मोहन मन्त्र फकीरी मोहन मन्त्र फकीरी मन्त्रः- (१) ”नबी का है यह फरमान, खुदा का रूप है इन्सान । इसकी ताकत है ईमान, जिससे चलता है जहान ।। जहान में खुदा का टोना है, आस्मान मे आफताब की शान । चाँद नूर बरसाता है, चलाता है जादू का बान ।। चल – चल बिहिश्त की हूर, फैला दे… Read More
श्रीनाथादि गुरुत्रयं मण्डल पूजन प्रयोगः ।। श्रीनाथादि गुरुत्रयं मण्डल पूजन प्रयोगः ।। श्रीनाथादिगुरुत्रयं गणपतिं पीठत्रयं भैरवं, सिद्धौघं वटुकत्रयं पदयुगं दूतीक्रमं मण्डलम् । वीरानष्टचतुकषष्टिनवकं वीरावलीपञ्चकं, श्रीमन्मालिनि मन्त्रराजसहितं वन्दे गुरोर्मण्डलम् ।। (उपर्युक्त ‘ श्रीनाथादिगुरुत्रय० ‘ गुरुमण्डल के अर्चन का रहस्यमय ‘ मन्त्र ‘ है ।)… Read More
स्त्रीगुरु स्तोत्रम् ।। स्त्रीगुरु स्तोत्रम् ।। नमस्ते देव-देवेशि ! नमस्ते हरपूजिते ! । ब्रह्मविद्यास्वरूपायै तस्यै नित्य नमो नम: ।। अज्ञानतिमिरान्धस्य ज्ञानाञ्जन-शलाकया । यया चक्षुरून्मीलितं तस्यै नित्यं नमो नम: ।। भवबंधन पाशस्य तारिणी जननी परा । ज्ञानदा मोक्षदा नित्या तस्यै नित्या नमो नम: ।।… Read More
स्त्रीगुरु कवचम् ।। स्त्रीगुरु कवचम् ।। ।। शिव उवाच ।। स्तोत्रं समाप्तं देवेशि ! कवचं श्रृणु सादरम् । यस्य स्मरण मात्रेण वागीश समतां व्रजेत् ।। स्त्रीगुरु कवचस्यास्य सदाशिव ऋषि: स्मृत; । तवाख्या देवता ख्याता चतुर्वर्गफलप्रदा ।। क्लीं बीजण चक्षुषोर्मध्ये सर्वाङ्गे मे सदाऽवतु । ऐं बीजं मे मुखं पातु ह्रीं जिह्वां परिरक्षतु ।।… Read More
श्रीगुरु स्तोत्रम् ।। श्रीगुरु स्तोत्रम् ।। ।। ॐ नम: श्रीनाथाय ।। ।। श्रीमहादेव्युवाच ।। गुरोरर्मन्त्रस्य देवस्य धर्मस्य तस्य एव वा । विशेषस्तु महादेव ! तत् वदस्व दयानिधे ।। ।। श्रीमहादेव उवाच ।। जीवात्मनं परमात्मनं दानं ध्यानं योगो ज्ञानम् । उत्कलकाशीगङ्गामरणं न गुरोरधिकं न गुरोरधिकम् ।। १ ।। प्राणं देहं गेहं राज्यं स्वर्गं भोगं योगं मुक्तिम् । भार्यामिष्टं… Read More
श्रीगुरु कवचम् ।। श्रीगुरु कवचम् ।। शास्त्रों में लिखा है कि सर्वदोषशान्ति हेतु गुरु एवं ब्राह्मणों की सेवा वन्दना करें । अत : आप अपने गुरु का स्त्रीगुरु या पुरुषगुरु हो उनके हेतु कवच एवं स्तोत्र का पाठ करें । ।। गुरुदेव ध्यानम् ।। सहस्त्रदल पङ्कजे सकलशीत रश्मिप्रभम् । वराभय कराम्बुजं विमलगंधपुष्पाम्बरम् ।। प्रसन्नवदनेक्षणं सकल – देवतारूपिणम्… Read More
शत्रु-मोहन मन्त्र शत्रु-मोहन मन्त्र – मन्त्रः- ”चन्द्र-शत्रु राहू पर, विष्णु का चले चक्र । भागे भयभीत शत्रु, देखे जब चन्द्र वक्र । दोहाई कामाक्षा देवी की, फूँक-फूँक मोहन-मन्त्र । मोह-मोह शत्रु मोह, सत्य तन्त्र-मन्त्र-यन्त्र ।। तुझे शङ्कर की आन, सत-गुरु का कहना मान । ॐ नम: कामाक्षाय अं कं बं टं तं पं वं शं हीं क्रीं… Read More
सभा-मोहन मन्त्र सभा-मोहन मन्त्र मन्त्रः- ”गङ्गा किनार की पीली – पीली माटी । चन्दन के रूप में बिके हाटी-हाटी ।। तुझे गङ्गा की कसम, तुझे कामाक्षा की दोहाई । मान ले सत-गुरु की बात, दिखा दे करामात । खींच जादू का कमान चला दे मोहन बान । मोह जन-जन के प्राण, तुझे गङ्गा की आन । ॐ… Read More
ग्राम-मोहन-मन्त्र ग्राम-मोहन-मन्त्र – मन्त्रः- ”जल – जल – जीवन – दाता जल । जल के राजा कूप, जहाँ बसे वरुण भूप ।। दोहाई कामाख्या की, मोहनी चला दे । भूप को फँसा कूप में, माया फैला दे ।। तेरी महिमा महान, रख ले सतगुरु की आन ।। ॐ नमः कामाक्षाय अं कं बं टं तं पं… Read More
अधिकारी-मोहन-मन्त्र अधिकारी-मोहन-मन्त्र मन्त्रः- “ॐ नमो प्रजापत्यै नृपति-मन मोहय सर्व सेद्धय नम. । कामाक्षात अं कं बं टं तं पं वं शं हीं क्रीं श्रीं फट् स्वाहा ।।”… Read More