नाथ सम्प्रदाय नाथ सम्प्रदाय नाथ शब्द अति प्राचीन है । अनेक अर्थों में इसका प्रयोग वैदिक काल से ही होता रहा है । नाथ शब्द नाथृ धातु से बना है, जिसके याचना, उपताप, ऐश्वर्य, आशीर्वाद आदि अर्थ हैं – “नाथृ नाथृ याचञोपता-पैश्वर्याशीः इति पाणिनी” । अतः जिसमें ऐश्वर्य, आशीर्वाद, कल्याण मिलता है वह “नाथ” है । ‘नाथ’… Read More
ब्रह्म-गीता ब्रह्म-गीता ।।चौपाई।। सर्वात्मा रुप जो जाना। है सोई ब्रह्म-देव कर ध्याना।। बाहर भीतर पूरण देखै। सोइ आवाहन तासु विशेषै।। सर्वाधार जानिवो जोई। ब्रह्म-देव हित आसन सोई।। स्वच्छ जानिबो अर्ध अनूपा। जानै शुद्ध आचमन-रुपा।। निर्मल जानब सोइ अस्नाना। चिश्वात्मा वसन परिधाना।। है निर्गन्ध सुगन्ध सुहाई। निर्वासना सुमन सुख-दाई।। निर्गुण जानब धूप समीपा। स्वयं प्रकाश-मान सोइ दीपा।।… Read More
अक्ष-मालिकोपनिषद् अक्ष-मालिकोपनिषद् ‘अक्ष-माला’ के भेद, लक्षण, सूत्र एवं प्रतिष्ठा विधिः शान्ति पाठः ॐ । ‘वाक्’ मेरे मन में प्रतिष्ठित हो। ‘मन’ मेरी वाणी में प्रतिष्ठित हो। हे स्वयं-प्रकाश ‘आत्मा’ ! मेरे सम्मुख तुम प्रकट हो। हे ‘वाक्’ और ‘मन’ तुम दोनों ही वेद-ज्ञान के लिए मेरे आधार बनो। तुम मेरे वेदाभ्यास का नाश न करो। मैं… Read More
भगवान् नृसिंह को नमस्कार भगवान् नृसिंह को नमस्कार तप्तस्वर्णसवर्णघूर्णदतिरूक्षाक्षं सटाकेसर- प्रोत्कम्पप्रनिकुम्बिताम्बरमहो जीयात्तवेदं वपुः | व्यात्तव्याप्तमहादरीसखमुखं खड्गोग्रवल्गन्महा- जिह्वानिर्गमदृश्यमानसुमहादंष्ट्रायुगोड्डामरम् || उत्सर्पद्वलिभङ्गभीषणहनुं ह्वस्वस्थवीयस्तर- ग्रीवं पीवरदोश्शतोद्गतनखक्रूरांशुदूरोल्बणम् | व्योमोल्लङ्घिघनाघनोपमघनप्रध्वाननिर्द्धावित- स्पर्द्धालुप्रकरं नमामि भवतस्तन्नारसिंहं वपुः ||… Read More
उड़िया विलंकारामायण उड़िया विलंकारामायण उड़िया भाषा में एक ऐसी रामायण लिखी गई, जिसकी विषयवस्तु वाल्मीकि रामायण, अध्यात्म रामायण एवं रामचरितमानस से सर्वथा भिन्न है । इस ग्रन्थ का नाम है विलंकारामायण । इसके रचयिता हैं उड़िया के आदिकवि शारलादास । ऐसा माना जाता है कि उन्होंने इसकी रचना जगन्नाथपुरी के राजा गजपति गौड़ेश्व कपिलेन्द्रदेव के शासनकाल (1452-1479… Read More
तरिगोंडा वेंगमाम्बा तरिगोंडा वेंगमाम्बा भक्त जब कवि बनता है या कवि में जब भक्ति का उदय होता है, तब काव्य का सृजन ही नहीं होता, बल्कि काव्य के माध्यम से भक्ति का भी विकास होता है । भक्त-कवियों की कृतियाँ एवं उनके व्यक्तित्व ही इसके साक्ष्य हैं । आन्ध्र की मीरा समझी जाने वाली तरिगोंडा वेंगमाम्बा इसी… Read More
कृत्तिवास रामायण की रामकथा कृत्तिवास रामायण की रामकथा तुलसीदास जी के आविर्भाव से लगभग एक सौ वर्ष पूर्व बंगदेश (बंगाल) में कृत्तिवास नामक महाकवि का आविर्भाव माना जाता है । उनका जन्म 1433 ई॰ का माना जाता है । श्रीराम ही उनके उपास्यदेव थे । उन्होंने ‘कृत्तिवास रामायण’ की रचना की थी । इसमें सात काण्ड हैं । उन्होंने… Read More
दश महा-विद्याओं की उत्पत्ति दश महा-विद्याओं की उत्पत्ति दक्ष प्रजापति ने अपने द्वारा आयोजित यज्ञ में भगवान् शिव को निमन्त्रित नहीं करने पर जब भगवती ने अपने पिता से कारण पुछने के लिये पितृ-गृह जाने के लिए भगवान् शिव से अनुमति लेनी चाही, तो महादेव ने अनुमति नहीं दी । यह सुनकर क्रोधावेश में सती के अंग कम्पित होने… Read More
वर्ष-गाँठ (जन्म-दिन) कैसे मनाएँ ? वर्ष-गाँठ (जन्म-दिन) कैसे मनाएँ ? (१) आत्म-शोधनः- प्रातःकाल स्नान आदि करके नवीन वस्त्र धारण करे। पूजा-स्थान में अपने सम्मुख पहले से स्थापित ‘पञ्च-पात्र’ के जल में, निम्न मन्त्र से ‘अंकुश-मुद्रा’ द्वारा ‘सूर्य-मण्डल’ से तीर्थों का आवाहन करे- ॐ गंगे च यमुने चैव, गोदावरी सरस्वति ! नर्मदे सिन्धु कावेरि ! जलेऽस्मिन् सन्निधिं कुरु।। फिर ‘पञ्च-पात्र’ से… Read More
कालीदास और घटकर्पर कालीदास और घटकर्पर महाराज विक्रमादित्य के नव-रत्नों के नाम इस प्रकार है – धन्वन्तरि, क्षपणक, अमरसिंह, शंकु, वेताल-भट्ट, घटकर्पर, कालिदास, वाराह-मिहिर तथा रुचि । घटकर्पर को विद्वान् बनाने तथा दरबार में स्थान दिलाने में कालिदास का भी हाथ था । इसके विषय में ‘बंगाल एशियाटिक सोसायटी’ के प्रमुख सदस्य तथा अंग्रेज विद्वान् “हेवरलिन” ने एक… Read More