श्रीमद्भागवतमहापुराण – दशम स्कन्ध उत्तरार्ध – अध्याय ८४ May 3, 2019 | aspundir | Leave a comment श्रीमद्भागवतमहापुराण – दशम स्कन्ध उत्तरार्ध – अध्याय ८४ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय चौरासीवाँ अध्याय वसुदेवजीका यज्ञोत्सव श्रीशुकदेवजी कहते हैं — परीक्षित् ! सर्वात्मा भक्तभवहारो भगवान् श्रीकृष्ण के प्रति उनकी पत्नियों का कितना प्रेम हैं — यह बात कुन्ती, गान्धारी, द्रौपदी, सुभद्रा, दूसरी राजपत्नियों और भगवान् की प्रियतमा गोपियों ने… Read More
श्रीमद्भागवतमहापुराण – दशम स्कन्ध उत्तरार्ध – अध्याय ८३ May 3, 2019 | aspundir | Leave a comment श्रीमद्भागवतमहापुराण – दशम स्कन्ध उत्तरार्ध – अध्याय ८३ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय तिरासीवाँ अध्याय भगवान् की पटरानियों के साथ द्रौपदी की बातचीत श्रीशुकदेवजी कहते हैं — परीक्षित् ! भगवान् श्रीकृष्ण ही गोपियों को शिक्षा देनेवाले हैं और वहीं उस शिक्षा के द्वारा प्राप्त होनेवाली वस्तु हैं । इसके पहले,… Read More
श्रीमद्भागवतमहापुराण – दशम स्कन्ध उत्तरार्ध – अध्याय ८२ May 3, 2019 | aspundir | Leave a comment श्रीमद्भागवतमहापुराण – दशम स्कन्ध उत्तरार्ध – अध्याय ८२ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय बयासीवाँ अध्याय भगवान् श्रीकृष्ण-बलराम से गोप-गोपियों की भेंट श्रीशुकदेवजी कहते हैं — परीक्षित् ! इसी प्रकार भगवान् श्रीकृष्ण और बलरामजी द्वारका में निवास कर रहे थे । एक बार सर्वग्रास सूर्यग्रहण लगा, जैसा कि प्रलय के समय… Read More
श्रीमद्भागवतमहापुराण – दशम स्कन्ध उत्तरार्ध – अध्याय ८१ May 3, 2019 | aspundir | Leave a comment श्रीमद्भागवतमहापुराण – दशम स्कन्ध उत्तरार्ध – अध्याय ८१ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय इक्यासीवाँ अध्याय सुदामाजी को ऐश्वर्य की प्राप्ति श्रीशुकदेवजी कहते हैं — प्रिय परीक्षित् ! भगवान् श्रीकृष्ण सबके मन की बात जानते हैं । वे ब्राह्मणों के परम भक्त, उनके क्लेशों के नाशक तथा संतों के एकमात्र आश्रय… Read More
श्रीमद्भागवतमहापुराण – दशम स्कन्ध उत्तरार्ध – अध्याय ८० May 2, 2019 | aspundir | Leave a comment श्रीमद्भागवतमहापुराण – दशम स्कन्ध उत्तरार्ध – अध्याय ८० ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय अस्सीवाँ अध्याय श्रीकृष्ण के द्वारा सुदामाजी का स्वागत राजा परीक्षित् ने पूछा — भगवन् ! प्रेम और मुक्ति के दाता परब्रह्म परमात्मा भगवान् श्रीकृष्ण की शक्ति अनन्त हैं । इसलिये उनकी माधुर्य और ऐश्वर्य से भरी लीलाएँ… Read More
श्रीमद्भागवतमहापुराण – दशम स्कन्ध उत्तरार्ध – अध्याय ७९ May 2, 2019 | aspundir | Leave a comment श्रीमद्भागवतमहापुराण – दशम स्कन्ध उत्तरार्ध – अध्याय ७९ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय उन्नासीवाँ अध्याय बल्वल का उद्वार और बलरामजी की तीर्थयात्रा श्रीशुकदेवजी कहते हैं — परीक्षित् ! पर्व का दिन आने पर बड़ा भयङ्कर अंधड़ चलने लगा । धूल की वर्षा होने लगी और चारों ओर से पीब की… Read More
श्रीमद्भागवतमहापुराण – दशम स्कन्ध उत्तरार्ध – अध्याय ७८ May 2, 2019 | aspundir | Leave a comment श्रीमद्भागवतमहापुराण – दशम स्कन्ध उत्तरार्ध – अध्याय ७८ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय अठहत्तरवाँ अध्याय दन्तवक्त्र और विदूरथ का उद्धार तथा तीर्थयात्रा में बलरामजी के हाथ से सूतजी का वध श्रीशुकदेवजी कहते हैं — परीक्षित् ! शिशुपाल, शाल्व और पौण्ड्रक के मारे जाने पर उनकी मित्रता का ऋण चुकाने के… Read More
श्रीमद्भागवतमहापुराण – दशम स्कन्ध उत्तरार्ध – अध्याय ७७ May 2, 2019 | aspundir | Leave a comment श्रीमद्भागवतमहापुराण – दशम स्कन्ध उत्तरार्ध – अध्याय ७७ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय सतहत्तरवाँ अध्याय शाल्व-उद्धार श्रीशुकदेवजी कहते हैं — परीक्षित् ! अब प्रद्युम्नजी ने हाथ-मुँह धोकर, कवच पहन धनुष धारण किया और सारथि से कहा कि ‘मुझे वीर द्युमान् के पास फिर से ले चलो’ ॥ १ ॥ उस… Read More
श्रीमद्भागवतमहापुराण – दशम स्कन्ध उत्तरार्ध – अध्याय ७६ May 2, 2019 | aspundir | Leave a comment श्रीमद्भागवतमहापुराण – दशम स्कन्ध उत्तरार्ध – अध्याय ७६ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय छिहत्तरवाँ अध्याय शाल्व के साथ यादवों का युद्ध श्रीशुकदेवजी कहते हैं — परीक्षित् ! अब मनुष्यकी-सी लीला करनेवाले भगवान् श्रीकृष्ण का एक और भी अद्भुत चरित्र सुनो । इसमें यह बताया जायेगा कि सौभ नामक विमान का… Read More
श्रीमद्भागवतमहापुराण – दशम स्कन्ध उत्तरार्ध – अध्याय ७५ May 1, 2019 | aspundir | Leave a comment श्रीमद्भागवतमहापुराण – दशम स्कन्ध उत्तरार्ध – अध्याय ७५ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय पचहत्तरवाँ अध्याय राजसूय यज्ञ की पूर्ति और दुर्योधन का अपमान राजा परीक्षित् ने पूछा — भगवन् ! अजातशत्रु धर्मराज युधिष्ठिर के राजसूय यज्ञ-महोत्सव को देखकर, जितने मनुष्य, नरपति, ऋषि, मुनि और देवता आदि आये थे, वे सब… Read More