भविष्यपुराण – उत्तरपर्व – अध्याय २०२ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (उत्तरपर्व) अध्याय २०२ रत्नाचलदानविधि-वर्णन श्रीकृष्ण बोले — मैं तुम्हें रत्नाचल का विधान बता रहा हूँ, जिसके दान करने से मनुष्य सप्तर्षि के लोकों की प्राप्ति करता है और जो सहस्रों मोतियों द्वारा निर्मित पर्वत उत्तम, पाँच सौ मध्यम, और… Read More


भविष्यपुराण – उत्तरपर्व – अध्याय २०१ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (उत्तरपर्व) अध्याय २०१ घृताचल दान विधि-वर्णन श्रीकृष्ण बोले — मैं तुम्हें घृताचल का विधान बता रहा हूँ, जो तेज तथा अमृतमय, दिव्य एवं महापातकों का नाश करता है । इसके निर्माण में पाँच सौ घृत पूर्ण कलश का उत्तम… Read More


भविष्यपुराण – उत्तरपर्व – अध्याय २०० ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (उत्तरपर्व) अध्याय २०० कपास पर्वत दान विधि का वर्णन श्रीकृष्ण बोले — अब मैं तुम्हें कपास (रुई) पर्वत के दान का विधान बता रहा हूँ, जो समस्त दानों में उत्तम एवं समस्त देवों को अत्यन्त प्रिय है । धनागम… Read More


भविष्यपुराण – उत्तरपर्व – अध्याय १९९ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (उत्तरपर्व) अध्याय १९९ तिलाचल दान-विधि-वर्णन श्रीकृष्ण बोले — मैं तुम्हें सविधान तिल शैल का वर्णन सुना रहा हूँ, जिसके दान करने से मनुष्य परमोत्तम विष्णुलोक की प्राप्ति करता है । तिल अत्यन्त पवित्र एवं पवित्रों में पावन है, भगवान्… Read More


भविष्यपुराण – उत्तरपर्व – अध्याय १९८ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (उत्तरपर्व) अध्याय १९८ हेमाचल दान विधि-वर्णन श्रीकृष्ण बोले — मैं तुम्हें उस पापहारी सुवर्णाचल का विधान बता रहा हूँ जिसे सुसम्पन्न करने पर मनुष्य बह्मा का लोक प्राप्त करता है । इसके निर्माण में सहस्र पल का उत्तम, पाँच… Read More


भविष्यपुराण – उत्तरपर्व – अध्याय १९७ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (उत्तरपर्व) अध्याय १९७ गुडाचल (गुडपर्वत) दान विधि वर्णन श्रीकृष्ण बोले — मैं तुम्हें अब गुडपर्वत का उत्तम विधान बता रहा हूँ, जिससे प्रदान करने पर मनुष्य देवपूजित स्वर्ग की प्राप्ति करता है । इसके निर्माण में दस भार गुड़… Read More


भविष्यपुराण – उत्तरपर्व – अध्याय १९६ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (उत्तरपर्व) अध्याय १९६ लवणपर्वतदानविधि-वर्णन श्रीकृष्ण बोले — मैं तुम्हें इस समय लवणाचल का विधान बता रहा हूँ, जिराके प्रदान करने से मनुष्य शिवलोक की प्राप्ति करता है । इस पर्वत के निर्माण में दस द्रोण का उत्तम, उसके अर्धभाग… Read More


भविष्यपुराण – उत्तरपर्व – अध्याय १९५ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (उत्तरपर्व) अध्याय १९५ दशविध धान्यपर्वतदान विधि का वर्णन युधिष्ठिर ने कहा — भगवन् ! मैं दान का उत्तम माहात्म्य सुनना चाहता हूँ, जो देवर्षिगण पूजित एवं परलोक में अक्षय फल प्रदान करता है । श्रीकृष्ण बोले — राजन् !… Read More


भविष्यपुराण – उत्तरपर्व – अध्याय १९४ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (उत्तरपर्व) अध्याय १९४ वराहदान विधि-वर्णन श्रीकृष्ण बोले — युधिष्ठिर ! मैं तुम्हें आदिवराह दान का विधान बता रहा हूँ, जिसे मैंने पहले समय वराहावतार धारण कर पृथ्वी को बताया था । यह दान पुण्य, पवित्र, आयु की वृद्धि करने… Read More


भविष्यपुराण – उत्तरपर्व – अध्याय १९३ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (उत्तरपर्व) अध्याय १९३ तिथिदान (तिथियों में दान के पदार्थ) वर्णन श्रीकृष्ण बोले — युधिष्ठिर ! इस समय मैं तुम्हें तिथि दान का विधान बता रहा हूँ, जो समस्त पापों के शमन पूर्वक सम्पूर्ण विघ्नों का विनाश करता है ।… Read More