नाथ-पन्थीं मन्त्रों के कुछ ज्ञातव्य ‘नाथ पन्थ’ मे गुरु का बड़ा महत्व है । ईश्वर से भी ज्यादा महत्ता ‘गुरु’ को दी जाती है । सक्षम गुरु से पहले ‘दीक्षा’ लेना और बाद मे ‘साधना’ करना उचित माना जाता है । किसी कारण वश यदि गुरु की प्राप्ति नही हो पाती और मन्त्र-साधना में रुचि… Read More


महा-काली शाबर मन्त्र मन्त्र :- “सात पूनम काल का, बारह बरस क्वाँर । एको देवी जानिए, चौदह भुवन – द्वार ।। १ द्वि – पक्षे निर्मलिए, तेरह देवन देव । अष्ट-भुजी परमेश्वरी, ग्यारह रुद्र सेव ।। २ सोलह कला सम्पूर्णी, तीन नयन भरपूर । दसों द्वारी तू ही माँ, पाँचों बाजे नूर ।। ३ नव-निधी… Read More


अर्श-रोग का निवारण मन्त्र:- ॐ काका कता कोरी कर्वा । ॐ करता से होय परसना । दशह्रस प्रकटे खूनी बादी बवासीर न होय । मन्त्र जान के न बतावे द्रादश बह्म-हत्या का पाप होय । लाख जप करे, तो उसके वश में न होय । शदद सांचा, पिण्ड काचा । वो हनुमान का मन्त्र सांचा… Read More


नैत्र – रोग का शमन मन्त्र:- ॐ नमो वन बिनाई बानरी, जहाँ हनुवन्त आंखि पीड़ा कषावरि । गिहिया थनै लाइ चरिउ जाई भस्मन्तन । गुरु की शक्ति, मेरी भक्ति । फुरो मन्त्र, ईश्वरी वाचा ।” नैत्र पर हाथ फिराते हुए उक्त मन्त्र को सात बार फूंके ।… Read More


आधा-शीशी निवारण मन्त्र मन्त्र:- बन में ब्याई अञ्जनी, कच्चे बन-फल खाय । हांक मारी हनुमन्त ने, इस पिण्ड से आधा-शीशी उतर जाय ।” उक्त मन्त्र का उच्चारण कर भस्म से झाड़े ।… Read More


शाबर मन्त्र-जाल ‘शाबर’-शब्द ‘शबर’ से बना है । ‘शबर’ का अर्थ है-किरात’ । ‘किरात’-वेष-धारी शिव जी के बनाए हुए मन्त्र ‘शाबर-मन्त्र’ कहलाते हैं । ‘किरात’ – वेष – धारी शिव जी और अर्जुन का युद्ध-प्रसन्न ‘महा- भारत’ में वर्णित है । तभी से ‘शाबर-मन्त्र’ का प्रचलन हुआ । ‘शाबर मन्त्र’ में व्याकरण-दोष नहीं माना जाता… Read More


आकस्मिक आसन्न सङ्कट से रक्षा करनेवाला मन्त्र मन्त्र :- (१) “आवत देखो, उध-सुध बैठत, पथरा सुहान । हाथ बाँधौ, मुँह बाँधौ, आठो दन्त बन्द कराऔ । अहो नारसिंह नाथ ! इस बन से उस बन चली जाई, काल दाग को दीन्हो छिपाई । जै बजरङ्ग बली की दोहाई ।”… Read More


वृश्चिक दंश का अनुभूत मन्त्र मन्त्र : ”काळी कुकडी, पाय पकडी, सौन्दडीच पान । उतर – उतर विंचवा, तेच तुझ रान ।।” विधि – ‘सूर्य-ग्रहण’ – काल में उक्त मन्त्र सिद्ध कर ले । पहले स्नान करके गीले कपड़े पहने ही पूजा-स्थान में आसनस्थ हो जाए । फिर-‘केशवाय नमः, नारायणाय नमः’ से आचमन करे ।… Read More


प्रचलित शाबर मन्त्र विषैले जन्तुओं का विष-निवारण (क) “एरई हाविल हासी बहु-सर रहीम ।।” विधि – पीतल की थाली की पेन्दी पर उक्त मन्त्र एक पंक्ति मे पूरा लिखे । इसी तरह दूसरी और तीसरी पंक्ति में भी लिखे ।… Read More