शिवमहापुराण — कोटिरुद्रसंहिता — अध्याय 29 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ श्रीसाम्बसदाशिवाय नमः ॥ श्रीशिवमहापुराण कोटिरुद्रसंहिता उनतीसवाँ अध्याय दारुकावनमें राक्षसोंके उपद्रव एवं सुप्रिय वैश्यकी शिवभक्तिका वर्णन सूतजी बोले— इसके उपरान्त मैं परमात्मा शिवके नागेश नामक परमश्रेष्ठ ज्योतिर्लिंगकी जिस प्रकार उत्पत्ति हुई, उसे कह रहा हूँ ॥ १ ॥ पार्वतीके वरदानसे अहंकारमें डूबी हुई दारुका नामक… Read More


शिवमहापुराण — कोटिरुद्रसंहिता — अध्याय 28 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ श्रीसाम्बसदाशिवाय नमः ॥ श्रीशिवमहापुराण कोटिरुद्रसंहिता अट्ठाईसवाँ अध्याय वैद्यनाथेश्वर ज्योतिर्लिंगके प्रादुर्भाव एवं माहात्म्यका वर्णन सूतजी बोले— किसी समय अभिमानी तथा मानपरायण राक्षस श्रेष्ठ रावण पर्वतोंमें उत्तम कैलासपर भक्तिपूर्वक शिवजीकी आराधना करने लगा ॥ १ ॥ जब कुछ समयतक आराधना किये जानेपर भी शिवजी प्रसन्न न… Read More


शिवमहापुराण — कोटिरुद्रसंहिता — अध्याय 27 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ श्रीसाम्बसदाशिवाय नमः ॥ श्रीशिवमहापुराण कोटिरुद्रसंहिता सत्ताईसवाँ अध्याय गौतमी गंगा एवं त्र्यम्बकेश्वर ज्योतिर्लिंगका माहात्म्यवर्णन ऋषिगण बोले— हे प्रभो ! गंगा किस स्थानसे जलरूपमें प्रवाहित होकर प्रकट हुईं? हे प्रभो ! उनका माहात्म्य सबकी अपेक्षा अधिक क्यों हुआ ? इसे बताइये। हे व्यासशिष्य ! जिन दुष्ट… Read More


शिवमहापुराण — कोटिरुद्रसंहिता — अध्याय 26 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ श्रीसाम्बसदाशिवाय नमः ॥ श्रीशिवमहापुराण कोटिरुद्रसंहिता छब्बीसवाँ अध्याय त्र्यम्बकेश्वर ज्योतिर्लिंग तथा गौतमी गंगाके प्रादुर्भावका आख्यान सूतजी बोले— हे द्विजो ! उस समय स्त्रीसहित गौतमके द्वारा इस प्रकार प्रायश्चित्त करनेपर शिवजी प्रसन्न होकर पार्वतीजी तथा अपने गणोंके साथ प्रकट हो गये। इसके बाद प्रसन्न हुए कृपानिधि… Read More


शिवमहापुराण — कोटिरुद्रसंहिता — अध्याय 25 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ श्रीसाम्बसदाशिवाय नमः ॥ श्रीशिवमहापुराण कोटिरुद्रसंहिता पच्चीसवाँ अध्याय मुनियोंका महर्षि गौतमके प्रति कपटपूर्ण व्यवहार सूतजी बोले— हे ब्राह्मणो ! किसी समय गौतम ऋषिने अपने शिष्योंको जल लाने हेतु भेजा और वे हाथमें कमण्डलु लेकर भक्तिपूर्वक वहाँ पहुँचे ॥ १ ॥ उस समय जल लेनेके लिये… Read More


शिवमहापुराण — कोटिरुद्रसंहिता — अध्याय 24 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ श्रीसाम्बसदाशिवाय नमः ॥ श्रीशिवमहापुराण कोटिरुद्रसंहिता चौबीसवाँ अध्याय त्र्यम्बकेश्वर ज्योतिर्लिंगके माहात्म्य — प्रसंगमें गौतमऋषिकी परोपकारी प्रवृत्तिका वर्णन सूतजी बोले— हे श्रेष्ठ ऋषियो ! मैं पापोंका नाश करनेवाली कथा कहता हूँ, जैसा कि मैंने [ अपने] श्रेष्ठ गुरु व्यासजीसे सुना है, आपलोग सुनिये ॥ १ ॥… Read More


शिवमहापुराण — कोटिरुद्रसंहिता — अध्याय 23 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ श्रीसाम्बसदाशिवाय नमः ॥ श्रीशिवमहापुराण कोटिरुद्रसंहिता तेईसवाँ अध्याय काशीविश्वेश्वर ज्योतिर्लिंगके माहात्म्यके प्रसंगमें काशीमें मुक्तिक्रमका वर्णन ऋषि बोले— हे प्रभो ! हे सूतजी ! यदि वाराणसी महापुरी इतनी पवित्र है, तो आप उसका एवं अविमुक्त [ज्योतिर्लिंग]-का प्रभाव हमलोगोंसे कहिये ॥ १ ॥ सूतजी बोले— हे मुनीश्वरो… Read More


शिवमहापुराण — कोटिरुद्रसंहिता — अध्याय 22 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ श्रीसाम्बसदाशिवाय नमः ॥ श्रीशिवमहापुराण कोटिरुद्रसंहिता इक्कीसवाँ अध्याय बाईसवाँ अध्याय परब्रह्म परमात्माका शिव-शक्तिरूपमें प्राकट्य, पंचक्रोशात्मिका काशीका अवतरण, शिवद्वारा अविमुक्त लिंगकी स्थापना, काशीकी महिमा तथा काशीमें रुद्रके आगमनका वर्णन सूतजी बोले— हे श्रेष्ठ ऋषिगण ! अब विश्वेश्वरके महापापनाशक माहात्म्यका वर्णन करूँगा, आपलोग सुनें । संसारमें यह… Read More


शिवमहापुराण — कोटिरुद्रसंहिता — अध्याय 21 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ श्रीसाम्बसदाशिवाय नमः ॥ श्रीशिवमहापुराण कोटिरुद्रसंहिता इक्कीसवाँ अध्याय भीमशंकर ज्योतिर्लिंगकी उत्पत्ति तथा उसके माहात्म्यका वर्णन सूतजी बोले — [ उसके बाद ] शिवजी भी अपने गणोंको साथ लेकर राजाके कल्याणकी कामनासे आदरपूर्वक वहाँ गये और उसकी रक्षाके लिये गुप्तरूपसे स्थित हो गये ॥ १ ॥… Read More


शिवमहापुराण — कोटिरुद्रसंहिता — अध्याय 20 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ श्रीसाम्बसदाशिवाय नमः ॥ श्रीशिवमहापुराण कोटिरुद्रसंहिता बीसवाँ अध्याय भीमशंकर ज्योतिर्लिंगके माहात्म्य वर्णन-प्रसंग में भीमासुरके उपद्रवका वर्णन सूतजी बोल— [हे महर्षियो !] अब मैं भीमशंकरके माहात्म्यको कह रहा हूँ, जिसके सुननेमात्रसे मनुष्य सभी प्रकारके अभीष्टको प्राप्त कर लेता है ॥ १ ॥ कामरूप नामक देशमें लोकहितकी… Read More