ब्रह्मवैवर्तपुराण-श्रीकृष्णजन्मखण्ड-अध्याय 107 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ श्रीराधाकृष्णाभ्यां नमः ॥ (उत्तरार्द्ध) एक सौ सातवाँ अध्याय रुक्मी आदि का यादवों के साथ युद्ध, शाल्व का वध, रुक्मी की सेना का पलायन, बारात का पुरी में प्रवेश और स्वागत-सत्कार, शुभलग्न में श्रीकृष्ण का बारातियों तथा देवों के साथ राजा के आँगन में जाना, भीष्मक द्वारा… Read More


ब्रह्मवैवर्तपुराण-श्रीकृष्णजन्मखण्ड-अध्याय 106 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ श्रीराधाकृष्णाभ्यां नमः ॥ (उत्तरार्द्ध) एक सौ छठवाँ अध्याय रेवती और बलराम के विवाह का वर्णन तथा रुक्मी, शाल्व, शिशुपाल और दन्तवक्र का श्रीकृष्ण को कटुवचन कहना श्रीनारायण कहते हैं — नारद! इसी समय महाबली राजा ककुद्मी अपनी कन्या के लिये वर की तलाश में ब्रह्मलोक से… Read More


ब्रह्मवैवर्तपुराण-श्रीकृष्णजन्मखण्ड-अध्याय 105 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ श्रीराधाकृष्णाभ्यां नमः ॥ (उत्तरार्द्ध) एक सौ पाँचवाँ अध्याय भीष्मक द्वारा रुक्मिणी के विवाह का प्रस्ताव, शतानन्द का उन्हें श्रीकृष्ण के साथ विवाह करने की सम्मति देना, रुक्मी द्वारा उसका विरोध और शिशुपाल के साथ विवाह करने का अनुरोध, भीष्मक का श्रीकृष्ण तथा अन्यान्य राजाओं को निमन्त्रित… Read More


ब्रह्मवैवर्तपुराण-श्रीकृष्णजन्मखण्ड-अध्याय 104 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ श्रीराधाकृष्णाभ्यां नमः ॥ (उत्तरार्द्ध) एक सौ चारवाँ अध्याय द्वारकापुरी को देखने के लिये देवताओं और मुनियों का आना और उग्रसेन का राज्याभिषेक श्रीनारायणजी कहते हैं — नारद! इसी समय ब्रह्मा, हर, पार्वती, अनन्त, धर्म, सूर्य, अग्नि, कुबेर, वरुण, वायु, यम, महेन्द्र, चन्द्र, रुद्र, आदित्य, वसु, दैत्य,… Read More


ब्रह्मवैवर्तपुराण-श्रीकृष्णजन्मखण्ड-अध्याय 103 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ श्रीराधाकृष्णाभ्यां नमः ॥ (उत्तरार्द्ध) एक सौ तीनवाँ अध्याय द्वारकापुरी का निर्माण श्रीनारायण कहते हैं — नारद! तदनन्तर सर्वव्यापी श्रीहरि ने बलराम के साथ मथुरापुरी में आकर पिता को प्रणाम किया और वटवृक्ष के नीचे बैठकर आदरसहित गरुड़, क्षारसागर और विश्वकर्मा का स्मरण किया । वहाँ उन्होंने… Read More


ब्रह्मवैवर्तपुराण-श्रीकृष्णजन्मखण्ड-अध्याय 102 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ श्रीराधाकृष्णाभ्यां नमः ॥ (उत्तरार्द्ध) एक सौ दोवाँ अध्याय बलराम सहित श्रीकृष्ण का विद्या पढ़ने के लिये महर्षि सांदीपनि के निकट जाना, गुरु और गुरुपत्नी द्वारा उनका स्वागत और विद्याध्ययन के पश्चात् गुरुदक्षिणारूप में गुरु के मृतक पुत्र को उन्हें वापस देकर घर लौटना श्रीनारायण कहते हैं… Read More


ब्रह्मवैवर्तपुराण-श्रीकृष्णजन्मखण्ड-अध्याय 101 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ श्रीराधाकृष्णाभ्यां नमः ॥ (उत्तरार्द्ध) एक सौ एकवाँ अध्याय नन्द आदि समागत अभ्यागतों की बिदाई और वसुदेव-देवकी का अनेकविध वस्तुओं का दान करना नारायण बोले —  मुने! इस प्रकार जब देवताओं और मुनियों ने मन-ही-मन श्रीकृष्ण की स्तुति करके विराम लिया, तब आँगन में पीले वस्त्र से… Read More


ब्रह्मवैवर्तपुराण-श्रीकृष्णजन्मखण्ड-अध्याय 100 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ श्रीराधाकृष्णाभ्यां नमः ॥ (उत्तरार्द्ध) सौवाँ अध्याय अदिति आदि देवियों द्वारा पार्वती का स्वागत-सत्कार, वसुदेवजी का देव-पूजन आदि माङ्गलिक कार्य करके बलराम और श्रीकृष्ण का उपनयन करना श्रीनारायण कहते हैं — नारद! तदनन्तर अदिति, दिति, देवकी, रोहिणी, रति, सरस्वती, पतिव्रता यशोदा, लोपामुद्रा, अरुन्धती, अहल्या तथा तारका —… Read More


ब्रह्मवैवर्तपुराण-श्रीकृष्णजन्मखण्ड-अध्याय 99 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ श्रीराधाकृष्णाभ्यां नमः ॥ (उत्तरार्द्ध) निन्यानबेवाँ अध्याय गर्गजी का आगमन और वसुदेवजी से पुत्रों के उपनयन के लिये कहना, उसी प्रसङ्ग में मुनियों और देवताओं का आना, वसुदेवजी द्वारा उनका सत्कार और गणेश का अग्र-पूजन श्रीनारायण कहते हैं — नारद! इसी समय तपस्वी गर्गजी, जो सदा संयम… Read More


ब्रह्मवैवर्तपुराण-श्रीकृष्णजन्मखण्ड-अध्याय 98 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ श्रीराधाकृष्णाभ्यां नमः ॥ (उत्तरार्द्ध) अट्ठानबेवाँ अध्याय श्रीकृष्णद्वारा गोकुलका वृत्तान्त पूछे जानेपर उद्धवका उसे कहते हुए राधा की दशाका विशेषरूपसे वर्णन करना श्रीनारायण कहते हैं — नारद! तदनन्तर उद्धव यशोदा को प्रणामकर उतावली के साथ हर्षपूर्वक खर्जूर-कानन को बाँयें करके यमुना-तट पर गये। वहीं स्नान-भोजन करके वे… Read More