ऐसे हुए श्रीराम अजेय ऐसे हुए श्रीराम अजेय भगवन् श्रीराम अपने युग के अजेय योद्धा थे । देव, दानव, यक्ष, गन्धर्व, नाग, किन्नर, राक्षस आदि में भी उनके समान योद्धा न था । तीनों लोकों को जीतने वाले रावण पर विजय पाना कोई आसान काम नहीं था । तत्कालीन सभी शक्तियाँ व्यक्तिगत एवं सामूहिक रुप से रावण से परास्त… Read More
आप लोगों का मंगल करें आप लोगों का मंगल करें श्रीमत्पङ्कजविष्टरो हरिहरो वायुर्महेन्द्रोऽनलश्चन्द्रो, भास्करवित्तपालवरुणाः प्रेताधिपाद्या ग्रहाः । प्रद्युम्नो नल-कूबरौ सुरगजश्चिन्तामणिः कौस्तुभः, स्वामी शक्तिधरश्च लाङ्लधरः कुर्वन्तु वो मङ्गलम् ।। सर्वैश्वर्य ब्रह्मा, विष्णु एवं शिव, वायुदेव, देवराज इन्द्र तथा अग्नि देवता, चन्द्र-देवता, भगवान् सूर्य, धनाध्यक्ष कुबेर, वरुण और संयमनी-पुरी के स्वामी यमराज, सभी ग्रह, श्रीकृष्ण के पुत्र प्रद्युम्न, नल और कूबर, ऐरावत… Read More
आप स्मार्त्त हैं या वैष्णव ? आप स्मार्त्त हैं या वैष्णव कभी-कभी पंचांगों में एकादशी और जन्माष्टमी के वर्तों में स्मार्त्तों के लिये और वैष्णवों के लिये – दो व्रत दो दिन लिखे रहते हैं। जनसाधारण नहीं समझ पाता कि वह व्रत किस दिन करे -पहले दिन या दूसरे दिन । ध्यान रहे – सम्पूर्ण संसार में फैले हिन्दू मात्र स्मार्त्त… Read More
मातृका न्यास मातृका न्यास इस न्यास के नाम से ही स्पष्ट है कि इसमें मातृकाओं अर्थात् वर्णों (अक्षरों) की स्थापना शरीर के अंगों में विधि-पूर्वक की जाती है । ‘अ’ से लेकर ‘क्ष’ तक की वर्ण-माला का ही सांकेतिक नाम ‘मातृका’ है । वर्ण या अक्षर ‘शब्द-ब्रह्म’ या ‘वाग्-शक्ति’ के स्वरुप हैं । इनका सूक्ष्म रुप ‘विमर्श-शक्ति’… Read More
धनाधीश कुबेर धनाधीश कुबेर महिर्ष पुलस्त्य के पुत्र महामुनि विश्रवा ने भरद्वाज की कन्या इलविला का पाणिग्रहण किया। उसी से कुबेर जी की उत्पत्ति हुई। भगवान् ब्रह्मा ने इन्हें समस्त सम्पत्ति का स्वामी बनाया। ये तप करके उत्तर दिशा के लोक पाल हुए। कैलास के समीप इनकी अलकापुरी है। श्वेतवर्ण, तुन्दिल शरीर, अष्ट-दन्त एवं तीन चरणों वाले,… Read More
दश महाविद्या जयन्ती दश महाविद्या जयन्ती १॰ श्री भुवनेश्वरी जयन्तीः- भाद्रपद शुक्ला द्वादशी, रविवार । २॰ श्री काली जयन्तीः- भाद्रपद कृष्ण अष्टमी को अर्द्ध-रात्रि । ३॰ श्री ललिता जयन्तीः- माघ पूर्णिमा को प्रदोष समय । ४॰ श्री तारा जयन्तीः- चैत्र शुक्ल नवमी, शनिवार को मध्य रात्रि । ५॰ श्री छिन्न-मस्ता जयन्तीः- वैशाख शुक्ल चतुर्दशी को अर्द्ध-रात्रि । ६॰… Read More
ब्रह्मणस्पती सूक्त ब्रह्मणस्पती सूक्त ऋग्वेद-संहिता – प्रथम मंडल सूक्त १८ [ऋषि-मेधातिथी काण्व। देवता- १-३ ब्रह्मणस्पति, ४ इन्द्र,ब्रह्मणस्पति,सोम ५-ब्रह्मणस्पति,दक्षिणा, ६-८ सदसस्पति,९,नराशंस। छन्द -गायत्री]… Read More
प्रार्थना प्रार्थना “ॐ वाङ्मे मनसि प्रतिष्ठिता, मनो मे वाचि प्रतिष्ठितमाविरावीर्म एधि वेदस्य म आणीस्थः श्रुतं मे मा प्रहासीः। अनेनाधीतेनाहोरात्रान् संदधाम्यृतं वदिष्यामि सत्यं वदिष्यामि। तन्मामवतु। तद् वक्तारमवतु। अवतु माम्। अवतु वक्तारमवतु वक्तारम्। ॐ शान्तिः शान्तिः शान्ति।।” (ऋग्वेदीय शान्तिपाठ)… Read More
दया धर्म का मूल दया धर्म का मूल एक फ्रेंच लड़का रोलफेनस् जंगली जानवरों से, खास करके पक्षियों से बहुत प्रेम करता था । उसका सबसे अधिक प्यार था, आकाश में गाती हुई उड़ने वाली लवा (Skylark) नामक चिड़िया से । एक दिन वह रास्ते से जा रहा था, उसको लार्क का संगीत सुनाई पड़ा । उसने आस-पास देखा,… Read More
प्रदोष व्रत प्रत्येक चन्द्र मास की त्रयोदशी तिथि के दिन प्रदोष व्रत रखने का विधान है। सूर्यास्त के बाद के 2 घण्टे 24 मिनट का समय प्रदोष काल के नाम से जाना जाता है। स्थान परिवर्तन के अनुसार यह बदलता रहता है। सामान्यत: सूर्यास्त से लेकर रात्रि आरम्भ तक के मध्य की अवधि को प्रदोष काल में… Read More