भविष्यपुराण – प्रतिसर्गपर्व चतुर्थ – अध्याय २० ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (प्रतिसर्गपर्व — चतुर्थ भाग) अध्याय २० जगन्नाथ माहात्म्य का वर्णन सूत जी बोले — एक बार शुद्धात्मा एवं शिव भक्ति में निमग्न रहने वाले भट्टोजि दीक्षित ने बीस वर्षीय कृष्ण चैतन्य के यहाँ जाकर नमस्कार पूर्वक उनसे कहा… Read More


भविष्यपुराण – प्रतिसर्गपर्व चतुर्थ – अध्याय १९ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (प्रतिसर्गपर्व — चतुर्थ भाग) अध्याय १९ कृष्णचैतन्य यज्ञांश शिष्य बलभद्र विष्णुस्वामी और मध्वाचार्य के वृत्तान्त का वर्णन सूत जी बोले — इस प्रकार देवों के माहात्म्य वर्णन करने के उपरान्त भगवान् बृहस्पति ने मुख द्वारा अपना अंश निकालकर… Read More


भविष्यपुराण – प्रतिसर्गपर्व चतुर्थ – अध्याय १८ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (प्रतिसर्गपर्व — चतुर्थ भाग) अध्याय १८ अशऽविनीकुमारों के अंश से सधन (सदन कसाई) और संत रैदास की समुत्पत्ति का वर्णन सूत जी बोले — भगवान बृहस्पति ने देवों से इस प्रकार की बातें कहकर पुनः अश्विनी कुमार की… Read More


भविष्यपुराण – प्रतिसर्गपर्व चतुर्थ – अध्याय १७ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (प्रतिसर्गपर्व — चतुर्थ भाग) अध्याय १७ संत कबीर, भक्त नरसी, पीपा, नानक तथा साधु नित्यानन्दजी के पूर्वजन्मों का वर्णन बृहस्पति जी बोले — सम्पूर्ण शक्ति सम्पन्न भगवान् विष्णु द्वारा उन दोनों भीषण पुत्रों के निधन होने पर दिति… Read More


भविष्यपुराण – प्रतिसर्गपर्व चतुर्थ – अध्याय १६ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (प्रतिसर्गपर्व — चतुर्थ भाग) अध्याय १६ रामानन्दजी के शिष्य नामदेव, भक्त-रंकण(राँका)-वैश्य एवं यंकणा (बाँका) का चरित्र, वरुणदेव और पराम्बा की महिमा का वर्णन बृहस्पति जी बोले — स्वायम्भुव मन्वन्तर काल में ध्रुववंशज राजा प्राचीन बर्हि ने यज्ञानुष्ठान करना… Read More


भविष्यपुराण – प्रतिसर्गपर्व चतुर्थ – अध्याय १५ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (प्रतिसर्गपर्व — चतुर्थ भाग) अध्याय १५ वसु देवताओं के अंश से कुबेर आदि की उत्त्पति रामायण की संक्षिप्त कथा तथा त्रिलोचन वैश्योत्पत्ति का वर्णन सूत जी बोले — भृगुवर्य एवं महाभाग ! बृहस्पति द्वारा कथित उस वसुमाहात्म्य का… Read More


भविष्यपुराण – प्रतिसर्गपर्व चतुर्थ – अध्याय १४ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (प्रतिसर्गपर्व — चतुर्थ भाग) अध्याय १४ रुद्रमाहात्म्य, भव के अंश से रामानुजाचार्य का आविर्भाव बृहस्पति बोले — जिस समय यह सदसदात्मक दृश्य (स्थूल प्रपञ्च-जगत्) महाप्रलय में विलीन हो जाने के कारण दिखाई नहीं देता है, उस समय देवल… Read More


भविष्यपुराण – प्रतिसर्गपर्व चतुर्थ – अध्याय १३ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (प्रतिसर्गपर्व — चतुर्थ भाग) अध्याय १३ अघोरपंथी भैरव हनुमज्जन्म, रुद्रमाहात्म्य और बालशर्मा की उत्पत्ति का वर्णन बृहस्पति बोले — अव्यक्तजन्मा ब्रह्मा ने सोलह वर्ष तक कमल में स्थित रहने के उपरान्त पुनः सृष्टि करने का प्रयत्न किया ।… Read More


भविष्यपुराण – प्रतिसर्गपर्व चतुर्थ – अध्याय १२ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (प्रतिसर्गपर्व — चतुर्थ भाग) अध्याय १२ भारती, गोरखनाथ, क्षेत्रशर्मा और ढुण्ढिराज की उत्पत्ति का वर्णन सूत जी बोले — बृहस्पति की कही हुई कथा मैं पुनः कह रहा हूँ, सुनो ! पहले हिर्बु नामक एक दानव हुआ था,… Read More


भविष्यपुराण – प्रतिसर्गपर्व चतुर्थ – अध्याय ११ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (प्रतिसर्गपर्व — चतुर्थ भाग) अध्याय ११ आनन्दगिरि, वनशर्मा और पुरीशर्मा की उत्पत्ति का वर्णन बृहस्पति जी बोले — पहले समय में नैमिषारण्य स्थान में एक अजगर नामक ब्राह्मण रह रहा था, जो वेदान्तशास्त्र में निपुण, शनि और शिव… Read More