श्राद्ध-कर्मःएक संक्षिप्त विधि October 1, 2015 | aspundir | Leave a comment श्राद्ध-कर्मःएक संक्षिप्त विधि श्राद्ध दिवस से पूर्व दिवस को बुद्धिमान् पुरुष श्रोत्रिय आदि से विहित ब्राह्मणों को ‘पितृ-श्राद्ध तथा ‘वैश्व-देव-श्राद्ध’ के लिए निमंत्रित करें। पितृ-श्राद्ध के लिए सामर्थ्यानुसार अयुग्म तथा वैश्व-देव-श्राद्ध के लिए युग्म ब्राह्मणों को निमंत्रित करना चाहिए। निमंत्रित तथा निमंत्रक क्रोध, स्त्रीगमन तथा परिश्रम आदि से दूर रहे। श्राद्ध-दिवस पर निम्न प्रक्रिया का… Read More
भगवती सीता की शक्ति तथा पराक्रम October 1, 2015 | aspundir | Leave a comment भगवती सीता की शक्ति तथा पराक्रम एक बार भगवान् श्रीराम जब सपरिकर सभा में विराज रहे थे, विभीषण बड़ी विकलतापूर्वक अपनी स्त्री तथा चार मन्त्रियों के साथ दौड़े आये और बार-बार उसाँस लेते हुए कहने लगे – ‘राजीवनयन राम ! मुझे बचाइये, बचाइये । कुम्भकर्ण के पुत्र मूलकासुर नामक राक्षस ने, जिसे मूल नक्षत्र में… Read More
पीताम्बरा अष्टक September 30, 2015 | aspundir | Leave a comment पीताम्बरा अष्टक ध्यावत धनेश-अमरेश हू रमेश नित्य, पूजत प्रजेश पद-कञ्ज शम्भु-रानी के । गावत गजानन षडानन अनन्त वेद, पावन दयाल मातु गुन वर-दानी के । पावत परम पुरषारथ प्रसाद जन, लावत ललकि उर ध्यान दया-धानी के । भावत ‘सरोज’ बल-वैभव अपार, अरि-नाशक समृद्ध सदा बगला भवानी के ।। १… Read More
श्रीबगला त्रैलोक्य-विजय कवचम् September 30, 2015 | aspundir | Leave a comment श्रीबगला त्रैलोक्य-विजय कवचम् ।। श्री भैरव उवाचः ।। श्रृणु देवि प्रवक्ष्यामि स्व-रहस्यं च कामदम् । श्रुत्वा गोप्यं गुप्ततमं कुरु गुप्तं सुरेश्वरि ।। १ ।। कवचं बगलामुख्याः सकलेष्टप्रदं कलौ । तत्सर्वस्वं परं गुह्यं गुप्तं च शरजन्मना ।। २ ।। त्रैलोक्य-विजयं नाम कवचेशं मनोरमम् । मन्त्र-गर्भं ब्रह्ममयं सर्व-विद्या विनायकम् ।। ३ ।। रहस्यं परमं ज्ञेयं साक्षाद्-मृतरुपकम् ।… Read More
श्रीबगला ध्यानावली September 30, 2015 | aspundir | Leave a comment श्रीबगला ध्यानावली पीत-पीत वसन प्रसार करैं देह-छवि, अंग-अंग भूषन, सु-पीत झरि लावै है । मुख-कान्ति पीत-पीत, तीनों नेत्र पीत-पीत, अंग-राग पीत-पीत शोभा सरसावै है ।। निज भीत भक्तन को, हीत देति दौरि आय, अपनी दया को, रुप प्रकट दिखावै है । बगला ! तिहार नाम जपत, स-भक्ति जौन, भुक्ति पावै मुक्ति पावै, पीता बन जावै… Read More
बगला दशक September 30, 2015 | aspundir | Leave a comment बगला दशक (प्रस्तुत ‘बगला-दशक’ स्तोत्र में पाँच मन्त्र बगला विद्या के सुख-साध्य और सु-शीघ्र फल-दायी हैं । इस मन्त्रों में एक बगला के ‘मन्दार’ मन्त्र नाम से प्रसिद्ध है । उक्त स्तोत्र में मन्त्र तो पाँच हैं, पर उनके विषय में मन्त्रोद्धार तथा फल-समेत दस पद्य होने के कारण ‘बगला-दशक’ नाम दिया है ।) सुवर्णाभरणां… Read More
बगलामुखी आम्नाय भेद क्रम दीक्षा September 30, 2015 | aspundir | Leave a comment आम्नाय भेद क्रम दीक्षा बगलामुखी आराधना क्रम-पूर्वक करने से लाभ मिलता है । क्रम भिन्न कर एकदम उच्च प्रयोगों को करने से बाधा व हानि होती है । पहले एकाक्षरी, चतुरक्षरी, अष्टाक्षरी मंत्र जप के बाद ३६ अक्षरात्मक मंत्र ग्रहण करना चाहिये । साथ में गणेश, वटुक, मृत्युंजय, दक्षिणकालिका, सौभाग्य-विद्या, हृदय, शताक्षर, बगलापञ्चास्त्र, कुल्लुका, ब्रह्मास्त्र… Read More
श्रीरुद्र गीता September 29, 2015 | aspundir | Leave a comment श्रीरुद्र गीता ।। चौपाई ।। सुनु मुनि यह तन – मन्दिर माहीं । दुइ विधी चेतन-रुप सदा ही ।। निर्विकल्प आतम यक रुपा । सदा एक – रस शान्त अनूपा ।। यक चैतन्योन्मुख वपु अहई । सो वह मिला दृश्य सन रहई ।। वास्तव मँह न भयो कछु कैसे । स्वप्न -सृष्टि पुनि जाग्रत जैसे… Read More
रक्षा-कारी मन्त्र September 29, 2015 | aspundir | Leave a comment रक्षा-कारी मन्त्र सर्प से रक्षा हेतु मन्त्रः कहीं भी अचानक सर्प देखने पर निम्न-लिखित मन्त्र का उच्चारण करने से सर्प से रक्षा होती है। यदि पूरा श्लोक याद न हो, तो केवल “आस्तिक”- नाम उच्चारण करे। यदि घर में अचानक साँप निकलते हों, तो घर की दीवाल पर भी घी और सिन्दूर से यह श्लोक… Read More
प्रार्थना- तेरी पोर पै परयो रहूँ September 29, 2015 | aspundir | Leave a comment प्रार्थना- तेरी पोर पै परयो रहूँ मेरी चित्त-वृत्ति निज चर्नन में राखो नित, दीजिए सु-भक्ति पाप-कर्म तैं डरयो रहूँ । होय कैं कृपाल मोह-जाल तैं निबेरो देवि ! पाय कैं विवेक-ज्ञान ध्यान से भरयो रहूँ ।।… Read More