त्रि-त्रिंशदक्षर त्र्यम्बक मन्त्र प्रयोगः ॥ त्रि-त्रिंशदक्षर त्र्यम्बक मन्त्र प्रयोगः ॥ शारदातिलक मन्त्र:- “ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगंधिं पुष्टिवर्धनम् । उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात् ॥” ऋचा के पहले ॐ लगायें । आगे व पीछे दोनों ओर ॐ लगाने से ३४ अक्षर का मन्त्र हुआ । विनियोगः – ॐ अस्य त्र्यम्बक मन्त्रस्य वसिष्ठ ऋषिः, अनुष्टप् छन्दः त्र्यम्बकपार्वतीपतिर्देवता, त्र्यं बीजं, बं शक्तिः, कं कीलकं… Read More
मृत्युञ्जय मन्त्र के भेद ॥ मृत्युञ्जय मन्त्र के भेद ॥ मृत्युञ्जयस्त्रिधा प्रोक्त आद्यो मृत्युञ्जयः स्मृतः । मृतसञ्जीवनी चैव महामृत्युञ्जयस्तथा ॥ मृत्युञ्जयः केवलः स्यात् पुटितो व्याहृतित्रयैः । तारं त्रिबीजं व्याहृत्य पुटितो मृतसञ्जीवनी ॥ तारं त्रिबीजं व्याहृत्य पुटितैस्तैस्त्र्यम्बकः । महामृत्युञ्जयः प्रोक्तः सर्वमन्त्रविशारदैः ॥ उक्त उद्धार मन्त्रों के अनुसार ‘त्र्यम्बक यजामहे..’ ऋचा को आद्य व अन्त में व्याहृति ‘भूर्भुवः स्वः’ से संपुटित… Read More
मृत्युञ्जय मन्त्र – अन्य मन्त्र ॥ मृत्युञ्जय मन्त्र – अन्य मन्त्र ॥ Continue :- मृत्युञ्जय मन्त्र के भेद नवाक्षरी मृत्युञ्जय – ॐ जूं सः पालय पालय । दशाक्षरीमृत्युञ्जय मन्त्र – ॐ जूं सः मां पालय पालय । (किसी अन्य के लिये ‘मां’ के स्थान पर रोगी का नाम द्वितीया विभक्ति का एक वचन बनाकर जोड़ देना चाहिये) द्वादशाक्षरीमृत्युञ्जय मन्त्रः –… Read More
शिव पञ्चावरण देवानां स्तुतिः ॥ अथ शिव पञ्चावरण देवानां स्तुतिः ॥ इस स्तोत्र में रुद्र यन्त्र में वर्णित पूजा का वृहत् कर्म है जो व्यक्ति नित्य रुद्र यन्त्र का अर्चन करने में असमर्थ हैं वे यदि इस स्तोत्र का पाठ करें तो उसे यन्त्रार्चन का पूर्ण फल मिलता है । स्तोत्रं वक्षामि ते कृष्ण पंचावरणमार्गतः । योगेश्वरमिदं पुण्यं कर्म… Read More
त्र्यक्षरी मृत्युञ्जय मंत्र विविध प्रयोगः ॥ अथ त्र्यक्षरी मृत्युञ्जय मंत्र विविध प्रयोगः ॥ बहुधा मृत्युञ्जय प्रयोग रोग-पीड़ा निवारण में ही करते हैं । ग्रहपीड़ा शमन में भी शुभ है । शिव प्रतिमा व शिवलिङ्ग पर अलग-अलग कामना के लिये अलग-अलग अभिषेक द्रव्य हैं । अभिचार व प्रेतादि दोष में सरसों के तेल का अभिषेक, उष्णज्वर, टाईफाईड में दही की छाछ… Read More
श्री रुद्र कवचम् ॥ श्री रुद्र कवचम् ॥ ॥ ॐ गं गणपतये नमः ॥ विनियोग- ॐ अस्य श्री रुद्र कवच स्तोत्र महा मंत्रस्य दूर्वासऋषिः अनुष्ठुप् छंदः त्र्यंबक रुद्रो देवता ह्रां बीजं श्रीं शक्तिः ह्रीं कीलकम् – मम मनसोभीष्टसिद्ध्यर्थे जपे विनियोगः । ह्रामित्यादिषड्बीजैः षडंगन्यासः ॥ ॥ ध्यानम् ॥… Read More
ब्रह्माण्डविजय श्री शिव कवचम् ॥ ब्रह्माण्डविजय श्री शिव कवचम् ॥ ॥ ॐ गं गणपतये नमः ॥ ॥ नारद उवाच ॥ शिवस्य कवचं ब्रूहि मत्स्य राजेन यद्धृतम् । नारायण महाभाग श्रोतुं कौतूहलं मम ॥ १ ॥ ॥ श्रीनारायण उवाच ॥… Read More
सदाशिव प्रासादख्यमन्त्रकवचम् ॥ सदाशिव प्रासादख्यमन्त्रकवचम् ॥ ॥ श्रीआनन्दभैरव उवाच ॥ शैलजे देवदेवेशि सर्वाम्नायप्रपूजिते । सर्वं मे कथितं देवि कवचं न परकाशितम् ॥ १ ॥ प्रासाद्याख्यस्य मन्त्रस्य कवचं मे प्रकाशय । सदाशिवमहादेवभावितं सिद्धिदायकम् ॥ २ ॥ अप्रकाश्यं महामन्त्रं भैरवीभैरवोदयम् । सर्वरक्षाकरं देवि यदि स्नेहोऽस्ति मां प्रति ॥ ३ ॥ ॥ श्रीआनन्दभैरवी उवाच ॥… Read More
श्रीशिवसहस्रनामस्तोत्रम् – महाभारतान्तर्गतम् ॥ श्रीशिवसहस्रनामस्तोत्रम् – महाभारतान्तर्गतम् ॥ ॥ वासुदेव उवाच ॥ ततः स प्रयतो भूत्वा मम तात युधिष्ठिर । प्राञ्जलिः प्राह विप्रर्षिर्नामसङ्ग्रहमादितः ॥ १ ॥ ॥ उपमन्युरुवाच ॥ ब्रह्मप्रोक्तैर्ऋषिप्रोक्तैर्वेदवेदाङ्गसम्भवैः । सर्वलोकेषु विख्यातं स्तुत्यं स्तोष्यामि नामभिः ॥ २ ॥ महद्भिर्विहितैः सत्यैः सिद्धैः सर्वार्थसाधकैः । ऋषिणा तण्डिना भक्त्या कृतैर्वेदकृतात्मना ॥ ३ ॥ यथोक्तैः साधुभिः ख्यातैर्मुनिभिस्तत्त्वदर्शिभिः । प्रवरं प्रथमं स्वर्ग्यं… Read More
दक्षिणामूर्ति शिव मन्त्र ॥ दक्षिणामूर्ति शिव ॥ दक्षिणामूर्ति शिव को तन्त्रों का रचियता माना है । बुद्धि, विवेक व ज्ञान की अभिवृद्धि करने वाले एवं जगद्गुरु है । जिन लोगों को सद्गुरु का आश्रय नहीं मिल पा रहा है वे दक्षिणामूर्ति शिव को गुरु मानकर अपनी साधना को आगे बढ़ा सकते हैं । यदि दीक्षित मन्त्र के अलावा… Read More