शिवपंचाक्षरस्तोत्र ॥ शिव पंचाक्षर स्तोत्र ॥ नागेन्द्रहाराय त्रिलोचनाय भस्माङ्गरागाय महेश्वराय । नित्याय शुद्धाय दिगम्बराय तस्मै ‘न’ काराय नमः शिवाय ॥ १ ॥ मन्दाकिनि-सलिलचन्दन-चर्चिताय नन्दीश्वर-प्रमथनाथ- महेश्वराय । मन्दारपुष्प-बहुपुष्प-सुपूजिताय तस्मै ‘म’ काराय नमः शिवाय ॥ २ ॥… Read More
श्री शिवमहिम्नस्तोत्रम् ॥ अथ श्री शिव महिम्न स्तोत्रम् ॥ [एक समय की बात है जब चित्ररथ नामक शिवभक्त राजा हुए जिन्होंने अपने राज्य में कई प्रकार के पुष्पों का एक उद्यान बनवाया, वह शिवपूजन के लिये पुष्प वहीं से ले जाते थे। महान् शिवभक्त गंधर्व पुष्पदंत देवराज इंद्र की सभा के मुख्य गायक थे, एक दिन उनकी… Read More
श्रीशिव प्रातः स्मरण स्तोत्रम् ॥ श्रीशिव प्रातः स्मरण स्तोत्रम् ॥ प्रातः स्मरामि भवभीतिहरं सुरेशं गङ्गाधरं वृषभवाहनमम्बिकेशम् । खट्वाङ्गशूलवरदाभयहस्तमीशं संसाररोगहरमौषधमद्वितीयम् ॥ १ ॥… Read More
भगवान् शिव को नमस्कार भगवान् शिव को नमस्कार नमः शम्भवाय च मयोभवाय च नमः शङ्कराय च । मयस्कराय च नमः शिवाय च शिवतराय च ॥ कल्याण एवं सुख के मूल स्रोत भगवान् शिव को नमस्कार है । कल्याण के विस्तार करनेवाले तथा सुख के विस्तार करनेवाले भगवान् शिव को नमस्कार है । मंगलस्वरूप और मंगलमयता की सीमा भगवान् शिव… Read More
अष्टमूर्तिस्तव अथवा मूर्त्यष्टकस्तोत्र ॥ अष्टमूर्तिस्तव अथवा मूर्त्यष्टकस्तोत्र ॥ संजीवनीविद्या प्रदान करनेवाली स्तुति महर्षि भृगु के वंश में उत्पन्न श्रीशुक्राचार्य महान् शिवभक्तों में परिगणित हैं । इन्होंने काशीपुरी में आकर एक शिवलिंग की स्थापना की, जो शुक्रेश्वर नाम से प्रसिद्ध हुआ । भगवान् विश्वनाथ का ध्यान करते हुए इन्होंने बहुत कालतक घोर तप किया । उनकी उग्र तपस्या से… Read More
भगवान् शिव के विभिन्न मन्त्र ॥ भगवान् शिव के विभिन्न मन्त्र ॥ एकाक्षरीमंत्र – ‘हौं’ । हिन्दी तन्त्रसार में ऋषि वामदेव, छन्द पंक्ति, देवता सदाशिव कहे गये है । शारदा तिलक में ‘हं’ बीज औं’ शक्ति बतलाया गया है । एकाक्षर चिंतामणि – ‘क्ष्रौं’ । शारदा तिलक के अनुसार यह भगवान शिव के उत्तरवक्त्र से सम्बन्धित है । ऋषि काश्यप,… Read More
गुह्यकाली शान्ति स्तोत्रम् ॥ अथ गुह्यकाली शान्ति स्तोत्रम् ॥ काली काली महाकालि कालिके पापहारिणि । धर्ममोक्षप्रदे देवि गुह्यकालि नमोऽस्तुते ॥ १ ॥ संग्रामे विजयं देहि धनं देहि सदा गृहे । धर्मकामार्थसंपत्तिं देहि कालि नमोऽस्तुते ॥ २ ॥ उल्कामुखि ललज्जिह्वे घोररावे भगप्रिये । श्मशानवासिनि प्रेते शवमांसप्रियेऽनघे ॥ ३ ॥… Read More
विश्वमङ्गल गुह्यकाली कवचम् ॥ अथ विश्वमङ्गल गुह्यकाली कवचम् ॥ विनियोगः- ॐ अस्य श्रीविश्वमङ्गलनाम्नो गुह्यकाली महावज्र कवचस्य संवर्तऋषिरनुष्टप्छन्दः, एकवक्त्रादि शतवक्त्रान्ता गुह्यकाली देवता, फ्रें बीजं, ख्फ्रें शक्तिः, छ्रीं कीलकं सर्वाभीष्टसिद्धि पूर्वकात्मरक्षणे जपे विनियोगः । ॐ फ्रें पातु शिरः सिद्धिकराली कालिका मम । ह्रीं छ्रीं ललाटं मे सिद्धिविकरालि सदावतु ॥ १ ॥ श्रीं क्लीं मुखं चण्डयोगेश्वरी रक्षतु सर्वदा । हूं स्त्रीं… Read More
गुह्यकाली : विविध न्यास प्रयोगाः 10 ॥ गुह्यकाली : विविध न्यास प्रयोगाः 10 ॥ ॥ गुह्यकाली विविध न्यास प्रयोगाः 01 ॥ ॥ गुह्यकाली विविध न्यास प्रयोगाः 02 ॥ ॥ गुह्यकाली विविध न्यास प्रयोगाः 03 ॥ ॥ गुह्यकाली विविध न्यास प्रयोगाः 04 ॥ ॥ गुह्यकाली विविध न्यास प्रयोगाः 05 ॥ ॥ गुह्यकाली विविध न्यास प्रयोगाः 06 ॥ ॥ गुह्यकाली विविध न्यास प्रयोगाः… Read More
गुह्यकाली : विविध न्यास प्रयोगाः 09 ॥ गुह्यकाली : विविध न्यास प्रयोगाः 09 ॥ ॥ गुह्यकाली विविध न्यास प्रयोगाः 01 ॥ ॥ गुह्यकाली विविध न्यास प्रयोगाः 02 ॥ ॥ गुह्यकाली विविध न्यास प्रयोगाः 03 ॥ ॥ गुह्यकाली विविध न्यास प्रयोगाः 04 ॥ ॥ गुह्यकाली विविध न्यास प्रयोगाः 05 ॥ ॥ गुह्यकाली विविध न्यास प्रयोगाः 06 ॥ ॥ गुह्यकाली विविध न्यास प्रयोगाः… Read More