श्रीमद्भागवतमहापुराण – दशम स्कन्ध उत्तरार्ध – अध्याय ६४ April 29, 2019 | aspundir | Leave a comment श्रीमद्भागवतमहापुराण – दशम स्कन्ध उत्तरार्ध – अध्याय ६४ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय चौंसठवाँ अध्याय नृग राजा की कथा श्रीशुकदेवजी कहते हैं — प्रिय परीक्षित् ! एक दिन साम्ब, प्रद्युम्न, चारुभानु और गद आदि यदुवंशी राजकुमार घूमने के लिये उपवन में गये ॥ १ ॥ वहाँ बहुत देर तक खेल… Read More
श्रीमद्भागवतमहापुराण – दशम स्कन्ध उत्तरार्ध – अध्याय ६३ April 29, 2019 | aspundir | Leave a comment श्रीमद्भागवतमहापुराण – दशम स्कन्ध उत्तरार्ध – अध्याय ६३ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय तिरसठवाँ अध्याय भगवान् श्रीकृष्ण के साथ बाणासुर का युद्ध श्रीशुकदेवजी कहते हैं — परीक्षित् ! बरसात के चार महीने बीत गये । परन्तु अनिरुद्धजी का कहीं पता न चला । उनके घर के लोग, इस घटना से… Read More
श्रीमद्भागवतमहापुराण – दशम स्कन्ध उत्तरार्ध – अध्याय ६२ April 29, 2019 | aspundir | Leave a comment श्रीमद्भागवतमहापुराण – दशम स्कन्ध उत्तरार्ध – अध्याय ६२ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय बासठवाँ अध्याय ऊषा-अनिरुद्ध मिलन राजा परीक्षित् ने पूछा — महायोगसम्पन्न मुनीश्वर ! मैंने सुना है कि यदुवंशशिरोमणि अनिरुद्धजी ने बाणासुर की पुत्री ऊषा से विवाह किया था और इस प्रसङ्ग में भगवान् श्रीकृष्ण और शङ्करजी का बहुत… Read More
श्रीमद्भागवतमहापुराण – दशम स्कन्ध उत्तरार्ध – अध्याय ६१ April 29, 2019 | aspundir | Leave a comment श्रीमद्भागवतमहापुराण – दशम स्कन्ध उत्तरार्ध – अध्याय ६१ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय इकसठवाँ अध्याय भगवान् की सन्तति का वर्णन तथा अनिरुद्ध के विवाह में रुक्मी का मारा जाना श्रीशुकदेवजी कहते हैं — परीक्षित् ! भगवान् श्रीकृष्ण की प्रत्येक पत्नी के गर्भ से दस-दस पुत्र उत्पन्न हुए । वे रूप,… Read More
श्रीमद्भागवतमहापुराण – दशम स्कन्ध उत्तरार्ध – अध्याय ६० April 28, 2019 | aspundir | Leave a comment श्रीमद्भागवतमहापुराण – दशम स्कन्ध उत्तरार्ध – अध्याय ६० ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय साठवाँ अध्याय श्रीकृष्ण-रुक्मिणी-संवाद श्रीशुकदेवजी कहते हैं — परीक्षित् ! एक दिन समस्त जगत् के परमपिता और ज्ञानदाता भगवान् श्रीकृष्ण रुक्मिणीजी के पलँग पर आराम से बैठे हुए थे । भीष्मक-नन्दिनी श्रीरुक्मिणीजी सखियों के साथ अपने पतिदेव की… Read More
श्रीमद्भागवतमहापुराण – दशम स्कन्ध उत्तरार्ध – अध्याय ५९ April 28, 2019 | aspundir | Leave a comment श्रीमद्भागवतमहापुराण – दशम स्कन्ध उत्तरार्ध – अध्याय ५९ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय उनसठवाँ अध्याय भौमासुर का उद्धार और सोलह हजार एक सौ राजकन्याओं के साथ भगवान् का विवाह राजा परीक्षित् ने पूछा — भगवन् ! भगवान् श्रीकृष्ण ने भौमासुर को, जिसने उन स्त्रियों को बंदीगृह में डाल रक्खा था,… Read More
श्रीमद्भागवतमहापुराण – दशम स्कन्ध उत्तरार्ध – अध्याय ५८ April 28, 2019 | aspundir | Leave a comment श्रीमद्भागवतमहापुराण – दशम स्कन्ध उत्तरार्ध – अध्याय ५८ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय अट्ठावनवाँ अध्याय भगवान् श्रीकृष्ण के अन्यान्य विवाहों की कथा श्रीशुकदेवजी कहते हैं — परीक्षित् ! अब पाण्डवों का पता चल गया था कि वे लाक्षाभवन में जले नहीं हैं । एक बार भगवान् श्रीकृष्ण उनसे मिलने के… Read More
श्रीमद्भागवतमहापुराण – दशम स्कन्ध उत्तरार्ध – अध्याय ५७ April 28, 2019 | aspundir | Leave a comment श्रीमद्भागवतमहापुराण – दशम स्कन्ध उत्तरार्ध – अध्याय ५७ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय सत्तावनवाँ अध्याय स्यमन्तक-हरण, शतधन्वा का उद्धार और अकूरजी को फिर से द्वारका बुलाना श्रीशुकदेवजी कहते हैं — परीक्षित् ! यद्यपि भगवान् श्रीकृष्ण को इस बात का पता था कि लाक्षागृह की आग से पाण्डवों का बाल भी… Read More
श्रीमद्भागवतमहापुराण – दशम स्कन्ध उत्तरार्ध – अध्याय ५६ April 28, 2019 | aspundir | Leave a comment श्रीमद्भागवतमहापुराण – दशम स्कन्ध उत्तरार्ध – अध्याय ५६ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय छप्पनवाँ अध्याय स्यमन्तक-मणि की कथा, जाम्बवती और सत्यभामा के साथ श्रीकृष्ण का विवाह श्रीशुकदेवजी कहते हैं — परीक्षित् ! सत्राजित्… Read More
श्रीमद्भागवतमहापुराण – दशम स्कन्ध उत्तरार्ध – अध्याय ५५ April 27, 2019 | aspundir | Leave a comment श्रीमद्भागवतमहापुराण – दशम स्कन्ध उत्तरार्ध – अध्याय ५५ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय पचपनवाँ अध्याय प्रद्युम्न का जन्म और शम्बरासुर का वध श्रीशुकदेवजी कहते हैं — परीक्षित् ! कामदेव भगवान् वासुदेव के ही अंश हैं । वे पहले रुद्रभगवान् की क्रोधाग्नि से भस्म हो गये थे । अब फिर शरीर-प्राप्ति… Read More