॥ शिव श्रीकण्ठादि कलामातृका न्यासः ॥ कोई भी रुद्र प्रयोग हो, मृत्युंजय प्रयोग या शिव के किसी अन्य स्वरूप का यन्त्र का प्रयोग पुरश्चरणादि, होवें तो श्रीकण्ठादि कलामातृका न्यास करने से विशेष सिद्धि प्राप्त होती है । विनियोगः – अस्य श्रीकण्ठादिकलान्यासस्य दक्षिणामूर्ति ऋषिः, गायत्री छन्दः, अर्द्धनारीश्वरो देवता, हलो बीजानि, स्वराः शक्तयः, चतुर्विध पुरुषार्थ सिद्ध्यर्थे न्यासे… Read More


शिवमहापुराण – प्रथम विद्येश्वरसंहिता – अध्याय 09 श्री गणेशाय नमः श्री साम्बसदाशिवाय नमः नौवाँ अध्याय महेश्वर का ब्रह्मा और विष्णु को अपने निष्कल और सकल स्वरूप का परिचय देते हुए लिंगपूजन का महत्त्व बताना नन्दिकेश्वर बोले — वे दोनों ब्रह्मा और विष्णु भगवान् शंकर को प्रणाम करके दोनों हाथ जोड़कर उनके दायें-बायें भाग में चुपचाप… Read More


शिवमहापुराण – प्रथम विद्येश्वरसंहिता – अध्याय 08 श्री गणेशाय नमः श्री साम्बसदाशिवाय नमः आठवाँ अध्याय भगवान् शंकर द्वारा ब्रह्मा और केतकी पुष्प को शाप देना और पुनः अनुग्रह प्रदान करना नन्दिकेश्वर बोले — तदुपरान्त महादेव शिवजी ने ब्रह्मा के गर्व को मिटाने की इच्छा से अपनी भृकुटी के मध्य से भैरव नामक एक अद्भुत पुरुष… Read More


॥ रुद्र यन्त्रम् ॥ रुद्र यन्त्र के मध्य में पञ्चकोण है, उसके बाहर अष्टदल, उसके बाहर षोडशदल, उसके ऊपर चतुर्विंशतिदल, उसके ऊपर द्वात्रिंशदल तथा उसके बाहर चत्वारिंशदल (कहीं-कहीं पर ४५ दल का भी लेख है।) पश्चात् बाहर भूपूर में (द्वारयुक्त परिधि) बनाकर यन्त्र शोधन करें। यह यन्त्र शिव पूजन व मृत्युञ्जय प्रयोग दोनों में किया… Read More


॥ अथ त्वरित रुद्रमन्त्र प्रयोगः॥ (हेमाद्रिशांति रत्नेषु) इस मन्त्र का प्रयोग सभी कामनाओं की सिद्धि हेतु तथा विघ्ननाश हेतु किया जाता है । औषधोपचार में यदि दवाकाम नहीं कर रही है तो इसके प्रयोग से मार्गदर्शन होकर रोगी को लाभ प्राप्त होगा । मन्त्रोयथा – ॐ यो रुद्रो ऽग्नौ योऽप्सुय ओषधीषु यो रुद्रो विश्वाभुवनाविवेश तस्मै… Read More


॥ अथ दशाक्षररुद्र मन्त्र विधानम् ॥ रुद्रयाग व विशिष्ट साधना में विविध ऋचाओं से न्यास किये जाते है । मन्त्र – ॐ नमो भगवते रुद्राय। विनियोगः – ॐ अस्य श्री रुद्रमन्त्रस्य बोधायन ऋषिः, पंक्ति छन्दः, रुद्रो देवता ममाभिष्ट सिद्ध्यर्थे जपे विनियोगः ॥ ऋषिन्यासः- ॐ बोधायनर्षये नमः शिरसि, पंक्ति छन्दसे नमः मुखे, रुद्र देवतायै नमः हृदि,… Read More


शिवमहापुराण – प्रथम विद्येश्वरसंहिता – अध्याय 07 श्री गणेशाय नमः श्री साम्बसदाशिवाय नमः सातवाँ अध्याय भगवान् शंकर का ब्रह्मा और विष्णु के युद्ध में अग्निस्तम्भरूप में प्राकट्य, स्तम्भ के आदि और अन्त की जानकारी के लिये दोनों का प्रस्थान शिवजी बोले — हे पुत्रो ! आपकी कुशल तो है ? मेरे अनुशासन में जगत् तथा… Read More


शिवमहापुराण – प्रथम विद्येश्वरसंहिता – अध्याय 06 श्री गणेशाय नमः श्री साम्बसदाशिवाय नमः छठा अध्याय ब्रह्मा और विष्णु के भयंकर युद्ध को देखकर देवताओं का कैलास-शिखर पर गमन नन्दिकेश्वर बोले — हे योगीन्द्र ! प्राचीनकाल में किसी समय शेषशायी भगवान् विष्णु अपनी पराशक्ति लक्ष्मीजी तथा अन्य पार्षदों से घिरे हुए शयन कर रहे थे ॥… Read More


॥ अष्टाक्षरी शिवमन्त्र प्रयोगः ॥ उमापति (शारदायाम्) मन्त्र – “ह्रीं ॐ नमः शिवाय ह्रीं” । विनियोगः – ॐ अस्य श्रीशिवाष्टाक्षर मन्त्रस्य वामदेव ऋषिः, पंक्ति छन्दः, उमापतिर्देवता सर्वेष्टसिद्धये जपे विनियोगः । ऋषिन्यासः – ॐ वामदेवर्षये नमः शिरसि, पंक्ति छन्दसे नमः मुखे, उमापतिदेवतायै नमः हृदि, विनियोगाय नमः सर्वाङ्गे ॥… Read More


॥ अथ रावणकृत शिव ताण्डव स्तोत्रम् ॥ ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ जटाटवीगलज्जलप्रवाहपावितस्थले गलेऽवलम्ब्य लम्बितां भुजङ्गतुङ्गमालिकाम् । डमड्डमड्डमड्डमन्निनादवड्डमर्वयं चकार चण्डताण्डवं तनोतु नः शिवः शिवम् ॥ १ ॥ जटाकटाहसम्भ्रमभ्रमन्निलिम्पनिर्झरी- विलोलवीचिवल्लरीविराजमानमूर्द्धनि । धगद्धगद्धगज्ज्वलल्ललाटपट्टपावके किशोरचन्द्रशेखरे रतिः प्रतिक्षणं मम ॥ २ ॥… Read More