प्रभु की कृपा पाने का मन्त्र September 27, 2015 | aspundir | Leave a comment मन्त्र रामायण प्रभु की कृपा पाने का मन्त्र “मूक होई वाचाल, पंगु चढ़ई गिरिवर गहन । जासु कृपा सो दयाल, द्रवहु सकल कलिमल-दहन ।।”… Read More
माँ बगलामुखी September 27, 2015 | aspundir | Leave a comment माँ बगलामुखी हेम रुचिर पट पीत सरोवर, प्रकटित धन्य स्व-नाम । मन्त्र-मयी बगलामुखि वैष्णवि, शक्ति सबल बल-धाम ।। ऊपर गगन हकार धराधर, धरणी बीज ललाम । बिन्दु-मयी बगला पीठेश्वरि, ह्रींकारेश्वरि-धाम ।।… Read More
श्री बगला प्राकट्य September 26, 2015 | aspundir | Leave a comment श्री बगला प्राकट्य शिव के सम्मुख पार्वती, धर कर बोली माथ । बगला की उत्पत्ति की, कथा सुनाओ नाथ ! ।। ।। शिव उवाच ।। कृत-युग के पहिले भुतल पर, वात-क्षोभ-हिन्दोल उठा । ध्रुव तारा हिल गया अचानक, जड़-चेतन भू डोल उठा ।। प्रकृति पुरातन की शाखा के, नखत नीड़-सम टूट गए । सूरज-चन्दा की… Read More
श्री पीताम्बरा September 26, 2015 | aspundir | Leave a comment श्री पीताम्बरा जय जयति सुखदा, सिद्धिदा, सर्वार्थ-साधक शंकरी । स्वाहा, स्वधा, सिद्धा, शुभा, दुर्गा नमो सर्वेश्वरी ।। जय सृष्टि-स्थिति-कारिणी-संहारिणी साध्या सुखी । शरणागतोऽहं त्राहि माम् माँ ! त्राहि माम् बगलामुखी ।। १… Read More
श्री पीताम्बरा आरती 02 September 26, 2015 | aspundir | Leave a comment श्री पीताम्बरा आरती (सतत स्मरीय श्रीस्वामी जी द्वारा संस्थापित ‘श्रीपीताम्बरा-पीठ’ दतिया (म॰प्र॰) शक्ति-उपासना का आदर्श संस्थान है । वहाँ प्रति-दिन प्रातः और सायं पूर्ण विधि-विधान के साथ श्रीजगदम्बा का अर्चनादि सम्पन्न होता है । उस अवसर पर श्री-पीताम्बरा के आरार्तिक-क्रम में जो स्तुति भक्त-जनों द्वारा स-स्वर पढ़ी जाती है, वही यहाँ उद्धृत है) जय पीताम्बर-धारिणि… Read More
श्री पीताम्बरा आरती 01 September 26, 2015 | aspundir | Leave a comment श्री पीताम्बरा आरती पीताम्बरि रवि कोटि, ज्योति परा-माया, माँ ज्योति परा माया । बक-मुख ज्योति महा-मुख, बहु कर पर छाया ।। वर कर अष्टादश भुज, शत भुज शत काया । माँ शत भुज शत काया । द्वि-भुज चतुर्भुज बहु-भुज, भुज-मय जग माया ।। जय देवि, जय देवि ! मणि-मण्डप वेदी, माँ, मणिपुर मणि-वेदी ।… Read More
बगलामुखी तन्त्रम् September 26, 2015 | aspundir | Leave a comment श्री बगलामुखी तन्त्रम् बगलामुखी देवी दश महाविद्याओं में आठवीं महाविद्या का नाम से उल्लेखित है । वैदिक शब्द ‘वल्गा’ कहा है, जिसका अर्थ कृत्या सम्बन्ध है, जो बाद में अपभ्रंश होकर बगला नाम से प्रचारित हो गया । बगलामुखी शत्रु-संहारक विशेष है अतः इसके दक्षिणाम्नायी पश्चिमाम्नायी मंत्र अधिक मिलते हैं । नैऋत्य व पश्चिमाम्नायी मंत्र… Read More
भगवती स्वाहा (स्वाहा देवी) का उपाख्यान September 25, 2015 | aspundir | Leave a comment भगवती स्वाहा (स्वाहा देवी) का उपाख्यान श्रीब्रह्मवैवर्त्त-पुराण के प्रकृति-खण्ड के 40 वें अध्याय में भगवती ‘स्वाहा’ का सुन्दर उपाख्यान वर्णित है । नारदजी के पुछे जाने पर भगवान् नारायण कहते है – मुने ! सृष्टि के प्रारम्भिक समय की बात है – देवता भोजन की व्यवस्था के लिये ब्रह्मलोक की मनोहारिणी सभा में गये ।… Read More
नवार्ण-मन्त्र जप विधानम् September 25, 2015 | aspundir | Leave a comment ।। अथ नवार्ण-मन्त्र जप विधानम् ।। “मन्त्र-महोदधि” व “श्रीदुर्गाकल्पतरु” में मन्त्र का उद्धार इस प्रकार है – ‘अथ नवाक्षरं मन्त्रं वक्ष्ये चण्डी-प्रवृत्तये । वाङ्-माया मदनो दीर्घा लक्ष्मीस्तन्द्री श्रुतीन्दु-युक्। डायै सदृग्-जलं कूर्म-द्वयं झिण्टीश-संयुतं – “ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे” ।’ “मन्त्र-महार्णव” में उद्धार में प्रणव का उल्लेख नहीं है, किन्तु स्पष्ट मन्त्र को “ॐ” सहित दिया… Read More
पाताली हनुमान् September 25, 2015 | aspundir | 1 Comment पाताली हनुमान् उत्तरप्रदेश के हमीरपुर का “पाताली-हनुमान्” मन्दिर । यह अत्यन्त पवित्र स्थान माना जाता है, मान्यता है कि यहाँ हनुमान् जी स्वयं प्रकट हुए थे, वे सभी भक्तों की मनोकामनाएँ पूर्ण करते हैं । श्रद्धालुओं की रक्षा, साधकों के शत्रुओं का शमन करते हैं, विवाह में आ रही बाधाएँ दूर करते है इत्यादि मान्यताओं… Read More