श्रीमद्भागवतमहापुराण – दशम स्कन्ध उत्तरार्ध – अध्याय ७४ May 1, 2019 | aspundir | Leave a comment श्रीमद्भागवतमहापुराण – दशम स्कन्ध उत्तरार्ध – अध्याय ७४ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय चौहत्तरवाँ अध्याय भगवान् की अग्रपूजा और शिशुपाल का उद्धार श्रीशुकदेवजी कहते हैं — परीक्षित् ! धर्मराज युधिष्ठिर जरासन्ध का वध और सर्वशक्तिमान् भगवान् श्रीकृष्ण की अद्भुत महिमा सुनकर बहुत प्रसन्न हुए और उनसे बोले ॥ १ ॥… Read More
श्रीमद्भागवतमहापुराण – दशम स्कन्ध उत्तरार्ध – अध्याय ७३ May 1, 2019 | aspundir | Leave a comment श्रीमद्भागवतमहापुराण – दशम स्कन्ध उत्तरार्ध – अध्याय ७३ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय तिहत्तरवाँ अध्याय जरासन्ध के जेल से छूटे हुए राजाओं की विदाई और भगवान् का इन्द्रप्रस्थ लौट आना श्रीशुकदेवजी कहते हैं — परीक्षित् ! जरासन्ध ने अनायास ही बीस हजार आठ सौ राजाओं को जीतकर पहाड़ों की घाटी… Read More
श्रीमद्भागवतमहापुराण – दशम स्कन्ध उत्तरार्ध – अध्याय ७२ May 1, 2019 | aspundir | Leave a comment श्रीमद्भागवतमहापुराण – दशम स्कन्ध उत्तरार्ध – अध्याय ७२ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय बहत्तरवाँ अध्याय पाण्डवों के राजसूययज्ञ का आयोजन और जरासन्ध का उद्धार श्रीशुकदेवजी कहते हैं — परीक्षित् ! एक दिन महाराज युधिष्ठिर बहुत-से मुनियों, ब्राह्मण, क्षत्रियों, वैश्यों, भीमसेन आदि भाइयों, आचार्यों, कुल के बड़े-बूढों, जाति-बन्धुओं, सम्बन्धियों एवं कुटुम्बियों… Read More
श्रीमद्भागवतमहापुराण – दशम स्कन्ध उत्तरार्ध – अध्याय ७१ May 1, 2019 | aspundir | Leave a comment श्रीमद्भागवतमहापुराण – दशम स्कन्ध उत्तरार्ध – अध्याय ७१ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय इकहत्तरवाँ अध्याय श्रीकृष्णभगवान् का इन्द्रप्रस्थ पधारना श्रीशुकदेवजी कहते हैं — परीक्षित् ! भगवान् श्रीकृष्ण के वचन सुनकर महामति उद्धवजी ने देवर्षि नारद, सभासद् और भगवान् श्रीकृष्ण के मत पर विचार किया और फिर वे कहने लगे ॥… Read More
श्रीमद्भागवतमहापुराण – दशम स्कन्ध उत्तरार्ध – अध्याय ७० April 30, 2019 | aspundir | Leave a comment श्रीमद्भागवतमहापुराण – दशम स्कन्ध उत्तरार्ध – अध्याय ७० ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय सत्तरवाँ अध्याय भगवान् श्रीकृष्ण की नित्यचर्या और उनके पास जरासन्ध के कैदी राजाओं के दूत का आना श्रीशुकदेवजी कहते हैं — परीक्षित् ! जब सबेरा होने लगता, कुक्कुट (मुरगे) बोलने लगते, तब वे श्रीकृष्ण-पत्नियाँ, जिनके कण्ठ में… Read More
श्रीमद्भागवतमहापुराण – दशम स्कन्ध उत्तरार्ध – अध्याय ६९ April 30, 2019 | aspundir | Leave a comment श्रीमद्भागवतमहापुराण – दशम स्कन्ध उत्तरार्ध – अध्याय ६९ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय उनहत्तरवाँ अध्याय देवर्षि नारदजी का भगवान् की गृहचर्या देखना श्रीशुकदेवजी कहते हैं — परीक्षित् ! जब देवर्षि नारद ने सुना कि भगवान् श्रीकृष्ण ने नरकासुर (भौमासुर) को मारकर अकेले ही हजारों राजकुमारियों के साथ विवाह कर लिया… Read More
श्रीमद्भागवतमहापुराण – दशम स्कन्ध उत्तरार्ध – अध्याय ६८ April 30, 2019 | aspundir | Leave a comment श्रीमद्भागवतमहापुराण – दशम स्कन्ध उत्तरार्ध – अध्याय ६८ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय अड़सठवाँ अध्याय कौरवों पर बलरामजी का कोप और साम्ब का विवाह श्रीशुकदेवजी कहते हैं — परीक्षित् ! जाम्बवतीनन्दन साम्ब अकेले ही बहुत बड़े-बड़े वीरों पर विजय प्राप्त करनेवाले थे । वे स्वयंवर में स्थित दुर्योधन की कन्या… Read More
श्रीमद्भागवतमहापुराण – दशम स्कन्ध उत्तरार्ध – अध्याय ६७ April 30, 2019 | aspundir | Leave a comment श्रीमद्भागवतमहापुराण – दशम स्कन्ध उत्तरार्ध – अध्याय ६७ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय सड़सठवाँ अध्याय द्विविद का उद्धार राजा परीक्षित् ने पूछा — भगवान् बलरामजी सर्वशक्तिमान् एवं सृष्टि-प्रलय की सीमा से परे, अनन्त हैं । उनका स्वरूप, गुण, लीला आदि मन, बुद्धि और वाणी के विषय नहीं हैं । उनकी… Read More
श्रीमद्भागवतमहापुराण – दशम स्कन्ध उत्तरार्ध – अध्याय ६६ April 30, 2019 | aspundir | Leave a comment श्रीमद्भागवतमहापुराण – दशम स्कन्ध उत्तरार्ध – अध्याय ६६ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय छाछठवाँ अध्याय पौण्ड्रक और काशिराज का उद्धार श्रीशुकदेवजी कहते हैं — परीक्षित् ! जब भगवान् बलरामजी नन्दबाबा के व्रज में गये हुए थे, तब पीछे से करूष देश के अज्ञानी राजा पौण्ड्रक ने भगवान् श्रीकृष्ण के पास… Read More
श्रीमद्भागवतमहापुराण – दशम स्कन्ध उत्तरार्ध – अध्याय ६५ April 29, 2019 | aspundir | Leave a comment श्रीमद्भागवतमहापुराण – दशम स्कन्ध उत्तरार्ध – अध्याय ६५ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय पैंसठवाँ अध्याय श्रीबलरामजी का व्रजगमन श्रीशुकदेवजी कहते हैं — परीक्षित् ! भगवान् बलरामजी के मन में व्रज के नन्दबाबा आदि स्वजन-सम्बन्धियों से मिलने की बड़ी इच्छा और उत्कण्ठा थी । अब वे रथ पर सवार होकर द्वारका… Read More