श्रीमद्भागवत विनियोग, न्यास एवं ध्यान January 17, 2019 | aspundir | Leave a comment श्रीमद् भागवत की पूजनविधि तथा विनियोग, न्यास एवं ध्यान प्रार्थना वन्दे श्रीकृष्णदेवं मुरनरकभिदं वेदवेदान्तवेद्यं लोके भक्तिप्रसिद्धं यदुकुलजलधौ प्रादुरासीदपारे । यस्यासीद् रूपमेवं त्रिभुवनतरणे भक्तिवच्च स्वतन्त्रं शास्त्रं रूपं च लोके प्रकटयति मुदा यः स नो भूतिहेतुः ॥ जो इस जगत् में भक्ति से ही प्राप्त होते हैं, जिनका तत्त्व वेद और वेदान्त के द्वारा ही जाननेयोग्य है,… Read More
श्रीमद्भागवत की पूजनविधि January 17, 2019 | aspundir | Leave a comment श्रीमद् भागवत की पूजनविधि तथा विनियोग, न्यास एवं ध्यान प्रातःकाल स्नान के पश्चात् अपना नित्य-नियम समाप्त करके पहले भगवत्-सम्बन्धी स्तोत्रों एवं पदों के द्वारा मंगलाचरण और वन्दना करे । इसके बाद आचमन और प्राणायाम करके — ॐ भद्रं कर्णेभिः शृणुयाम देवा भद्रं पश्येमाक्षभिर्यजत्राः । स्थिरैङ्गैस्तुष्टु वा ँ्सस्तनूभिर्व्यशेम देवहितं यदायुः ॥ १ ॥ — इत्यादि मन्त्रों… Read More
श्रीमद्भागवत – श्रीशुकदेवजी को नमस्कार January 17, 2019 | aspundir | Leave a comment श्रीशुकदेवजी को नमस्कार यं प्रव्रजन्तमनुपतमपेतकृत्यं द्वैपायनो विरहकातर आजुहाव । पुत्रेति तन्मयतया तरवोऽभिनेदुस्तं सर्वभूतहृदयं मुनिमानतोऽस्मि ॥ (१ । २ । २) जिस समय श्रीशुकदेवजी का यज्ञोपवीत संस्कार भी नहीं हुआ था, सुतरां लौकिक-वैदिक कर्मों के अनुष्ठान का अवसर भी नहीं आया था, उन्हें अकेले ही संन्यास लेने के उद्देश्य से जाते देखकर उनके पिता व्यासजी विरह… Read More
श्रीमद्भागवत-माहात्म्य January 17, 2019 | aspundir | Leave a comment ॥ श्रीमद्भागवत-माहात्म्य ॥ (स्वयं श्रीभगवान् के श्रीमुख से ब्रह्माजी के प्रति कथित) श्रीमद् भागवतं नाम पुराणं लोकविश्रुतम् । शृणुयाच्छ्रद्धया युक्तो मम सन्तोषकारणम् ॥ १ ॥ लोकविख्यात श्रीमद्भागवत नामक पुराण का प्रतिदिन श्रद्धा-युक्त होकर श्रवण करना चाहिये । यही मेरे संतोष का कारण है । नित्यं भागवतं यस्तु पुराणं पठते नरः । प्रत्यक्षरं भवेत्तस्य कपिलादानजं फलम्… Read More
भविष्यपुराण – उत्तरपर्व – अध्याय २०८ January 16, 2019 | aspundir | Leave a comment भविष्यपुराण – उत्तरपर्व – अध्याय २०८ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (उत्तरपर्व) अध्याय २०८ अनुक्रमणिका-कथन (वृत्तान्त) इस पर्व के प्रारम्भ में महाराज युधिष्ठिर के पास महर्षि वेदव्यास के साथ अनेक ऋषियों के आगमन, ब्रह्माण्ड की उत्पत्ति, नारद को वैष्णवीमाया का दर्शन, संसार के दोषों का वर्णन, पापों के भेद, शुभ… Read More
भविष्यपुराण – उत्तरपर्व – अध्याय २०७ January 16, 2019 | aspundir | Leave a comment भविष्यपुराण – उत्तरपर्व – अध्याय २०७ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (उत्तरपर्व) अध्याय २०७ श्रीकृष्ण का द्वारका-गमन-वर्णन श्रीकृष्ण बोले — राजन् ! मैंने व्रत तथा दान द्वारा तुम्हें धर्मों का वर्णन सुनाया है, क्योंकि यही धर्म के मूल कारण हैं । अतः तुम निरन्तर अपनी धार्मिक भावना दृढ़ करो ।… Read More
भविष्यपुराण – उत्तरपर्व – अध्याय २०६ January 16, 2019 | aspundir | Leave a comment भविष्यपुराण – उत्तरपर्व – अध्याय २०६ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (उत्तरपर्व) अध्याय २०६ रोहिणीचन्द्रशयन विधि का वर्णन नारद बोले — मुझे चन्द्रमौलिक (शिव) जी के उस व्रत की भलीभाँति व्याख्या बताने की कृपा करें, जिससे दीर्घायु, नीरोग और कुल आदि की वृद्धि समेत पुरुष प्रत्येक जन्म में गुणी होता… Read More
भविष्यपुराण – उत्तरपर्व – अध्याय २०५ January 16, 2019 | aspundir | Leave a comment भविष्यपुराण – उत्तरपर्व – अध्याय २०५ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (उत्तरपर्व) अध्याय २०५ सदाचार धर्म-वर्णन युधिष्ठिर ने कहा — मधुसूदन ! मैं तो प्रतिपदा आदि तिथियों के क्रमशः विस्तृत वर्णन रहस्य मंत्र समेत प्रारम्भ उद्यापन विधान सुना । नवग्रह यज्ञ से होमकर्म, स्नान क्रम, समस्त उत्सव, निखिल दान धर्म,… Read More
भविष्यपुराण – उत्तरपर्व – अध्याय २०४ January 16, 2019 | aspundir | Leave a comment भविष्यपुराण – उत्तरपर्व – अध्याय २०४ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (उत्तरपर्व) अध्याय २०४ शर्कराचल दानविधि-वर्णन श्रीकृष्ण बोले — मैं तुम्हें उत्तम शक्कर-पर्वत का विधान बता रहा हूँ, जिसके दान करने से विष्णु, सूर्य और रुद्र देव सर्वदा प्रसन्न रहते हैं । इसके निर्माण में आठ-भार शक्कर का उत्तम पर्वत,… Read More
भविष्यपुराण – उत्तरपर्व – अध्याय २०३ January 16, 2019 | aspundir | Leave a comment भविष्यपुराण – उत्तरपर्व – अध्याय २०३ ॐ श्रीपरमात्मने नमः श्रीगणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भविष्यपुराण (उत्तरपर्व) अध्याय २०३ रौप्याचलदानविधि-वर्णन श्रीकृष्ण बोले — नरोत्तम ! मैं तुम्हें वह उत्तम रौप्याचल व्रत का विधान बता रहा हूँ जिसके द्वारा मनुष्य सोमलोक प्राप्त करता है । उसके निर्माण में सहस्र पल चाँदी का पर्वत उत्तम, पाँच सौ… Read More