विजया-दशमी ‘आश्विन शुक्ल पक्ष’ की दशमी को ‘विजया-दशमी’ का पर्व होता है। ‘ज्योतिर्निबन्ध ‘ में लिखा है कि ‘आश्विनस्य सिते पक्षे दशम्यां तारकोदये । स कालो विजयो ज्ञेयः सर्वकार्यार्थसिद्धये ॥’… Read More


अपराजिता – पूजा (निर्णयामृत ) – आश्विन शुक्ल दशमीको प्रस्थान करने के पहले अपराजिता का पूजन किया जाता है । उसके लिये अक्षतादि के अष्टदल पर मृत्तिका की मूर्ति स्थापन करके – ‘ॐ अपराजितायै नमः’ इससे अपराजिता का, ( उसके दक्षिण भागमें )… Read More


ब्रह्मादि देवों द्वारा भगवान् की स्तुति जय जय सुरनायक जन सुखदायक प्रनतपाल भगवंता । गो द्विज हितकारी जय असुरारी सिंधुसुता प्रिय कंता ।। पालन सुर धरनी अद्भुत करनी मरम न जानइ कोई । जो सहज कृपाला दीनदयाला करउ अनुग्रह सोई ।।… Read More


स्वर विज्ञान प्राण वायु मनुष्य के शरीर में श्वास लेने पर नासिका के माध्यम से प्रवेश करती है। नासिका में दो छिद्र होते हैं, जो बीच में एक पतली हड्डी के कारण एक दूसरे से अलग रहते हैं। मनुष्य कभी दाहिने छिद्र से और कभी बाँएँ छिद्र से श्वास लेता है। दाहिने छिद्र से श्वास… Read More


नव-पत्रिका-पूजन बिल्वनिमन्त्रण – आश्विन शुक्ल षष्ठी को प्रातः-कृत्यादि करके देवी का पूजन करे और यदि ज्येष्ठा हो तो उनकी पूजा के लिये बिल्व-वृक्ष को निमन्त्रित करें। बिल्व-सप्तमी –… Read More


शक्ति चालीसी श्रीदुर्गायै नमः नमस्कार उसको ही जिससे है पैदा खल्क़ 1 में हर शै 2 । पये 3  क़त्ले 4 सितमगारां जो पै दर 5 पै रहे दरपै 6 ।। मचा जब ग़ुल 7 कि अय दुर्गा ये हंगामेतरह् 8 हुम है । मदद की बरमेला 9 सब देवता कहने लगे जय जय ।।… Read More


श्री दुर्गा कवचम् (रुद्रयामलोक्त) पाठान्तर के साथ ।। श्रीदुर्गा-कवचेश्वरम् ।। ।। पूर्व-पीठिका – श्रीभैरव उवाच ।। अधुना देवि ! वक्ष्येऽहं कवचं मन्त्र-गर्भकम् । दुर्गायाः सार-सर्वस्वं कवचेश्वरसञ्ज्ञकम् ।।१ परमार्थ-प्रदं नित्यं महा-पातक-नाशनम् । योगि-प्रियं योगी-गम्यं देवानामपि दुर्लभम् ।।२ विना दानेन मन्त्रस्य सिद्धिर्देवि ! कलौ भवेत् । धारणादस्य देवेशि शिवस्त्रैलोक्य-नायकः ।।३… Read More


चैत्रादि मासों, प्रतिपदादि-तिथियों एवं रवि-वारादि दिनों में देवी-नैवेद्य किस तिथि में, किस वार में, कौन-सा नैवेद्य लगाना चाहिए, इसका विवरण यहाँ दिया जा रहा है, जो ‘श्रीमद्-देवी-भागवत’ के आधार पर है। श्रद्धालु-जन इनके अनुसार यथा-सम्भव पूजन कर विशेष लाभ प्राप्त कर सकते हैं।… Read More


।। मूल सप्तशती ।। ।। ॐ श्रीदेव्युवाच ।। गर्ज गर्ज क्षणं मूढ ! मधु यावत् पिबाम्यहम् । मया त्वयि हतेऽत्रैव, गर्जिष्यन्त्याशु देवताः ।।१ व्रियतां त्रिदशाः सर्वे, यदस्मत्तोऽभिवाञ्छितम् ।।२ ।।ॐ ऋषिरुवाच ।।… Read More


श्रीकृष्ण ने जब अर्जुन के साथ किया युद्ध एक बार महर्षि गालव जब प्रातः सूर्यार्घ्य प्रदान कर रहे थे, उनकी अञ्जलि में आकाशमार्ग से जाते हुए चित्रसेन की थूकी हुई पीक गिर पड़ी । मुनि को इससे बड़ा क्रोध हुआ । वे उसे शाप देना ही चाहते थे कि उन्हें अपने तपोनाश का ध्यान आ… Read More