गोरक्ष संकट मोचन || गोरक्ष संकट मोचन || बाल योगी भये रूप लिये तब, आदि नाथ लियो अवतारो । ताहि समै सुख भयो सिद्धो का, तब शिव गोरक्ष नाथ उचारो || भेष भगवान ने की विनती, तब अनुपान शिला पे ज्ञान विचारो। को नहि जानत है जग में, शिव गोरक्षनाथ है नाम तुम्हारो ॥१ ॥ सतयुग में भये… Read More
श्री गोरक्षनाथ स्तवन श्री गोरक्षनाथ स्तवन कैलाशाचल चारु श्रंग रचिता वेदी यदी यासनं, शान्तं शंख शशांक कुन्दकुमुस स्फितश्रियालिंगितम् । बालार्करुणतीर्णकोण किरण ज्योतिर्जटा मण्डितं, तज्जयोतिर्मयमैश्वर वपुरिदं गोरक्ष ! ते धीमहि ।। आत्म-खलु विश्व-मूलम् ॐ कृण्वन्तो विश्वमार्यम् । गोरक्ष-बालं गुरु-शिष्य-पालं शेष-हिमालं शशि-खण्ड-भालम् ।। कालस्य-कालं जित-जन्म-जालं वन्दे जटालं जगदाब्जनालम् । गोरक्षनाथ ! भवरुप भवाब्धि पोत, भक्तार्ति-नाशन विभो करुणैकमूर्ते । त्वपाद–पद्म–मकरन्द–मधुव्रतोऽहं, तापं… Read More
भक्त अल्लूदासजी (कविया) भक्त अल्लूदासजी (कविया) भक्तकवि अल्लूदास कविया-शाखा के चारण थे । इनका जन्म वि. स. १५६० में हेमराज कविया के घर मारवाड के सिणली ग्राम में हुआ था । अल्लूदास की परमात्म-भक्ति और काव्य से प्रभावित होकर आमेर-नरेश पृथ्वीराज कछवाह के पुत्र रूपसिंह ने इन्हें कुचामन के समीप जसराणा नामक ग्राम प्रदान किया था । इसके… Read More
स्वामी श्री वृन्दावनदेवाचार्य जी स्वामी श्री वृन्दावनदेवाचार्य जी (सलेमाबाद) श्री वृन्दावनदेवाचार्य जी स. 1754 से 1797 तक निम्बार्क सम्प्रदाय के अखिल भारतीय पीठ सलेमाबाद के पीठाधीश थे । वे भी सलेमाबाद के पूर्व पीठाधीशों के समान बड़े प्रतापी थे । परम रसिक तो वे थे ही । ‘मनिमंजरी’ सखी के रूप में प्रिया प्रियतम की मानसिक सेवा मे निरन्तर… Read More
देवर्षि नारद देवर्षि नारद मङ्ल-मूर्ति नारदजी श्रीभगवान् के मन के अवतार हैं । कृपा-मय प्रभु जो कुछ करना चाहते हैं, सर्वज्ञ और सर्वदर्शी वीणा-पाणि नारदजी के द्वारा वैसी ही चेष्टा होती है । श्रीमद्भागवतमें कहा गया है – तृतीयमृषिसर्गं च देवर्षित्वमुपेत्य स: । तन्त्रं सात्वतमाचष्ट नैष्कर्म्यं कर्मणां यत: ।। (१ । ३ । ८)… Read More
भगवान् वराह भगवान् वराह स्रुक्-तुण्ड सामस्वरधीरनाद, प्राग्वंशकायाखिलसत्रसन्धे । पूर्तेष्टधर्मश्रवणोऽसि देव सनातनात्मन् भगवन् प्रसीद ।। (विष्णुपुराण १ । ४ । ३४) ‘प्रभो ! स्रुक् आपका तुण्ड (थूथनी) है, सामस्वर धीर-गम्भीर शब्द है, प्राग्वंश (यजमानगृह) शरीर है तथा सम्पूर्ण सत्र (सोमयाग) शरीर की संधियाँ हैं । देव ! इष्ट (यज्ञ-यागादि) और पूर्त (कुआँ, बावली, तालाब आदि खुदवाना, बगीचा लगाना… Read More
किशनसिंह राठौड़ भक्त ठाकुर श्री किशनसिंह राठौड़ (गारबदेसर, बीकानेर) बीकानेर राज्य के संस्थापक राव बीकाजी राठौड़ के दो पुत्र हुए लूणकरणजी और घड़सी जी । बडे लूणकरणजी बीकाजी के बाद गद्दी पर बैठे । छोटे घड़सी घडसाना के जागीरदार हुए । घड़सीजी के पुत्र देदलजी को 84 गांव सहित गारबदेसर का तामीजी ठिकाना मिला । देदलजी के… Read More
नाभादासजी श्री नाभादासजी (गलता / रेवासा) भक्तमाल के रचयिता परम भागवत श्री नाभादासजी का चरित्र आदि से अन्त तक सन्त-सेवा-मय है। उन्होंने जन्म से ही आँखें बन्द रखी और तब तक नहीं खोली, जब तक उनको संतों के दर्शन नहीं हुए। आजन्म संतों की सेवा की और संतों की सीध-प्रसादी का सेवन किया। उसी का चेतन… Read More
अग्रदास जी श्री स्वामी अग्रदास जी (गलता / रैवासा, जिला-सीकर (राजस्थान)) अग्रदासजी राममोपासना में श्रृंगार-रस के आचार्य रूप में विख्यात हैं । इन्हें श्री जानकी जी की प्रिय सखी श्रीचन्द्रकलाजी का अवतार माना जाता है । रामचरितमानस में जानकी जी की एक प्रिय सखी का उल्लेख है, जिसे आगे कर जानकी जी पुष्पवाटिका में रामचन्द्र जी के… Read More
भगवान् श्रीराम के राज्यकाल में अयोध्या का वैभव भगवान् श्रीराम के राज्यकाल में अयोध्या का वैभव भगवान् श्रीराम की चरणरज से पवित्रता को प्राप्त श्रीअयोध्यापुरी, जहाँ चारों ओर प्राकृतिक सौन्दर्य अपनी चरम सीमा तक फैला पड़ा है, जिसे निहारकर ऐसा लगता है, जैसे कामदेव और रति ने इसे अपने हाथों से सजाया है । ऐसी परमपावन अयोध्यापुरी जहाँ प्रभु श्रीराम अपनी जीवन-सहचरी श्रीजानकीजी… Read More