श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-नवमः स्कन्धः-अध्याय-50 श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-नवमः स्कन्धः-अध्याय-50 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ उत्तरार्ध-नवमः स्कन्धः-पञ्चाशत्तमोऽध्यायः पचासवाँ अध्याय भगवती श्रीराधा तथा श्रीदुर्गा के मन्त्र, ध्यान, पूजा-विधान तथा स्तवन का वर्णन देव्या आवरणपूजाविधिवर्णनम् नारदजी बोले — [ हे भगवन् ! ] मूलप्रकृतिरूपा देवियों का सारा आख्यान मैंने यथार्थरूप में सुन लिया, जिसका श्रवण करके प्राणी जन्म-मरणरूपी… Read More
श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-नवमः स्कन्धः-अध्याय-49 श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-नवमः स्कन्धः-अध्याय-49 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ उत्तरार्ध-नवमः स्कन्धः-एकोनपञ्चाशत्तमोऽध्यायः उनचासवाँ अध्याय आदि गौ सुरभिदेवी का आख्यान सुरभ्युपाख्यानवर्णनम् नारदजी बोले — हे ब्रह्मन् ! गोलोक से जो सुरभिदेवी आयी थीं, वे कौन थीं? मैं ध्यानपूर्वक उनका जन्मचरित्र सुनना चाहता हूँ ॥ १ ॥ श्रीनारायण बोले — [ हे नारद!]… Read More
श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-नवमः स्कन्धः-अध्याय-48 श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-नवमः स्कन्धः-अध्याय-48 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ उत्तरार्ध-नवमः स्कन्धः-अष्टचत्वारिंशोऽध्यायः अड़तालीसवाँ अध्याय भगवती मनसा का पूजन-विधान, मनसा-पुत्र आस्तीक का जनमेजय के सर्पसत्र में नागों की रक्षा करना, इन्द्र द्वारा मनसादेवी का स्तवन करना मनसोपाख्यानवर्णनम् श्रीनारायण बोले — हे मुनिश्रेष्ठ ! मैंने देवी मनसा के विषय में विधानपूर्वक कह दिया… Read More
श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-नवमः स्कन्धः-अध्याय-47 श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-नवमः स्कन्धः-अध्याय-47 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ उत्तरार्ध-नवमः स्कन्धः-सप्तचत्वारिंशोऽध्यायः सैंतालीसवाँ अध्याय भगवती मंगलचण्डी तथा भगवती मनसा का आख्यान मङ्गलचण्डीमनसयोरुपाख्यानवर्णनम् श्रीनारायण बोले — हे ब्रह्मपुत्र ! आगमशास्त्र के अनुसार मैंने षष्ठीदेवी का आख्यान कह दिया, अब भगवती मंगलचण्डी का आख्यान और उनका पूजा- विधान आदि सुनिये, जिसे मैंने धर्मदेव… Read More
श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-नवमः स्कन्धः-अध्याय-46 श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-नवमः स्कन्धः-अध्याय-46 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ उत्तरार्ध-नवमः स्कन्धः-षट्चत्वारिंशोऽध्यायः छियालीसवाँ अध्याय भगवती षष्ठी की महिमा के प्रसंग में राजा प्रियव्रत की कथा षष्ठ्युपाख्यानवर्णनम् नारदजी बोले — हे ब्रह्मन् ! हे वेदवेत्ताओंमें श्रेष्ठ ! मैंने अनेक उत्तम देवियोंका उत्तम आख्यान सुन लिया; अब आप दूसरी देवियोंके चरित्रका वर्णन कीजिये… Read More
श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-नवमः स्कन्धः-अध्याय-45 श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-नवमः स्कन्धः-अध्याय-45 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ उत्तरार्ध-नवमः स्कन्धः-पञ्चचत्वारिंशोऽध्यायः पैंतालीसवाँ अध्याय भगवती दक्षिणा का उपाख्यान दक्षिणोपाख्यानवर्णनम् श्रीनारायण बोले — [ हे नारद!] मैंने भगवती स्वाहा तथा स्वधा का अत्यन्त मधुर तथा कल्याणकारी उपाख्यान बता दिया। अब मैं भगवती दक्षिणा का आख्यान कह रहा हूँ, सावधान होकर सुनिये ॥… Read More
श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-नवमः स्कन्धः-अध्याय-44 श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-नवमः स्कन्धः-अध्याय-44 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ उत्तरार्ध-नवमः स्कन्धः-चतुश्चत्वारिंशोऽध्यायः चौवालीसवाँ अध्याय भगवती स्वधा का उपाख्यान स्वधोपाख्यानवर्णनम् श्रीनारायण बोले — हे नारद! सुनिये, अब मैं स्वधा का उत्तम आख्यान कहूँगा, जो पितरों के लिये तृप्ति-कारक तथा श्राद्धान्न के फल की वृद्धि करने वाला है ॥ १ ॥ जगत् का… Read More
श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-नवमः स्कन्धः-अध्याय-43 श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-नवमः स्कन्धः-अध्याय-43 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ उत्तरार्ध-नवमः स्कन्धः-त्रिचत्वारिंशोऽध्यायः तैंतालीसवाँ अध्याय भगवती स्वाहा का उपाख्यान स्वाहोपाख्यानवर्णनम् नारदजी बोले — हे नारायण ! हे महाभाग ! हे महाप्रभो ! आप रूप, गुण, यश, तेज और कान्ति में साक्षात् नारायण ही हैं ॥ १ ॥ हे मुने! हे वेदवेत्ताओं में… Read More
श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-नवमः स्कन्धः-अध्याय-42 श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-नवमः स्कन्धः-अध्याय-42 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ उत्तरार्ध-नवमः स्कन्धः-द्विचत्वारिंशोऽध्यायः बयालीसवाँ अध्याय इन्द्र द्वारा भगवती लक्ष्मी का षोडशोपचार पूजन एवं स्तवन महालक्ष्म्याः ध्यानस्तोत्रवर्णनम् नारदजी बोले — हे प्रभो ! मैंने भगवान् श्रीहरि का कल्याणप्रद गुणानुवाद, उनका उत्तम ज्ञान तथा भगवती लक्ष्मी का अभीष्ट उपाख्यान सुना। अब उन देवी के… Read More
श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-नवमः स्कन्धः-अध्याय-41 श्रीमद्देवीभागवत-महापुराण-नवमः स्कन्धः-अध्याय-41 ॥ श्रीजगदम्बिकायै नमः ॥ ॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ उत्तरार्ध-नवमः स्कन्धः-एकचत्वारिंशोऽध्यायः इकतालीसवाँ अध्याय ब्रह्माजी का इन्द्र तथा देवताओं को साथ लेकर श्रीहरि के पास जाना, श्रीहरि का उनसे लक्ष्मी के रुष्ट होने के कारणों को बताना, समुद्रमन्थन तथा उससे लक्ष्मीजी का प्रादुर्भाव श्रीलक्ष्म्युपाख्यानवर्णनम् श्रीनारायण बोले — हे ब्रह्मन् ! भगवान्… Read More