ब्रह्मवैवर्तपुराण-श्रीकृष्णजन्मखण्ड-अध्याय 117 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ श्रीराधाकृष्णाभ्यां नमः ॥ (उत्तरार्द्ध) एक सौ सत्रहवाँ अध्याय गणेश-शिव-संवाद श्रीनारायण कहते हैं — नारद! इसी समय गणेश ने शिवजी के स्थान पर जाकर उन महेश्वर को नमस्कार किया और बाण-अनिरुद्ध का युद्ध, सुभद्रा का वध, स्कन्द और अनिरुद्ध का युद्ध तथा अनिरुद्ध का प्रबल पराक्रम –… Read More


ब्रह्मवैवर्तपुराण-श्रीकृष्णजन्मखण्ड-अध्याय 116 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ श्रीराधाकृष्णाभ्यां नमः ॥ (उत्तरार्द्ध) एक सौ सोलहवाँ अध्याय बाण और अनिरुद्ध के संवाद – प्रसङ्ग में अनिरुद्ध द्वारा द्रौपदी के पाँच पति होने का वर्णन, बाणसेनापति सुभद्र का अनिरुद्ध के साथ युद्ध और अनिरुद्ध द्वारा उसका वध बाण ने कहा — अनिरुद्ध ! तुम बड़े बुद्धिमान्… Read More


ब्रह्मवैवर्तपुराण-श्रीकृष्णजन्मखण्ड-अध्याय 115 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ श्रीराधाकृष्णाभ्यां नमः ॥ (उत्तरार्द्ध) एक सौ पन्द्रहवाँ अध्याय कन्या की दुःशीलता का समाचार पाकर बाण का युद्ध के लिये उद्यत होना; शिव, पार्वती, गणेश, स्कन्द और कोटरी का उसे रोकना; परंतु बाण का स्कन्द को सेनापति बनाकर युद्ध के लिये नगर के बाहर निकलना, उषाप्रदत्त रथ… Read More


ब्रह्मवैवर्तपुराण-श्रीकृष्णजन्मखण्ड-अध्याय 114 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ श्रीराधाकृष्णाभ्यां नमः ॥ (उत्तरार्द्ध) एक सौ चौदहवाँ अध्याय अनिरुद्ध और उषा का पृथक्-पृथक् स्वप्न में दर्शन, चित्रलेखा द्वारा अनिरुद्ध का अपहरण, अन्तः पुर में अनिरुद्ध और उषा का गान्धर्व-विवाह श्रीनारायण कहते हैं — नारद! प्रद्युम्न श्रीकृष्ण के पुत्र थे, जो महान् बल-पराक्रम से सम्पन्न थे। उनके… Read More


ब्रह्मवैवर्तपुराण-श्रीकृष्णजन्मखण्ड-अध्याय 113 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ श्रीराधाकृष्णाभ्यां नमः ॥ (उत्तरार्द्ध) एक सौ तेरहवाँ अध्याय पार्वती द्वारा दुर्वासा के प्रति अकारण पत्नी-त्याग के दोष का वर्णन, दुर्वासा का पुनः लौटकर द्वारका जाना, श्रीकृष्ण का युधिष्ठिर के राजसूययज्ञ में पधारना, शिशुपाल का वध, उसके आत्मा द्वारा श्रीकृष्ण का स्तवन, श्रीकृष्ण चरित का निरूपण श्रीनारायण… Read More


ब्रह्मवैवर्तपुराण-श्रीकृष्णजन्मखण्ड-अध्याय 112 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ श्रीराधाकृष्णाभ्यां नमः ॥ (उत्तरार्द्ध) एक सौ बारहवाँ अध्याय प्रद्युम्नाख्यान-वर्णन, श्रीकृष्ण का सोलह हजार आठ रानियों के साथ विवाह और उनसे संतानोत्पत्ति का कथन, दुर्वासा का द्वारका में आगमन और वसुदेव-कन्या एकानंशा के साथ विवाह, श्रीकृष्ण के अद्भुत चरित्र को देखकर दुर्वासा का भयभीत होना, श्रीकृष्ण का… Read More


ब्रह्मवैवर्तपुराण-श्रीकृष्णजन्मखण्ड-अध्याय 111 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ श्रीराधाकृष्णाभ्यां नमः ॥ (उत्तरार्द्ध) एक सौ ग्यारहवाँ अध्याय राधिका द्वारा ‘राम’ आदि भगवन्नामों की व्युत्पत्ति और उनकी प्रशंसा तथा यशोदा के पूछने पर अपने ‘राधा’ नाम की व्याख्या करना राधिका ने कहा — यशोदे ! स्त्री जाति तो वस्तुतः यों ही अबला, मूढ़ और अज्ञान में… Read More


ब्रह्मवैवर्तपुराण-श्रीकृष्णजन्मखण्ड-अध्याय 110 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ श्रीराधाकृष्णाभ्यां नमः ॥ (उत्तरार्द्ध) एक सौ दसवाँ अध्याय श्रीकृष्ण के कहने से नन्द-यशोदा का ज्ञान प्राप्ति के लिये कदलीवन में राधिका के पास जाना, वहाँ अचेतनावस्था में पड़ी हुई राधा को श्रीकृष्ण के संदेश द्वारा चैतन्य करना और राधा का उपदेश देने के लिये उद्यत होना… Read More


ब्रह्मवैवर्तपुराण-श्रीकृष्णजन्मखण्ड-अध्याय 109 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ श्रीराधाकृष्णाभ्यां नमः ॥ (उत्तरार्द्ध) एक सौ नौवाँ अध्याय बारात की बिदाई, भीष्मक द्वारा दहेज-दान और द्वारका में मङ्गलोत्सव श्रीनारायण कहते हैं — इसी समय रुक्मिणी की माता महारानी सुन्दरी सुभद्रा आनन्दमग्न हो पति-पुत्रवती साध्वी महिलाओं के साथ वहाँ आयीं और निर्मन्थन आदि मङ्गल-कार्य करके दम्पति को… Read More


ब्रह्मवैवर्तपुराण-श्रीकृष्णजन्मखण्ड-अध्याय 108 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ श्रीराधाकृष्णाभ्यां नमः ॥ (उत्तरार्द्ध) एक सौ आठवाँ अध्याय रुक्मिणी और श्रीकृष्ण का विवाह श्रीनारायण कहते हैं— नारद! इसी समय महालक्ष्मी स्वरूपा रुक्मिणीदेवी मुनियों और देवताओं के साथ सभा में आयीं और रत्नसिंहासन पर विराजमान हुईं। वे रत्नाभरणों से विभूषित थीं और उनके शरीर पर अग्निशुद्ध साड़ी… Read More