्या माता की सपिण्ड अर्थात् माता की सात पीढ़ी के अन्तर्गत की न हो तथा पिता के समान… Read More
भविष्यपुराण – ब्राह्म पर्व – अध्याय ६ भविष्यपुराण – ब्राह्म पर्व – अध्याय ६ ॐ श्रीपरमात्मने नम : श्रीगणेशाय नम: ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (ब्राह्मपर्व) ग्रहस्थाश्रम में धन एवं स्त्री की महत्ता, धन-सम्पादन करने की आवश्यकता तथा समान कुल में विवाह-सम्बन्ध की प्रशंसा राजा शतानीक ने सुमन्तु मुनि से पूछा — भगवन ! स्त्रियों के लक्षणों को तो मैंने सुना, अब… Read More
भविष्यपुराण – ब्राह्म पर्व – अध्याय ५ ॐ श्रीपरमात्मने नम : श्रीगणेशाय नम: ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (ब्राह्मपर्व) विवाह-संस्कार के उपक्रम में स्त्रियों के शुभ और अशुभ लक्षणों का वर्णन तथा आचरण की श्रेष्ठता सुमन्तु मुनि बोले – राजन् ! गुरु के आश्रम में ब्रह्मचर्य-व्रत का पालन करते हुए स्नातक को वेदाध्ययन कर गृहस्थाश्रम में प्रवेश करना चाहिये। घर आने पर… Read More
भविष्यपुराण – ब्राह्म पर्व – अध्याय ४ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नम: ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (ब्राह्मपर्व) वेदाध्ययन-विधि, ओंकार तथा गायत्री-महात्म्य, आचार्यादि-लक्षण, ब्रह्मचारि-धर्म-निरूपण, अभिवादन-विधि, स्नातक की महिमा में अङ्गिरापुत्र का आख्यान, माता-पिता और गुरु की महिमा सुमन्तु मुनिने कहा – राजन् ! ब्राह्मण का केशान्त (समावर्तन) – संस्कार सोलहवें वर्ष में, क्षत्रिय का बाइसवें वर्ष में तथा वैश्य का पचीसवें वर्ष… Read More
भविष्यपुराण – ब्राह्म पर्व – अध्याय ३ ॐ श्रीपरमात्मने नम: ॥ श्रीगणेशाय नम ॥ ॥ॐ नमो भगवते वासुदेवाय॥ भविष्यपुराण ब्राह्म पर्व गर्भाधान से यज्ञोपवीत पर्यन्त संस्कारों की संक्षिप्त विधि, अन्न-प्रशंसा तथा भोजन-विधि के प्रसंग में धनवर्धन की कथा, हाथों के तीर्थ एवं आचमन-विधि राजा शतानीक ने कहा — हे मुने ! आपने मुझे जातकर्मादि संस्कारों के विषय में बताया, अब आप इन… Read More
भविष्यपुराण – ब्राह्म पर्व – अध्याय १-२ ॐ श्रीपरमात्मने नम: ॥ श्रीगणेशाय नम ॥ ॥ॐ नमो भगवते वासुदेवाय॥ भविष्यपुराण ब्राह्म पर्व व्यास-शिष्य महर्षि सुमन्तु एवं राजा शतानीक का संवाद, भविष्यपुराण की महिमा एवं परम्परा सृष्टि-वर्णन, चारों वेद-पुराण एवं चारों वर्णों की उत्पत्ति, चतुर्विध सृष्टि, काल-गणना, युगों की संख्या, उनके धर्म तथा संस्कार “नारायंण नमस्कृत्य नर व नरोत्तम। देवी सरस्वतीं व्यास ततो जयपुदीरयेत्॥”… Read More