अग्निपुराण – अध्याय 003 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ तीसरा अध्याय समुद्र मन्थन, कूर्म तथा मोहिनी अवतार की कथा अग्निदेव कहते हैं — वसिष्ठ! अब मैं कूर्मावतारका वर्णन करूँगा। यह सुनने पर सब पापों का नाश हो जाता है। पूर्वकाल की बात है, देवासुर संग्राम में दैत्यों ने देवताओं… Read More


अग्निपुराण – अध्याय 002 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ दूसरा अध्याय मत्स्यावतार की कथा वसिष्ठजी ने कहा — अग्निदेव ! आप सृष्टि आदि के कारणभूत भगवान् विष्णु के मत्स्य आदि अवतारों का वर्णन कीजिये । साथ ही ब्रह्मस्वरूप अग्निपुराण को भी सुनाइये, जिसे पूर्वकाल में आपने श्रीविष्णुभगवान् के मुख… Read More


अग्निपुराण – अध्याय 001 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ पहला अध्याय मङ्गलाचरण तथा अग्नि और वसिष्ठ के संवाद-रूप से अग्निपुराण का आरम्भ श्रियं सरस्वतीं गौरीं गणेशं स्कन्दमीश्वरम् । ब्रह्माणं वह्निमिन्द्रादीन् वासुदेवं नमाम्यहम् ॥ ‘लक्ष्मी, सरस्वती, पार्वती, गणेश, कार्तिकेय, महादेवजी, ब्रह्मा, अग्नि, इन्द्र आदि देवताओं तथा भगवान् वासुदेव को मैं… Read More


अग्निपुराण का संक्षिप्त परिचय भारतीय जीवन-संस्कृति के मूलाधार ‘वेद’ हैं। वेद भगवान् ‌के स्वाभाविक उच्छ्वास हैं, अतः वे भगवत्स्वरूप ही हैं । श्रुत ब्रह्मवाणी का संरक्षण परम्परा से ऋषियों द्वारा होता रहा, इसीलिये इसे ‘श्रुति’ कहते हैं । भगवदीय वाणी वेदों के सत्य को समझने के लिये षडङ्ग, अर्थात् शिक्षा, कल्प, व्याकरण, छन्द, निरुक्त और… Read More


ब्रह्मवैवर्तपुराण-श्रीकृष्णजन्मखण्ड-अध्याय 133 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ श्रीराधाकृष्णाभ्यां नमः ॥ (उत्तरार्द्ध) एक सौ तैंतीसवाँ अध्याय पुराणों के लक्षण और उनकी श्लोक संख्या का निरूपण, ब्रह्मवैवर्तपुराण के पठन-श्रवण के माहात्म्य का वर्णन करके सूतजी का सिद्धाश्रम को प्रयाण शौनकजी ने कहा — वत्स ! ब्रह्मवैवर्त-पुराण में जिस फल का निरूपण हुआ है, वह निर्विघ्नतापूर्वक… Read More


ब्रह्मवैवर्तपुराण-श्रीकृष्णजन्मखण्ड-अध्याय 132 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ श्रीराधाकृष्णाभ्यां नमः ॥ (उत्तरार्द्ध) एक सौ बतीसवाँ अध्याय सम्पूर्ण कथा का संक्षेप तथा अनुक्रमणिका शौनक बोले — हे धर्मेश ! मैंने सब कुछ सुन लिया। कुछ अवशिष्ट नहीं है । हे महाभाग ! मुझ ब्राह्मण से पुनः पुराण का कथन करें । जन्म से ही मैंने… Read More


ब्रह्मवैवर्तपुराण-श्रीकृष्णजन्मखण्ड-अध्याय 131 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ श्रीराधाकृष्णाभ्यां नमः ॥ (उत्तरार्द्ध) एक सौ इकतीसवाँ अध्याय अग्नि तथा स्वर्ण की उत्पत्ति का प्रसङ्ग शौनक बोले — मैंने परम अद्भुत, अति गोपनीय, अत्यन्त रम्य एवं परम नवीन यह अपूर्व उपाख्यान सुना । पुराणों में क्या ही अनिर्वचनीय, कमनीय एवं मनोहर, प्राचीन तथा अति दुर्लभ कथा… Read More


ब्रह्मवैवर्तपुराण-श्रीकृष्णजन्मखण्ड-अध्याय 130 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ श्रीराधाकृष्णाभ्यां नमः ॥ (उत्तरार्द्ध) एक सौ तीसवाँ अध्याय नारायण के आदेश से नारद का विवाह के लिये उद्यत हो ब्रह्मलोक में जाना, ब्रह्मा का दल-बल के साथ राजा संजय के पास आना, संजय-कन्या और नारद का विवाह, सनत्कुमार द्वारा नारद को श्रीकृष्ण-मन्त्रोपदेश, महादेवजी का उन्हें श्रीकृष्ण… Read More


ब्रह्मवैवर्तपुराण-श्रीकृष्णजन्मखण्ड-अध्याय 129 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ श्रीराधाकृष्णाभ्यां नमः ॥ (उत्तरार्द्ध) एक सौ उनतीसवाँ अध्याय श्रीकृष्ण के गोलोक-गमन का वर्णन श्रीनारायण कहते हैं — नारद! परिपूर्णतम प्रभु भगवान् श्रीकृष्ण वहाँ तत्काल ही गोकुलवासियों के सालोक्य मोक्ष को देखकर भाण्डीरवन में वटवृक्ष के नीचे पाँच गोपों के साथ ठहर गये। वहाँ उन्होंने देखा कि… Read More


ब्रह्मवैवर्तपुराण-श्रीकृष्णजन्मखण्ड-अध्याय 128 ॥ ॐ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ ॐ श्रीराधाकृष्णाभ्यां नमः ॥ (उत्तरार्द्ध) एक सौ अठ्ठाईसवाँ अध्याय श्रीकृष्ण द्वारा नन्द को ज्ञानोपदेश और राधा-कलावती आदि गोपियों का गोलोक-गमन श्रीनारायण कहते हैं — नारद! जहाँ पहले ब्राह्मणपत्नियों ने श्रीकृष्ण को अन्न दिया था; उस भाण्डीर-वट की छाया में श्रीकृष्ण स्वयं विराजमान हुए और वहीं समस्त गोपों… Read More