श्रीमद्भागवतमहापुराण – एकादशः स्कन्ध – अध्याय ४ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय चौथा अध्याय भगवान् के अवतारों का वर्णन राजा निमि ने पूछा — योगीश्वरो ! भगवान् स्वतन्त्रता से अपने भक्तों की भक्ति के वश होकर अनेकों प्रकार के अवतार ग्रहण करते हैं और अनेकों लीलाएँ करते हैं । आपलोग… Read More


श्रीमद्भागवतमहापुराण – एकादशः स्कन्ध – अध्याय ३ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय तीसरा अध्याय माया, माया से पार होने के उपाय तथा ब्रह्म और कर्मयोग का निरूपण राजा निमि ने पूछा — भगवन् ! सर्वशक्तिमान् परमकारण विष्णुभगवान् की माया बड़े-बड़े मायावियों को भी मोहित कर देती हैं, उसे कोई पहचान… Read More


श्रीमद्भागवतमहापुराण – एकादशः स्कन्ध – अध्याय २ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय दूसरा अध्याय वसुदेवजी के पास श्रीनारदजी का आना और उन्हें राजा जनक तथा नौ योगीश्वरों का संवाद सुनाना श्रीशुकदेवजी कहते हैं — कुरुनन्दन ! देवर्षि नारद के मन में भगवान् श्रीकृष्ण की सन्निधि में रहने की बड़ी लालसा… Read More


श्रीमद्भागवतमहापुराण – एकादशः स्कन्ध – अध्याय १ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय पहला अध्याय यदुवंश को ऋषियों का शाप व्यासनन्दन भगवान् श्रीशुकदेवजी कहते हैं — परीक्षित् ! भगवान् श्रीकृष्ण ने बलरामजी तथा अन्य यदुवंशियों के साथ मिलकर बहुत-से दैत्यों का संहार किया तथा कौरव और पाण्डवों में भी शीघ्र मार-काट… Read More


श्रीमद्भागवतमहापुराण – दशम स्कन्ध उत्तरार्ध – अध्याय ९० ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नब्बेवाँ अध्याय भगवान् श्रीकृष्ण के लीला-विहार का वर्णन श्रीशुकदेवजी कहते हैं — परीक्षित् ! द्वारकानगरी की छटा अलौकिक थी । उसकी सड़कें मद चूते हुए मतवाले हाथियों, सुसज्जित योद्धाओं, घोड़ों और स्वर्णमय रथों की भीड़ से सदा… Read More


श्रीमद्भागवतमहापुराण – दशम स्कन्ध उत्तरार्ध – अध्याय ८९ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नवासीवाँ अध्याय भृगुजी के द्वारा त्रिदेवों की परीक्षा तथा भगवान् का मरे हुए ब्राह्मण-बालकों को वापस लाना श्रीशुकदेवजी कहते हैं — परीक्षित् ! एक बार सरस्वती नदी के पावन तट पर यज्ञ प्रारम्भ करने के लिये बड़े-बड़े… Read More


श्रीमद्भागवतमहापुराण – दशम स्कन्ध उत्तरार्ध – अध्याय ८८ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय अट्ठासीवाँ अध्याय शिवजी का सङ्कटमोचन राजा परीक्षित् ने पूछा — भगवन् ! भगवान् शङ्कर ने समस्त भोगों का परित्याग कर रक्खा है; परन्तु देखा यह जाता है कि जो देवता, असुर अथवा मनुष्य उनकी उपासना करते हैं,… Read More


श्रीमद्भागवतमहापुराण – दशम स्कन्ध उत्तरार्ध – अध्याय ८७ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय सत्तासीवाँ अध्याय वेदस्तुति राजा परीक्षित् ने पूछा — भगवन् ! ब्रह्म कार्य और कारण से सर्वथा परे है । सत्व, रज और तम — ये तीनों गुण उसमें हैं ही नहीं । मन और वाणी से सङ्केत… Read More


श्रीमद्भागवतमहापुराण – दशम स्कन्ध उत्तरार्ध – अध्याय ८६ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय छियासीवाँ अध्याय सुभद्राहरण और भगवान् का मिथिलापुरी में राजा जनक और श्रुतदेव ब्राह्मण के घर एक ही साथ जाना राजा परीक्षित् ने पूछा — भगवन् ! मेरे दादा अर्जुन ने भगवान् श्रीकृष्ण और बलरामजी की बहिन सुभद्राजी… Read More


श्रीमद्भागवतमहापुराण – दशम स्कन्ध उत्तरार्ध – अध्याय ८५ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॐ श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय पचासीवाँ अध्याय श्रीभगवान् के द्वारा वसुदेवजी को ब्रह्मज्ञान का उपदेश तथा देवकीजी के छः पुत्रों को लौटा लाना श्रीशुकदेवजी कहते हैं — परीक्षित् ! इसके बाद एक दिन भगवान् श्रीकृष्ण और बलरामजी प्रातःकालीन प्रणाम करने के लिये… Read More