उपासना का फल महर्षि अत्रि का आश्रम उनकी तपस्या का पवित्र प्रतीक थी । चारों ओर अनुपम शान्ति और दिव्य आनन्द की वृष्टि निरन्तर होती रहती थी । यज्ञ की धूम-शिखाओं और वेद-मन्त्रों के उच्चारण से आश्रम के कण-कण में रमणीयता का निवास था । महर्षि आनन्द-मग्न रहकर भी सदा उदास दीख पड़ते थे ।… Read More


सन्तान-प्राप्ति के लिए अचूक प्रयोग-वंशाख्य कवच अरुण उवाच-भगवन्, देव-देवेश! कृपया त्वं जगत्-प्रभो! वंशाख्य-कवचं ब्रूहि, मह्यं शिष्याम तेऽनघ! यस्य प्रभावाद् देवेश! वंशच्छेदो न जायते। श्रीसूर्य उवाच- श्रृणु वत्स! प्रवक्ष्यामि, वंशाख्य-कवचं शुभं। सन्तान-वृद्धिर्यात् पाठात्, गर्भ-रक्षा सदा नृणां।। वन्ध्याऽपि लभते पुत्रं, काक-वन्ध्या सुतैर्युता। मृत-गर्भा स-वत्सा स्यात्, स्रवद्-गर्भा स्थिर-प्रजा।। अपुष्पा पुष्पिणी यस्य, धारणं च सुख-प्रसुः। कन्या प्रजा-पुत्रिणी स्यात्, येन… Read More


त्यागी कौन ? बहुत बड़े धनी और विद्वान् जमींदार की एक बार किसी महात्मा से भेंट हो गयी । महात्मा बड़े त्यागी थे । जमींदार ने उन्हें एक लँगोटी का कपड़ा देना चाहा, परन्तु महात्मा आवश्यकता न होने से स्वीकार नहीं किया । कुछ समय तक साधु-संग करने पर जमींदार के मन में भी वैराग्य… Read More


श्री वीर भैरों शाबर मन्त्र ‘स्व-रक्षा’ और ‘शत्रु-त्रासन हेतु श्री वीर भैरों मन्त्र “हमें जो सतावै, सुख न पावै सातों जन्म । इतनी अरज सुन लीजै, वीर भैरों ! आज तुम ।। जितने होंय सत्रु मेरे, और जो सताय मुझे ।… Read More


ग्रह-बाधा, ज्वर-नाशक विघ्नेश-मन्त्र “ॐ नमो गणपतये महा-वीर ! दश-भुज ! मदन-काल-विनाशन ! मृत्युं हन-हन, धम-धम, मथ-मथ, कालं संहर-संहर, सर्व-ग्रहांश्चूर्णय-चूर्णय, नागान् मोटय-मोटय, रुद्र-रुप त्रिभुवनेश्वर सर्वतोमुख ! हुं फट्-स्वाहा ।।”… Read More


श्रीसंग्राम-विजया विद्या विनियोगः- ॐ अस्य श्रीसंग्राम-विजया-विद्यायाः श्रीईश्वर ऋषिः । उष्णिक् छन्दः । श्रीचामुण्डा देवता, सर्व-कार्येषु जयार्थे, शत्रु-नाशार्थे वा जपे विनियोगः । ऋष्यादि-न्यासः- श्रीईश्वर ऋषये नमः शिरसि । उष्णिक् छन्दसे नमः मुखे । श्रीचामुण्डा देवतायै नमः हृदि, सर्व-कार्येषु जयार्थे, शत्रु-नाशार्थे वा जपे विनियोगाय नमः सर्वांगे ।… Read More


सर्प-भय-निवारण के प्रयोग यदि किसी को अपने आस-पास सर्पों का भय हो, तो इस प्रयोगों में से किसी एक अथवा सभी का उपयोग कर उक्त भय से मुक्त हो सकते हैं । १॰ निम्न मन्त्र का पाठ करें –… Read More


सिद्ध लक्ष्मी-प्रार्थना सिद्धि के लिए दो बातें अत्यन्त आवश्यक है – श्रद्धा और विश्वास । श्रद्धा और विश्वास से ‘मन्त्र’ साधना अवश्य सफल होती है । भगवती कमला की शास्त्रीय प्रार्थना – ‘श्री श्रीविद्यार्णव तन्त्र’ में द्वा-विंशः श्वास में ‘लक्ष्मी-हृदय’ के प्रसङ्ग में बतलाई हुई एक सिद्ध-क्रिया यहाँ आपके सम्मुख प्रस्तुत है । इससे सरल… Read More


सिद्ध सारस्वत स्तोत्र ।। श्रीसरस्वत्युवाच ।। वर्तते निर्मलं ज्ञानं, कुमति-ध्वंस-कारकं । स्तोत्रेणानेन यो भक्तया, मां स्तुवति सदा नरः ।। त्रि-सन्ध्यं प्रयतो भूत्वा, यः स्तुतिं पठते तथा । तस्य कण्ठे सदा वासं, करिष्यासि न संशयः ।। सिद्ध-सारस्वतं नाम, स्तोत्रं वक्ष्येऽहमुत्तमम् ।। जो व्यक्ति सदैव इस कुमति (दुर्बुद्धि) नाशक स्तोत्र से मेरी स्तुति करता है, उसे निर्मल… Read More


भगवान् श्रीकृष्ण की साधना मन्त्रः- ॥ श्रीं ह्रीं क्लीं कृष्णाय स्वाहा ॥ (आठ अक्षर) भगवान् श्रीकृष्ण के उक्त “अष्टाक्षर-मन्त्र” की साधना से भक्तों की सभी कामनाएँ पूरी होती है । इस मन्त्र की साधना विधि इस प्रकार है – विनियोगः- ॐ अस्य श्रीकृष्ण-अष्टाक्षर-मन्त्रस्य श्री नारद ऋषिः, अनुष्टुप् छन्दः, श्रीकृष्णः देवता, मम सकल-कामना-सिद्धयर्थे जपे विनियोगः ।… Read More