श्रीमद्भागवतमहापुराण – चतुर्थ स्कन्ध – अध्याय २५ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय पचीसवाँ अध्याय पुरञ्जनोपाख्यान का प्रारम्भ श्रीमैत्रेयजी कहते हैं — विदुरजी ! इस प्रकार भगवान् शङ्कर ने प्रचेताओं को उपदेश दिया । फिर प्रचेताओं ने शङ्करजी की बड़े भक्तिभाव से पूजा की । इसके पश्चात् वे उन राजकुमारों के… Read More


श्रीमद्भागवतमहापुराण – चतुर्थ स्कन्ध – अध्याय २४ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय चौबीसवाँ अध्याय पृथु की वंशपरम्परा और प्रचेताओं को भगवान् रुद्र का उपदेश श्रीमैत्रेयजी कहते हैं — विदुजी ! महाराज पृथु के बाद उनके पुत्र परम यशस्वी विजिताश्व राजा हुए । उनका अपने छोटे भाइयों पर बड़ा स्नेह था,… Read More


श्रीमद्भागवतमहापुराण – चतुर्थ स्कन्ध – अध्याय २३ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय तेईसवाँ अध्याय राजा पृथु की तपस्या और परलोकगमन श्रीमैत्रेयजी कहते हैं — इस प्रकार महामनस्वी प्रजापति पृथु ने स्वयमेव अन्नादि तथा पुर-ग्रामादि सर्ग की व्यवस्था करके स्थावर-जङ्गम सभी की आजीविका का सुभीता कर दिया तथा साधुजनोचित धर्मों का… Read More


श्रीमद्भागवतमहापुराण – चतुर्थ स्कन्ध – अध्याय २२ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय बाईसवाँ अध्याय महाराज पृथु को सनकादि का उपदेश श्रीमैत्रेयजी कहते हैं — जिस समय प्रजाजन परमपराक्रमी पृथ्वीपाल पृथु की इस प्रकार प्रार्थना कर रहे थे, उसी समय वहाँ सूर्य के समान तेजस्वी चार मुनीश्वर आये ॥ १ ॥… Read More


श्रीमद्भागवतमहापुराण – चतुर्थ स्कन्ध – अध्याय २१ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय इक्कीसवाँ अध्याय महाराज पृथु का अपनी प्रजा को उपदेश श्रीमैत्रेयजी कहते हैं — विदुरजी ! उस समय महाराज पृथु का नगर सर्वत्र मोतियों की लड़ियों, फूलों की मालाओं, रंग-बिरंगे वस्त्रों, सोने के दरवाजों और अत्यन्त सुगन्धित धूपों से… Read More


श्रीमद्भागवतमहापुराण – चतुर्थ स्कन्ध – अध्याय २० ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय बीसवाँ अध्याय महाराज पृथु की यज्ञशाला में श्रीविष्णु भगवान् का प्रादुर्भाव श्रीमैत्रेयजी कहते हैं —विदुरजी ! महाराज पृथु के निन्यानवे यज्ञों से यज्ञभोक्ता यज्ञेश्वर भगवान् विष्णु को भी बड़ा सन्तोष हुआ । उन्होने इन्द्र के सहित वहाँ उपस्थित… Read More


श्रीमद्भागवतमहापुराण – चतुर्थ स्कन्ध – अध्याय १९ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय उन्नीसवाँ अध्याय महाराज पृथु के सौ अश्वमेध यज्ञ श्रीमैत्रेयजी कहते हैं — विदुरजी ! महाराज मनु के ब्रह्मावर्त क्षेत्र में, जहाँ सरस्वती नदी पूर्वमुखी होकर बहती हैं, राजा पृथु ने सौ अश्वमेध-यज्ञों की दीक्षा ली ॥ १ ॥… Read More


श्रीमद्भागवतमहापुराण – चतुर्थ स्कन्ध – अध्याय १८ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय अठारहवाँ अध्याय पृथ्वी-दोहन श्रीमैत्रेयजी कहते हैं — विदुरजी ! इस समय महाराज पृथु के होठ क्रोध से काँप रहे थे । उनकी इस प्रकार स्तुति कर पृथ्वी ने अपने हृदय को विचारपूर्वक समाहित किया और डरते-डरते उनसे कहा… Read More


श्रीमद्भागवतमहापुराण – चतुर्थ स्कन्ध – अध्याय १७ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय सत्रहवाँ अध्याय महाराज पृथु का पृथ्वी पर कुपित होना और पृथ्वी के द्वारा उनकी स्तुति करना श्रीमैत्रेयजी कहते हैं — इस प्रकार जब वन्दीजन ने महाराज पृथु के गुण और कर्मों का बखान करके उनकी प्रशंसा की, तब… Read More


श्रीमद्भागवतमहापुराण – चतुर्थ स्कन्ध – अध्याय १६ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय सोलहवाँ अध्याय वन्दीजन द्वारा महाराज पृथुकी स्तुति श्रीमैत्रेयजी कहते हैं — महाराज पृथु ने जब इस प्रकार कहा, तब उनके वचनामृत का आस्वादन करके सूत आदि गायकलोग बड़े प्रसन्न हुए । फिर वे मुनियों की प्ररेणा से उनकी… Read More