शिवमहापुराण — कोटिरुद्रसंहिता — अध्याय 09 September 27, 2024 | aspundir | Leave a comment शिवमहापुराण — कोटिरुद्रसंहिता — अध्याय 09 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ श्रीसाम्बसदाशिवाय नमः ॥ श्रीशिवमहापुराण कोटिरुद्रसंहिता नौवाँ अध्याय संयोगवश हुए शिवपूजनसे चाण्डालीकी सद्गतिका वर्णन ऋषिगण बोल— हे सूतजी ! हे महाभाग ! आप परम शैव हैं, अतः आप धन्य हैं, हे विभो ! वह चाण्डाली कौन थी, उसकी कथा कहिये ॥ १ ॥ सूतजी बोल—… Read More
शिवमहापुराण — कोटिरुद्रसंहिता — अध्याय 08 September 27, 2024 | aspundir | Leave a comment शिवमहापुराण — कोटिरुद्रसंहिता — अध्याय 08 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ श्रीसाम्बसदाशिवाय नमः ॥ श्रीशिवमहापुराण कोटिरुद्रसंहिता आठवाँ अध्याय पश्चिम दिशाके शिवलिंगोंके वर्णन—क्रममें महाबलेश्वरलिंगका माहात्म्य—कथन सूतजी बोले— हे ब्राह्मणो ! अब पश्चिम दिशामें जो—जो लिंग भूतलपर प्रसिद्ध हैं, उन शिवलिंगोंको सद्भक्तिपूर्वक सुनिये ॥ १ ॥ कपिला नगरीमें कालेश्वर एवं रामेश्वर नामक दो महादिव्य लिंग हैं, जो… Read More
शिवमहापुराण — कोटिरुद्रसंहिता — अध्याय 07 September 27, 2024 | aspundir | Leave a comment शिवमहापुराण — कोटिरुद्रसंहिता — अध्याय 07 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ श्रीसाम्बसदाशिवाय नमः ॥ श्रीशिवमहापुराण कोटिरुद्रसंहिता सातवाँ अध्याय नन्दिकेश्वरलिंगका माहात्म्य – वर्णन ऋषिगण बोले— हे सूत ! हे प्रभो ! वैशाखमासके शुक्लपक्षकी सप्तमीके दिन नर्मदानदीमें गंगाजी कैसे आयी थीं; इसे विशेषरूपसे बताइये । हे महामते ! उस स्थानपर शिवजी नन्दिकेश नामसे कैसे प्रसिद्ध हुए; आप… Read More
शिवमहापुराण — कोटिरुद्रसंहिता — अध्याय 06 September 27, 2024 | aspundir | Leave a comment शिवमहापुराण — कोटिरुद्रसंहिता — अध्याय 06 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ श्रीसाम्बसदाशिवाय नमः ॥ श्रीशिवमहापुराण कोटिरुद्रसंहिता छठा अध्याय नर्मदा एवं नन्दिकेश्वरके माहात्म्य-कथनके प्रसंगमें ब्राह्मणीकी स्वर्गप्राप्तिका वर्णन सूतजी बोले — [ हे ऋषियो !] वहाँपर आँगनमें एक उत्तम गाय बँधी थी । रातको जब बाहर गया हुआ [गृहपति] ब्राह्मण आया, तब हे मुनीश्वरो ! गायको बिना… Read More
शिवमहापुराण — कोटिरुद्रसंहिता — अध्याय 05 September 27, 2024 | aspundir | Leave a comment शिवमहापुराण — कोटिरुद्रसंहिता — अध्याय 05 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ श्रीसाम्बसदाशिवाय नमः ॥ श्रीशिवमहापुराण कोटिरुद्रसंहिता पाँचवाँ अध्याय रेवा नदीके तटपर स्थित विविध शिवलिंग-माहात्म्य वर्णनके क्रममें द्विजदम्पतीका वृत्तान्त सूतजी बोले — दिव्य कालंजर पर्वतपर नीलकण्ठ नामक महादेव लिंगरूपसे सदा निवास करते हैं, जो भक्तजनोंको सर्वदा आनन्द प्रदान करनेवाले हैं ॥ १ ॥ उनकी महिमा परम… Read More
शिवमहापुराण — कोटिरुद्रसंहिता — अध्याय 04 September 27, 2024 | aspundir | Leave a comment शिवमहापुराण — कोटिरुद्रसंहिता — अध्याय 04 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ श्रीसाम्बसदाशिवाय नमः ॥ श्रीशिवमहापुराण कोटिरुद्रसंहिता चौथा अध्याय अनसूयाके पातिव्रतके प्रभावसे गंगाका प्राकट्य तथा अत्रीश्वरमाहात्म्यका वर्णन सूतजी बोले – [हे महर्षियो ! ] किसी समय जब ब्रह्मवेत्ताओंमें श्रेष्ठ ऋषिवर अत्रि समाधिसे जगे, तब उन्होंने अपनी प्रिया पत्नीसे कहा – ‘ जल दो’ ॥ १ ॥… Read More
शिवमहापुराण — कोटिरुद्रसंहिता — अध्याय 03 September 27, 2024 | aspundir | Leave a comment शिवमहापुराण — कोटिरुद्रसंहिता — अध्याय 03 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ श्रीसाम्बसदाशिवाय नमः ॥ श्रीशिवमहापुराण कोटिरुद्रसंहिता तीसरा अध्याय अत्रीश्वरलिंगके प्राकट्यके प्रसंगमें अनसूया तथा अत्रिकी तपस्याका वर्णन सूतजी बोले- ब्रह्मपुरीके समीपमें चित्रकूटपर्वतपर मत्तगजेन्द्र नामक लिंग है, जिसे ब्रह्माजीने पूर्वकालमें स्थापित किया था; वह सभी कामनाओंको पूर्ण करनेवाला है। उसके पूर्वमें सभी प्रकारके वरोंको देनेवाला कोटीश्वर नामक… Read More
शिवमहापुराण — कोटिरुद्रसंहिता — अध्याय 02 September 27, 2024 | aspundir | Leave a comment शिवमहापुराण — कोटिरुद्रसंहिता — अध्याय 02 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ श्रीसाम्बसदाशिवाय नमः ॥ श्रीशिवमहापुराण कोटिरुद्रसंहिता दूसरा अध्याय काशीस्थित तथा पूर्व दिशामें प्रकटित विशेष एवं सामान्य लिंगों का वर्णन सूतजी बोले- गंगाके तटपर परम प्रसिद्ध काशी नगरी है, जो सबको मुक्ति प्रदान करनेवाली है। उसे लिंगमयी ही जानना चाहिये, वह सदाशिवकी निवास- स्थली मानी गयी… Read More
शिवमहापुराण — कोटिरुद्रसंहिता — अध्याय 01 September 27, 2024 | aspundir | Leave a comment शिवमहापुराण — कोटिरुद्रसंहिता — अध्याय 01 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ श्रीसाम्बसदाशिवाय नमः ॥ श्रीशिवमहापुराण कोटिरुद्रसंहिता पहला अध्याय द्वादश ज्योतिर्लिंगों एवं उनके उपलिंगोंके माहात्म्यका वर्णन यो धत्ते निजमाययैव भुवनाकारं विकारोज्झितो यस्याहुः करुणाकटाक्षविभवौ स्वर्गापवर्गाभिधौ । प्रत्यग्बोधसुखाद्वयं हृदि सदा पश्यन्ति यं योगिन— स्तस्मै शैलसुताञ्चितार्धवपुषे शश्वन्नमस्तेजसे ॥ जो निर्विकार होते हुए भी अपनी मायासे विराट् विश्वका आकार धारण… Read More
शिवमहापुराण — शतरुद्रसंहिता — अध्याय 42 September 26, 2024 | aspundir | Leave a comment शिवमहापुराण — शतरुद्रसंहिता — अध्याय 42 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ श्रीसाम्बसदाशिवाय नमः ॥ श्रीशिवमहापुराण शतरुद्रसंहिता बयालीसवाँ अध्याय भगवान् शिवके द्वादश ज्योतिर्लिंगरूप अवतारोंका वर्णन नन्दीश्वरजी बोले — [ हे सनत्कुमार ! ] हे मुने ! अब अनेक प्रकारकी लीला करनेवाले परमात्मा शिवजीके ज्योतिर्लिंगरूप द्वादशसंख्यक अवतारोंको सुनिये ॥ १ ॥ सौराष्ट्रे सोमनाथश्च श्रीशैले मल्लिकार्जुनः । उज्जयिन्यां… Read More