भविष्यपुराण – प्रतिसर्गपर्व चतुर्थ – अध्याय १० भविष्यपुराण – प्रतिसर्गपर्व चतुर्थ – अध्याय १० ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (प्रतिसर्गपर्व — चतुर्थ भाग) अध्याय १० कृष्णचैतन्य, वाल्मीकि और शङ्कराचार्य समुत्पत्ति का वर्णन बृहस्पति जी बोले — पहले कोई विष्णुशर्मा नामक ब्राह्मण था, जो वेद का मर्मज्ञ तथा प्रसन्नचित्त होकर नित्य सर्वदेवमय विष्णु की आराधना करता था ।… Read More
भविष्यपुराण – प्रतिसर्गपर्व चतुर्थ – अध्याय ९ भविष्यपुराण – प्रतिसर्गपर्व चतुर्थ – अध्याय ९ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (प्रतिसर्गपर्व — चतुर्थ भाग) अध्याय ९ धन्वंतरि, सुश्रुत, जयदेव समुत्पति का वर्णन सूतजी बोले — प्रयाग तीर्थ में भगवान् बृहस्पति ने देवों को सूर्य का उत्तम माहात्म्य सुनाकर पुनः कहना आरम्भ किया । सुरोत्तम ! पहले त्रेतायुग के… Read More
भविष्यपुराण – प्रतिसर्गपर्व चतुर्थ – अध्याय ८ भविष्यपुराण – प्रतिसर्गपर्व चतुर्थ – अध्याय ८ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (प्रतिसर्गपर्व — चतुर्थ भाग) अध्याय ८ मध्वाचार्य, श्रीधराचार्य, विष्णुस्वामि, वाणीभूषण, भट्टोजिदीक्षित तथा वराहमिहिराचार्य आदि की उत्पत्ति का वर्णन बृहस्पति जी बोले — इन्द्र ! पहले त्रेतायुग में अयोध्यापुरी में शक्रशर्मा नामक एक ब्राह्मण उत्पन्न हुआ, जो अत्यन्त पुण्य… Read More
भविष्यपुराण – प्रतिसर्गपर्व चतुर्थ – अध्याय ७ भविष्यपुराण – प्रतिसर्गपर्व चतुर्थ – अध्याय ७ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (प्रतिसर्गपर्व — चतुर्थ भाग) अध्याय ७ भगवान् सूर्य के तेज से आचार्य ईश्वरपुरी, आचार्य रामानन्द तथा निम्बार्काचार्य की उत्पत्ति का वर्णन ऋषियों ने कहा — ब्रह्मन् ! भगवान् बृहस्पति ने वहाँ एकत्र स्थित देववृन्दों से मण्डलस्थ सूर्यदेव के… Read More
भविष्यपुराण – प्रतिसर्गपर्व चतुर्थ – अध्याय ६ भविष्यपुराण – प्रतिसर्गपर्व चतुर्थ – अध्याय ६ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (प्रतिसर्गपर्व — चतुर्थ भाग) अध्याय ६ दिल्ली नगर पर पठानों का आसन और तैमूरलंग का उत्पात महर्षि शौनक बोले — मुनिश्रेष्ठ ! (पृथ्वीराज) के पश्चात् कौन-कौन राजा हुए । महाभाग ! इसे हमें बताने की कृपा करें, क्योंकि… Read More
भविष्यपुराण – प्रतिसर्गपर्व चतुर्थ – अध्याय ५ भविष्यपुराण – प्रतिसर्गपर्व चतुर्थ – अध्याय ५ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (प्रतिसर्गपर्व — चतुर्थ भाग) अध्याय ५ भगवान् से चारों वर्णों की उत्पत्ति, चारों युगों में भगवान् के अवतारों एवं युगों के मनुष्यों की आयु का निरुपण सूतजी बोले— अव्यक्तजन्मा ब्रह्मा के मध्याह्न काल के समय चाक्षुषान्तर (मन्वन्तर) —में… Read More
भविष्यपुराण – प्रतिसर्गपर्व चतुर्थ – अध्याय ४ भविष्यपुराण – प्रतिसर्गपर्व चतुर्थ – अध्याय ४ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (प्रतिसर्गपर्व — चतुर्थ भाग) अध्याय ४ परिहारवंश और बंगाल के शूरवंश आदि का वर्णन सूत जी बोले — भृगुवर्य ! मैं परिहार वंश का वर्णन करता हूँ, सुनो ! अथर्ववेद के पारायण करने वाले उस राजा परिहर ने… Read More
भविष्यपुराण – प्रतिसर्गपर्व चतुर्थ – अध्याय ३ भविष्यपुराण – प्रतिसर्गपर्व चतुर्थ – अध्याय ३ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (प्रतिसर्गपर्व — चतुर्थ भाग) अध्याय ३ ब्राह्मणों की उत्पत्ति के प्रसंग में शुक्लवंश एवं उसके आगे होनेवाले विभिन्न क्षत्रियवंशों का वर्णन सूत जी बोले — विप्रवर ! मैं शुक्लवंश का आरम्भ से वर्णन कर रहा हूँ, सुनो !… Read More
भविष्यपुराण – प्रतिसर्गपर्व चतुर्थ – अध्याय २ भविष्यपुराण – प्रतिसर्गपर्व चतुर्थ – अध्याय २ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (प्रतिसर्गपर्व — चतुर्थ भाग) अध्याय २ राजपूताना तथा दिल्ली नगर के राजवंश का इतिहास सूतजी बोले — मध्यप्रदेश का निवासी राजा वयहानि (चपहानि) ने अपने सिंहासनारूढ़ होने पर ब्रह्म निर्मित उस अजमेर को अपनी राजधानी बनाया । अजन्मा… Read More
भविष्यपुराण – प्रतिसर्गपर्व चतुर्थ – अध्याय १ भविष्यपुराण – प्रतिसर्गपर्व चतुर्थ – अध्याय १ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (प्रतिसर्गपर्व — चतुर्थ भाग) अध्याय १ भविष्यपुराण के प्रतिसर्गपर्व के इस चतुर्थ खण्ड का इतिहास की दृष्टि से विशेष महत्व है । इसमें मुख्यरुप से सत्ययुग, त्रेता, द्वापर तथा विशेषरूपसे कलियुग के चारों चरणों का इतिहास, राजवंश और… Read More