ऋण-मोचन महा-गणपति-स्तोत्र विनियोगः- ॐ अस्य श्रीऋण-मोचन महा-गणपति-स्तोत्र-मन्त्रस्य भगवान् शुक्राचार्य ऋषिः, ऋण-मोचन-गणपतिः देवता, मम-ऋण-मोचनार्थं जपे विनियोगः। ऋष्यादि-न्यासः- भगवान् शुक्राचार्य ऋषये नमः शिरसि, ऋण-मोचन-गणपति देवतायै नमः हृदि, मम-ऋण-मोचनार्थे जपे विनियोगाय नमः अञ्जलौ।… Read More


ऋण-हरण श्री गणेश-मन्त्र प्रयोग यह धन-दायी प्रयोग है। यदि प्रयोग नियमित करना हो तो साधक अपने द्वारा निर्धारित वस्त्र में कर सकता है किन्तु, यदि प्रयोग पर्व विशेष मात्र में करना हो, तो पीले रंग के आसन पर पीले वस्त्र धारण कर पीले रंग की माला या पीले सूत में बनी स्फटिक की माला से… Read More


दाम्पत्य जीवन से जुड़े शुभाशुभ स्वप्न स्वप्न में जीवन हे हर क्षेत्र के विषय में शुभाशुभ संकेत मिलते हैं । स्वप्नों में दाम्पत्य जीवन के विषय में भी जाना जा सकता हैं । किसी व्यक्ति का किसी व्यक्ति का दाम्पत्य जीवन सुखपूर्वक व्यतीत होगा अथवा क्लेशमय रहेगा ? क्या आपका विवाह शीघ्र होने वाला है… Read More


पश्चात्ताप का परिणाम इक्ष्वाकु-वंश के महीप त्रिवृष्ण के पुत्र त्र्यरुण की अपने पुरोहित के पुत्र वृशजान से बहुत पटती थी । दोनों एक-दूसरे के बिना नही रह सकते थे । महाराज त्र्यरुण की वीरता और वृशजान के पाण्डित्य से राजकीय समृद्धि नित्य बढ़ रही थी । महाराज ने दिग्विजय-यात्रा की; उन्होंने वृशजान से सारथि-पद स्वीकार… Read More


पूजा में आरती का महत्त्व ‘आरती’ पूजन के अन्त में देवता की प्रसन्नता के हेतु की जाती है । ‘स्कन्द-पुराण’ में लिखा है – “मन्त्र-हीनं क्रिया-हीनं, यत्-कृतं पूजनं हरेः । सर्व सम्पूर्णतामेति, कृते नीराजने शिवे ।।” अर्थात् मन्त्र-हीन और क्रिया-हीन होने पर भी नीराजन (आरती) कर लेने से उसमें सम्पूर्ण पूर्णता आ जाती है ।… Read More


अद्भुत व चमत्कारी गोमती चक्र होली पर अथवा ग्रहण काल में साधक को चाहिए कि गोमती चक्र अपने सामने रखे लें और उस पर निम्न मन्त्र की 11 माला फेरें :- मन्त्रः- “ॐ वं आरोग्यानिकरी रोगानशेषा नमः” इस प्रकार जब 11 मालाएँ सम्पन्न हो जायें तब साधक को वह गोमती चक्र सावधानी-पूर्वक अपने पास रखना… Read More


धन-दायक तांत्रिक सामग्री – गोमती चक्र १॰ सात गोमती चक्रों को शुक्ल पक्ष के प्रथम अथवा दीपावली पर लाल वस्त्र में अभिमंत्रित कर पोटली बना कर धन स्थान पर रखें । २॰ यदि आपको अचानक आर्थिक हानि होती हो, तो किसी भी मास के प्रथम सोमवार को २१ अभिमन्त्रित गोमती चक्रों को पीले अथवा लाल… Read More


ग्रह बाधा के पूर्व संकेत ग्रह अपना शुभाशुभ प्रभाव गोचर एवं दशा-अन्तर्दशा-प्रत्यन्तर्दशा में देते हैं । जिस ग्रह की दशा के प्रभाव में हम होते हैं, उसकी स्थिति के अनुसार शुभाशुभ फल हमें मिलता है । जब भी कोई ग्रह अपना शुभ या अशुभ फल प्रबल रुप में देने वाला होता है, तो वह कुछ… Read More


भगवान् श्री राम की दिन-चर्या “आनन्द-रामायण” के राज्य-काण्ड के १९ वेँ सर्ग में ‘भगवान् श्रीराम’ की दिन-चर्या का वर्णन है । इस वर्णन से सदाचारों का महत्त्व भली-भाँति स्पष्ट होता है । महर्षि वाल्मीकि अपने शिष्यों को बताते हैं – “भगवान् श्रीराम नित्य प्रातः-काल चार घड़ी रात्रि शेष रहते मङ्गल-गीत आदि को श्रवण कर जागते… Read More


कामना अनुसार देवता उपासना श्रीमद्-भागवत (२/३/२-१०) में विभिन्न कामनाओं के उद्देश्य से विभिन्न देवताओं की उपासना का उल्लेख मिलता है – ब्रह्मवर्चसकामस्तु यजेत ब्रह्मणस्पतिम् । इन्द्रमिन्द्रियकामस्तु प्रजाकामः प्रजापतीन् ।। देवीं मायां तु श्रीकामस्तेजस्कामो विणावसुम् । वसुकामो वसून् रुद्रान् वीर्यकामोऽथ वीर्यवान् ।। अन्नाद्यकामस्त्वदितिं स्वर्गकामोऽदितेः सुतान् । विश्वान् देवान राज्यकामः साध्यान् संसाधको विशाम् ।। आयुष्कामोऽश्विनौ देवौ पुष्टिकाम… Read More