नारायण हृदयम् September 14, 2015 | aspundir | Leave a comment ।। नारायण हृदयम् ।। भगवान् लक्ष्मी-नारायण की प्रसन्नता के लिए “लक्ष्मी-हृदय” के साथ इसका पाठ करने से धन-धान्य व ऐश्वर्य की वृद्धि होती है । आचम्य प्राणानायम्य देशकालौ स्मृत्वा। अस्मद्गुर्वन्तर्गत – श्रीभारतीरमणमुख्यप्राणान्तर्गत – श्रीलक्ष्मीनारायणप्रेरणया श्रीलक्ष्मीनारायणप्रीत्यर्थं ममाभीष्टसिद्ध्यर्थं सङ्कलीकरणरीत्या सम्पुटीकरणरीत्या वा नारायणहृदयस्य सकृदावर्तनं करिष्ये ।… Read More
परशुराम-कृत श्रीदुर्गा-स्तोत्र September 14, 2015 | aspundir | Leave a comment परशुराम-कृत श्रीदुर्गा-स्तोत्र ।। परशुराम उवाच ।। श्रीकृष्णस्य च गो-लोके-परिपूर्णतमस्य चः । आविर्भूता विग्रहतः, परा सृष्ट्युन्मुखस्य च ।। सूर्य-कोटि-प्रभा-युक्ता, वस्त्रालंकार-भूषिता । वह्नि-शुद्धांशुकाधाना सुस्मिता, सुमनोहरा ।। नव-यौवन-सम्पन्ना सिन्दूर-विन्दु-शोभिता । ललितं कबरीभारं मालती-माल्य-मण्डितम् ।। अहोऽनिर्वचनीया त्वं, चारुमूर्ति च बिभ्रती । मोक्षप्रदा मुमुक्षूणां, महाविष्णोर्विधिः स्वयम् ।। मुमोह क्षणमात्रेण दृष्ट्वा, त्वां सर्वमोहिनीम् । बालैः सम्भूय सहसा, सस्मिता धाविता पुरा ।।… Read More
शीघ्र फल-दायक सिद्ध शाबर मन्त्र Quick remedy shabar mantra September 13, 2015 | aspundir | Leave a comment शीघ्र फल-दायक सिद्ध शाबर मन्त्र Quick remedy shabar mantra ‘साबर’ का प्रतीक अर्थ होता है ग्राम्य, अपरिष्कृत । ‘साबर-तन्त्र’ – तन्त्र की ग्राम्य-शाखा है । इसके प्रवर्तक भगवान् शंकर प्रत्यक्ष-तया नहीं है, किन्तु जिन सिद्धों ने इसका आविष्कार किया, वे परम-शिव-भक्त अवश्य थे । गुरु गोरखनाथ तथा गुरु मछन्दर नाथ ‘साबर-मन्त्र’ के जनक माने जाते… Read More
अग्नियों द्वारा उपदेश September 13, 2015 | aspundir | Leave a comment अग्नियों द्वारा उपदेश कमल का पुत्र उपकोसल सत्यकाम जाबाल के यहाँ ब्रह्मचर्य ग्रहण करके अध्ययन करता था । बारह वर्षों तक उसने आचार्य एवं अग्नियों की उपासना की । आचार्य ने अन्य सभी ब्रह्मचारियों का समावर्तन-संस्कार कर दिया और उन्हें घर जाने की आज्ञा दे दी । केवल उपकोसल को ऐसा नहीं किया । उपकोसल… Read More
मोहिनी शाबर मन्त्र 03 September 13, 2015 | aspundir | Leave a comment मोहिनी शाबर मन्त्र मन्त्रः- “हेरो सरसुआ फेरो बहिनी, जब देखों तो बाँस के रहनी, नथे बैल बनियन बँधो, परके तेल माथे पे लगाऊ रहिया, मोहिनी धुँआ धरनी, जरवा जोहिनी भैया मोहिनी, कहाँ की मोहिनी, भेड़ा-घाट की मोहिनी, लग जाय री मोहिनी, उस्ताज मोहिनी, चल रे मोहनिया । फिर जहाँ फटकारों, तहाँ वचन न परै खाली… Read More
मोहिनी शाबर मन्त्र 02 September 13, 2015 | aspundir | Leave a comment मोहिनी शाबर मन्त्र मन्त्रः- “कहे कमिख्या सुनहु ललजार जर ! पेड़ पात सब तुमरो मलिनौ, पाल पात जराय के भस्मत कीनो । पुन वह क्षार महा-देव ने लई । अब तुमको प्रतिष्ठा भई । ग्रह विचार बेगे तुम आए, जिमि क्षार लगावो धाए । छिन इक में बस होय हमारे, तन-मन ते पग परत विचारे… Read More
मोहिनी शाबर मन्त्र 01 September 13, 2015 | aspundir | Leave a comment मोहिनी शाबर मन्त्र मन्त्रः- “रँजेखुरा सिर हिरदै लावे । मेरी लीला को जग मोहे । जप मोहे देवी काल । नरसिंह की आस्ति नरसिंह, नये ठग मोहिनी । हाट मोहे, बाट मोहे, दौरे दीवान मोहे, भैया-वन्धु मोहे, वैरी-दुश्मन मोहे, रुठो भाखता यो काल मोहे । वैरी शत्रु देहरी बैठ बात बनाई । बाट सिंहा है… Read More
नवाक्षर गणपति-विद्या का जप September 13, 2015 | aspundir | Leave a comment नवाक्षर गणपति-विद्या का जप ‘विरभद्रोड्डीश तन्त्र’ के अनुसार कुम्हार के चाक की मिट्टी से ‘गणेश-प्रतिमा’ बनाकर पञ्चोपचार (गन्ध, पुष्प, धूप, दीप और नैवेद्य) से पूजाकर प्रति-दिन ‘नवाक्षर’ गणपति-विद्या ‘ॐ गं गणपतये नमः का १००० जप करे, तो बुद्धि का विकास होता है। एक मास जप करे, तो स्त्री-लाभ होता है। छः मास जप करे, तो… Read More
मूसलकिसलयम् September 12, 2015 | aspundir | Leave a comment मूसलकिसलयम् तेरहवीं शताब्दी में तमिलनाडु में नम्मालवार नाम के तमिल और संस्कृत के एक महान् साहित्यकार हो चुके हैं । वे बचपन में अनपढ़ रसोइया थे । वे आचार्य और उनके छात्रों के लिये भोजन बनाने का कार्य करते थे । आचार्य थे – पेरिया अचन पिल्लई । एक रोज आचार्य ने उस रसोइये से… Read More
ऋण-मुक्ति श्रीभैरव-मन्त्र September 12, 2015 | aspundir | Leave a comment ऋण-मुक्ति श्रीभैरव-मन्त्र मन्त्रः- “ॐ ऐं क्लीं ह्रीं मम् भैरवाय मम ऋण-विमोचनाय मह्यं महाधन-प्रदाय क्लीं स्वाहा ।” विधिः- रविवार को शुक्ल पक्ष में ‘पुष्य’ या ‘हस्त’ नक्षत्र हो तो उस दिन संकल्प-पूर्वक उक्त मन्त्र का जाप प्रारम्भ करके प्रतिदिन बारह माला २१ तक लगातार करें । रविवार एवं मंगलवार को कन्याओं एवं छोटे बच्चों को मीठा… Read More