भविष्यपुराण – ब्राह्म पर्व – अध्याय १७३ से १७४ भविष्यपुराण – ब्राह्म पर्व – अध्याय १७३ से १७४ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (ब्राह्मपर्व) अध्याय – १७३ से १७४ सौर-धर्म की महिमा का वर्णन, ब्रह्माकृत सूर्य-स्तुति राजा शतानीक ने कहा — ब्राह्मणश्रेष्ठ ! आप सौरधर्म को पुनः विस्तार से वर्णन कीजिये । सुमन्तु मुनि बोले — महाबाहो ! तुम… Read More
भविष्यपुराण – ब्राह्म पर्व – अध्याय १७१ से १७२ भविष्यपुराण – ब्राह्म पर्व – अध्याय १७१ से १७२ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (ब्राह्मपर्व) अध्याय – १७१ से १७२ सौरधर्म में सदाचरण का वर्णन सुमन्तु मुनि बोले — राजन् ! अब मैं सौरधर्म से सम्बद्ध सदाचारों का संक्षेप में वर्णन करता हूँ । सूर्य-उपासक को भूखे-प्यासे, दीन-दुःखी, थके हुए,… Read More
भविष्यपुराण – ब्राह्म पर्व – अध्याय १६९ से १७० भविष्यपुराण – ब्राह्म पर्व – अध्याय १६९ से १७० ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (ब्राह्मपर्व) अध्याय – १६९ से १७० भगवान् सूर्य के निमित्त गृह एवं रथ आदि के दान का माहात्म्य सुमन्तु मुनि बोले — राजन् ! अपने वित्त के अनुसार मिट्टी, लकड़ी, पत्थर तथा पके हुए ईंटों से… Read More
भविष्यपुराण – ब्राह्म पर्व – अध्याय १६८ भविष्यपुराण – ब्राह्म पर्व – अध्याय १६८ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (ब्राह्मपर्व) अध्याय – १६८ कामप्रद स्त्री-व्रतका वर्णन सुमन्तु मुनि बोले — राजन् ! जो स्त्री कार्तिक मास के दोनों पक्षों की षष्ठी एवं सप्तमी तिथियों में क्षमा, अहिंसा आदि नियमों का पालन कर, संयतेन्द्रिय होती हुई एकभुक्त रहती… Read More
भविष्यपुराण – ब्राह्म पर्व – अध्याय १६६ से १६७ भविष्यपुराण – ब्राह्म पर्व – अध्याय १६६ से १६७ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (ब्राह्मपर्व) अध्याय – १६६ से १६७ निक्षुभार्क-सप्तमी तथा निक्षुभार्क-चतुष्टय-व्रत-माहात्म्य-वर्णन सुमन्तु मुनि बोले — राजन् ! जो स्त्री उत्तम पुत्र की आकाङ्क्षा रखती है, उसे ‘निक्षुभार्क’ नाम का व्रत करना चाहिये । यह व्रत स्त्री एवं पुरुष… Read More
भविष्यपुराण – ब्राह्म पर्व – अध्याय १६५ भविष्यपुराण – ब्राह्म पर्व – अध्याय १६५ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (ब्राह्मपर्व) अध्याय – १६५ उभयसप्तमी-व्रत का वर्णन सुमन्तु मुनिने कहा — राजन् ! अब मैं आपको धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष इस चतुर्वर्ग की प्राप्ति करानेवाले भगवान् सूर्य के उत्तम व्रत को बतलाता हूँ । पौष मास के उभयपक्ष… Read More
भविष्यपुराण – ब्राह्म पर्व – अध्याय १६४ भविष्यपुराण – ब्राह्म पर्व – अध्याय १६४ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (ब्राह्मपर्व) अध्याय – १६४ सूर्यषष्ठी-व्रत की महिमा सुमन्तु मुनि बोले — राजन् ! अब आप भगवान् सूर्य को अत्यन्त प्रिय सूर्यषष्ठी व्रत के विषयमें सुनें । सूर्यषष्ठी-व्रत करनेवाले को जितेन्द्रिय एवं क्रोधरहित होकर अयाचित-व्रत का पालन करते हुए… Read More
भविष्यपुराण – ब्राह्म पर्व – अध्याय १६३ भविष्यपुराण – ब्राह्म पर्व – अध्याय १६३ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (ब्राह्मपर्व) अध्याय – १६३ विभिन्न पुष्पों द्वारा सूर्य-पूजन का फल सुमन्तु मुनि बोले — राजन् ! अमित तेजस्वी भगवान् सूर्य को स्नान कराते समय ‘जय’ आदि माङ्गलिक शब्दों का उच्चारण करना चाहिये तथा शङ्ख, भेरी आदि के द्वारा… Read More
भविष्यपुराण – ब्राह्म पर्व – अध्याय १६१ से १६२ भविष्यपुराण – ब्राह्म पर्व – अध्याय १६१ से १६२ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (ब्राह्मपर्व) अध्याय – १६१ से १६२ सूर्योपासनाका फल शतानीक ने पूछा — मुने ! आपने भगवान् सूर्य के विषय में जो कहा, वह सत्य ही है, संसार के मूल कारण तथा परम दैवत भगवान् सूर्य ही… Read More
भविष्यपुराण – ब्राह्म पर्व – अध्याय १६० भविष्यपुराण – ब्राह्म पर्व – अध्याय १६० ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (ब्राह्मपर्व) अध्याय – १६० ब्रह्मादि देवताओं द्वारा सूर्यके विराट्-रूप का दर्शन महाराज शतानीक ने कहा — मुने ! आपने भगवान् सूर्य के अद्भुत चरित्र का वर्णन किया है, जिनका पूजन ब्रह्मा आदि देवता प्रतिदिन विधिपूर्वक करते रहते हैं… Read More