शिवमहापुराण – प्रथम विद्येश्वरसंहिता – अध्याय 17 July 24, 2019 | aspundir | Leave a comment शिवमहापुराण – प्रथम विद्येश्वरसंहिता – अध्याय 17 श्री गणेशाय नमः श्री साम्बसदाशिवाय नमः सत्रहवाँ अध्याय षड्लिंगस्वरूप प्रणव का माहात्म्य, उसके सूक्ष्म रूप ( ॐकार) और स्थूल रूप (पंचाक्षर मन्त्र) का विवेचन, उसके जप की विधि एवं महिमा, कार्यब्रह्म के लोकों से लेकर कारणरुद्र के लोकों तक का विवेचन करके कालातीत, पंचावरण विशिष्ट शिवलोक के अनिर्वचनीय… Read More
शिवमहापुराण – प्रथम विद्येश्वरसंहिता – अध्याय 16 July 24, 2019 | aspundir | Leave a comment शिवमहापुराण – प्रथम विद्येश्वरसंहिता – अध्याय 16 श्री गणेशाय नमः श्री साम्बसदाशिवाय नमः सोलहवाँ अध्याय मृत्तिका आदि से निर्मित देवप्रतिमाओं के पूजन की विधि, उनके लिये नैवेद्य का विचार, पूजन के विभिन्न उपचारों का फल, विशेष मास, वार, तिथि एवं नक्षत्रों के योग में पूजन का विशेष फल तथा लिंग के वैज्ञानिक स्वरूप का विवेचन… Read More
श्रीशिवसहस्रनामस्तोत्रम् – महाभारतान्तर्गतम् July 24, 2019 | aspundir | Leave a comment ॥ श्रीशिवसहस्रनामस्तोत्रम् – महाभारतान्तर्गतम् ॥ ॥ वासुदेव उवाच ॥ ततः स प्रयतो भूत्वा मम तात युधिष्ठिर । प्राञ्जलिः प्राह विप्रर्षिर्नामसङ्ग्रहमादितः ॥ १ ॥ ॥ उपमन्युरुवाच ॥ ब्रह्मप्रोक्तैर्ऋषिप्रोक्तैर्वेदवेदाङ्गसम्भवैः । सर्वलोकेषु विख्यातं स्तुत्यं स्तोष्यामि नामभिः ॥ २ ॥ महद्भिर्विहितैः सत्यैः सिद्धैः सर्वार्थसाधकैः । ऋषिणा तण्डिना भक्त्या कृतैर्वेदकृतात्मना ॥ ३ ॥ यथोक्तैः साधुभिः ख्यातैर्मुनिभिस्तत्त्वदर्शिभिः । प्रवरं प्रथमं स्वर्ग्यं… Read More
शिवमहापुराण – प्रथम विद्येश्वरसंहिता – अध्याय 15 July 23, 2019 | aspundir | Leave a comment शिवमहापुराण – प्रथम विद्येश्वरसंहिता – अध्याय 15 श्री गणेशाय नमः श्री साम्बसदाशिवाय नमः पन्द्रहवाँ अध्याय देश, काल, पात्र और दान आदि का विचार ऋषिगण बोले — समस्त पदार्थों के ज्ञाताओं में श्रेष्ठ हे सूतजी ! अब आप क्रमशः देश, काल आदि का वर्णन करें ॥ १/२ ॥ सूतजी बोले — हे महर्षियो ! देवयज्ञ आदि… Read More
शिवमहापुराण – प्रथम विद्येश्वरसंहिता – अध्याय 14 July 23, 2019 | aspundir | Leave a comment शिवमहापुराण – प्रथम विद्येश्वरसंहिता – अध्याय 14 श्री गणेशाय नमः श्री साम्बसदाशिवाय नमः चौदहवाँ अध्याय अग्नियज्ञ, देवयज्ञ और ब्रह्मयज्ञ आदि का वर्णन, भगवान् शिव के द्वारा सातों वारों का निर्माण तथा उनमें देवाराधन से विभिन्न प्रकार के फलों की प्राप्ति का कथन ऋषिगण बोले — हे प्रभो ! अग्नियज्ञ, देवयज्ञ, ब्रह्मयज्ञ, गुरुपूजा तथा ब्रह्मतृप्ति का… Read More
शिवमहापुराण – प्रथम विद्येश्वरसंहिता – अध्याय 13 July 23, 2019 | aspundir | Leave a comment शिवमहापुराण – प्रथम विद्येश्वरसंहिता – अध्याय 13 श्री गणेशाय नमः श्री साम्बसदाशिवाय नमः तेरहवाँ अध्याय सदाचार, शौचाचार, स्नान, भस्मधारण, सन्ध्यावन्दन, प्रणव-जप, गायत्री-जप, दान, न्यायतः धनोपार्जन तथा अग्निहोत्र आदि की विधि एवं उनकी महिमा का वर्णन ऋषिगण बोले — [हे सूतजी !] अब आप शीघ्र ही हमें वह सदाचार सुनाइये, जिससे विद्वान् पुरुष पुण्यलोकों पर विजय… Read More
शिवमहापुराण – प्रथम विद्येश्वरसंहिता – अध्याय 12 July 23, 2019 | aspundir | Leave a comment शिवमहापुराण – प्रथम विद्येश्वरसंहिता – अध्याय 12श्री गणेशाय नमःश्री साम्बसदाशिवाय नमःबारहवाँ अध्याय मोक्षदायक पुण्यक्षेत्रों का वर्णन, कालविशेष में विभिन्न नदियों के जल में स्नान के उत्तम फल का निर्देश तथा तीर्थों में पाप से बचे रहने की चेतावनी सूतजी बोले — हे बुद्धिमान् महर्षियो ! मोक्षदायक शिवक्षेत्रों का वर्णन सुनिये । तत्पश्चात् मैं लोकरक्षा के… Read More
शिवमहापुराण – प्रथम विद्येश्वरसंहिता – अध्याय 11 July 23, 2019 | aspundir | Leave a comment शिवमहापुराण – प्रथम विद्येश्वरसंहिता – अध्याय 11 श्री गणेशाय नमः श्री साम्बसदाशिवाय नमः ग्यारहवाँ अध्याय शिवलिंग की स्थापना, उसके लक्षण और पूजन की विधि का वर्णन तथा शिवपद की प्राप्ति करानेवाले सत्कर्मों का विवेचन ऋषिगण बोले — [हे सूतजी !] शिवलिंग की स्थापना कैसे करनी चाहिये, उसका लक्षण क्या है तथा उसकी पूजा कैसे करनी… Read More
शिवमहापुराण – प्रथम विद्येश्वरसंहिता – अध्याय 10 July 22, 2019 | aspundir | Leave a comment शिवमहापुराण – प्रथम विद्येश्वरसंहिता – अध्याय 10 श्री गणेशाय नमः श्री साम्बसदाशिवाय नमः दसवाँ अध्याय सृष्टि, स्थिति आदि पाँच कृत्यों का प्रतिपादन, प्रणव एवं पंचाक्षर-मन्त्र की महत्ता, ब्रह्मा विष्णु द्वारा भगवान् शिव की स्तुति तथा उनका अन्तर्धान होना ब्रह्मा और विष्णु बोले — हे प्रभो ! हम दोनों को सृष्टि आदि पाँच कृत्यों का लक्षण… Read More
दक्षिणामूर्ति शिव मन्त्र July 22, 2019 | aspundir | Leave a comment ॥ दक्षिणामूर्ति शिव ॥ दक्षिणामूर्ति शिव को तन्त्रों का रचियता माना है । बुद्धि, विवेक व ज्ञान की अभिवृद्धि करने वाले एवं जगद्गुरु है । जिन लोगों को सद्गुरु का आश्रय नहीं मिल पा रहा है वे दक्षिणामूर्ति शिव को गुरु मानकर अपनी साधना को आगे बढ़ा सकते हैं । यदि दीक्षित मन्त्र के अलावा… Read More