भविष्यपुराण – ब्राह्म पर्व – अध्याय १५७ से १५९ भविष्यपुराण – ब्राह्म पर्व – अध्याय १५७ से १५९ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (ब्राह्मपर्व) अध्याय – १५७ से १५९ सौर-धर्म-निरूपण में सूर्यावतार का कथन शतानीक ने पूछा — ब्रह्मन् ! जिन तेजस्वी भगवान् सूर्यनारायण ने ब्रह्माजी को वर प्रदान किया, देवताओं और पृथ्वी को उत्पन्न किया, जो ब्रह्मादि देवताओं… Read More
भविष्यपुराण – ब्राह्म पर्व – अध्याय १५२ से १५६ भविष्यपुराण – ब्राह्म पर्व – अध्याय १५२ से १५६ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (ब्राह्मपर्व) अध्याय – १५२ से १५६ ब्रह्मादि देवताओंद्वारा भगवान् सूर्यकी स्तुति एवं वर-प्राप्ति सुमन्तु मुनि बोले — राजन् ! भगवान् सूर्य की भक्ति, पूजा और उनके लिये दान करना तथा हवन करना सबके वश की बात… Read More
भविष्यपुराण – ब्राह्म पर्व – अध्याय १५१ भविष्यपुराण – ब्राह्म पर्व – अध्याय १५१ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (ब्राह्मपर्व) अध्याय – १५१ सौरधर्म का वर्णन राजा शतानीकने पूछा — मुने ! भगवान् सूर्य का माहात्म्य कीर्तिवर्धक और सभी पापों का नाशक है । मैंने भगवान् सूर्यनारायण के समान लोक में किसी अन्य देवता को नहीं देखा… Read More
भविष्यपुराण – ब्राह्म पर्व – अध्याय १५० भविष्यपुराण – ब्राह्म पर्व – अध्याय १५० ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (ब्राह्मपर्व) अध्याय – १५० भगवान् आदित्य की सप्तावरण-पूजन-विधि भगवान् श्रीकृष्ण बोले — वत्स ! अब मैं दिवाकर भगवान् सूर्यनारायण को पूजा-विधि बताता हूँ । एक वेदी पर अष्टदल-कमल-युक्त मण्डल बनाकर उसमें कालचक्र की कल्पना करनी चाहिये । उसे… Read More
भविष्यपुराण – ब्राह्म पर्व – अध्याय १४९ भविष्यपुराण – ब्राह्म पर्व – अध्याय १४९ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (ब्राह्मपर्व) अध्याय – १४९ सूर्यचक्रका निर्माण और सूर्य-दीक्षाकी विधि साम्बने पूछा — भगवन् ! भगवान् सूर्य के चक्र का और उसमें स्थित पद्म का कितने विस्तार में किस प्रकार निर्माण करना चाहिये तथा नेमि, अर और नाभि का… Read More
भविष्यपुराण – ब्राह्म पर्व – अध्याय १४८ भविष्यपुराण – ब्राह्म पर्व – अध्याय १४८ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (ब्राह्मपर्व) अध्याय – १४८ भगवान् सूर्यके कालात्मक चक्रका वर्णन सुमन्तु मुनि बोले — राजन् ! एक बार महातेजस्वी साम्ब ने अपने पिता भगवान् श्रीकृष्ण के हाथ में ज्वालामालाओं से प्रदीप्त सुदर्शनचक्र को देखकर पूछा — ‘देव ! आपके… Read More
भविष्यपुराण – ब्राह्म पर्व – अध्याय १४६ से १४७ भविष्यपुराण – ब्राह्म पर्व – अध्याय १४६ से १४७ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (ब्राह्मपर्व) अध्याय – १४६ से १४७ उत्तम एवं अधम भोजकों के लक्षण राजा शतानीक ने पूछा — मुने ! भगवान् सूर्य को पूजा करने वाले भोजक दिव्य, उनसे उत्पन्न एवं उन्हें अत्यन्त प्रिय हैं । इसलिये… Read More
भविष्यपुराण – ब्राह्म पर्व – अध्याय १४५ भविष्यपुराण – ब्राह्म पर्व – अध्याय १४५ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (ब्राह्मपर्व) अध्याय – १४५ भगवान् व्यास द्वारा योग-ज्ञान का वर्णन भगवान् श्रीकृष्ण ने कहा — महामुने ! कृपाकर आप भोजकों के सभी ज्ञानों की उपलब्धि का वर्णन करें । व्यासजी ने कहा — यह शरीर अस्थियों पर ही… Read More
भविष्यपुराण – ब्राह्म पर्व – अध्याय १४४ भविष्यपुराण – ब्राह्म पर्व – अध्याय १४४ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (ब्राह्मपर्व) अध्याय – १४४ सूर्यमण्डलस्थ पुरुषका वर्णन सुमन्तु मुनि बोले — राजन् ! एक बार व्यासजी शङ्ख-चक्र-गदाधारी नारायण भगवान् श्रीकृष्ण के दर्शन के लिये द्वारका आये । महातेजस्वी श्रीकृष्ण ने पाद्य, अर्घ्य, आचमन आदि से उनका पूजन कर… Read More
भविष्यपुराण – ब्राह्म पर्व – अध्याय १४३ भविष्यपुराण – ब्राह्म पर्व – अध्याय १४३ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (ब्राह्मपर्व) अध्याय – १४३ साम्बोपाख्यानमें भगवान् सूर्यको अर्घ्य प्रदान करने और धूप दिखानेकी महिमा सुमन्तु मुनि बोले — राजन् ! इस प्रकार व्यासजी के द्वारा अव्यङ्ग के विषय में जानकारी प्राप्त कर साम्ब नारदजी के पास वापस लौट… Read More