सौभाग्याष्टोत्तरशतनामस्तोत्र किसी भी श्रद्धा-विश्वास-युक्त स्त्री के द्वारा स्नानादि से शुद्ध होकर सूर्योदय से पहले नीचे लिखे मन्त्र की १० माला प्रतिदिन जप किये जाने से घर में सुख-समृद्धि की वृद्धि होती है तथा उसका सौभाग्य बना रहता है। किसी शुभ दिन जप का आरम्भ करना चाहिये तथा प्रतिवर्ष चैत्र और आश्विन के नवरात्रों में विधिपूर्वक… Read More


पीलिया का मंत्र “ओम नमो बैताल। पीलिया को मिटावे, काटे झारे। रहै न नेंक। रहै कहूं तो डारुं छेद-छेद काटे। आन गुरु गोरख-नाथ। हन हन, हन हन, पच पच, फट् स्वाहा।” विधिः- उक्त मन्त्र को ‘सूर्य-ग्रहण’ के समय १०८ बार जप कर सिद्ध करें। फिर शुक्र या शनिवार को काँसे की कटोरी में एक छटाँक… Read More


पीर विरहना का मन्त्र प्रयोग “पीर विरहना, फूल विरहना, घुंघु करे। सवा सेर का तोसा खाए, अस्सी कोस का धावा करे। सात सै कुतक आगे चले, सात सै कुतक पीछे चले। छप्पन सै छूरी चले। बावन से वीर चलें, जिनमें गठ गजना का पीर चले। और की ध्वजा उखाड़ता चले, अपनी ध्वजा टेकता चले। सोते… Read More


पूजा के विविध उपचार संक्षेप और विस्तार के भेद से पूजा के अनेकों प्रकार के उपचार हैं- पञ्चोपचार-१॰ गन्ध, २॰ पुष्प, ३॰ धूप, ४॰ दीप और ५॰ नैवेद्य। दस उपचार- १॰ पाद्य, २॰ अर्घ्य, ३॰ आचमन, ४॰ स्नान, ५॰ वस्त्र-निवेदन, ६॰ गन्ध, ७॰ पुष्प, ८॰ धूप, ९॰ दीप और १०॰ नैवेद्य।… Read More


ग्रह पीड़ा निवारक टोटके- सूर्य १॰ सूर्य को बली बनाने के लिए व्यक्ति को प्रातःकाल सूर्योदय के समय उठकर लाल पूष्प वाले पौधों एवं वृक्षों को जल से सींचना चाहिए। २॰ रात्रि में ताँबे के पात्र में जल भरकर सिरहाने रख दें तथा दूसरे दिन प्रातःकाल उसे पीना चाहिए। ३॰ ताँबे का कड़ा दाहिने हाथ… Read More


हस्तरेखा और आर्थिक सम्पन्नता ॰ यदि अंगुलियों कर पर्व लम्बे हो तो जातक धनी होने के साथ-साथ दीर्घायु भी प्राप्त करता है। ॰ यदि कनिष्ठा अँगुली का नाखुन अनामिका अँगुलू के द्वितीय पर्व से आगे निकलकर तीसरे पर्व तक जाये तो जातक को कभी भी धन का अभाव नहीं होता। ॰ यदि कनिष्ठा एवं अनामिका… Read More


पान वशीकरण १॰ “कामरु देश कामाख्या देवी, तहाँ बसे इस्माइल जोगी। इस्माइल जोगी ने दीना बीड़ा। पहला बीड़ा आती-जाती, दूजा बीड़ा दिखावे छाती, तीजा बीड़ा अंग लिपटाय। फुरो मन्त्र, ईश्वरो वाचा। दुहाई गुरु गोरखनाथ की।” विधिः- दीपावली की रात्रि में १४४ बार जपने से उक्त मन्त्र सिद्ध हो जाता है। जप के समय दीपक जलाएँ,… Read More


वस्त्र धारण तथा भविष्य सामान्यतः वस्त्र सुन्दर एवं आकर्षक दिखने एवं अपने व्यक्तित्व को प्रभावशाली दिखाने हेतु धारण किए जाते हैं। रंग, आकृति एवं स्वरुप की दृष्टि से प्रत्येक व्यक्ति की पसन्द भिन्न-भिन्न हो सकती है। ज्योतिष शास्त्र मेम क्रमशः देव, मनुष्य एवं राक्षस गण होते हैं। इसके अतिरिक्त वास्तु शास्त्र में आठ दिशाओं तथा… Read More


मोहनी शाबर मन्त्र (१) “फूलर से फूल बसे अदूल फूल में, नरसिंह बसे वाही फूल, फूल कचनार छोड़ह, तिरिया माय-बाप कै, चल हमरा संग। दोहाय महत मानी कै।” विधिः- अदूल (गुड़हल) फूल की कली पर बारह बार उक्त मन्त्र पढ़ें। जिस पर फेकेंगे, वह वशीभूत होगा। (२) “मोहन-मोहन क्या करे ? मोहन मेरा नाम। भीत… Read More


मांगलिक दोष निवारक टिप्स १॰ प्रत्येक मंगलवार को वट वृक्ष की जड़ पर मीठा दूध चढ़ाए। बाद में उस दूध की भीगी मिट्टी से स्वयं के तिलक करें। २॰ पक्षियों को मीठा डालें। ३॰ मंगल दोष से युक्त कन्या को पाँच साल तक मंगला गौरी व्रत करना शुभफलकारक रहता है। ४॰ मंगल दोष को नष्ट… Read More