शिवमहापुराण — कोटिरुद्रसंहिता — अध्याय 39 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ श्रीसाम्बसदाशिवाय नमः ॥ श्रीशिवमहापुराण कोटिरुद्रसंहिता उनतालीसवाँ अध्याय शिवरात्रिव्रतकी उद्यापन विधिका वर्णन ऋषिगण बोले – [ हे सूत ! ] अब आप शिवरात्रिव्रतके उद्यापनका विधान कहिये, जिसके करनेसे साक्षात् शंकरजी निश्चित रूपसे प्रसन्न होते हैं ॥ १ ॥ सूतजी बोले- हे ऋषियो ! आपलोग उसके… Read More


शिवमहापुराण — कोटिरुद्रसंहिता — अध्याय 38 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ श्रीसाम्बसदाशिवाय नमः ॥ श्रीशिवमहापुराण कोटिरुद्रसंहिता अड़तीसवाँ अध्याय भगवान् शिवके विविध व्रतोंमें शिवरात्रिव्रतका वैशिष्ट्य ऋषि बोले— हे तात! आप धन्य हैं । कृतकृत्य हैं और आपका जीवन सफल है जो आप हमलोगोंको महेश्वरकी कल्याणकारी कथा सुना रहे हैं ॥ १ ॥ हे सूतजी! यद्यपि हमलोगोंने… Read More


शिवमहापुराण — कोटिरुद्रसंहिता — अध्याय 37 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ श्रीसाम्बसदाशिवाय नमः ॥ श्रीशिवमहापुराण कोटिरुद्रसंहिता सैंतीसवाँ अध्याय शिवकी पूजा करनेवाले विविध देवताओं, ऋषियों एवं राजाओंका वर्णन ऋषिगण बोले- हे महाभाग सूत ! हे सुव्रत ! आप ज्ञानी हैं, आप शिवजीके चरित्रका ही विस्तारपूर्वक पुनः वर्णन करें। पुरातन ऋषियों, देवताओं एवं राजाओंने उन देवाधिदेव शिवकी… Read More


शिवमहापुराण — कोटिरुद्रसंहिता — अध्याय 36 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ श्रीसाम्बसदाशिवाय नमः ॥ श्रीशिवमहापुराण कोटिरुद्रसंहिता छत्तीसवाँ अध्याय शिवसहस्त्रनामस्तोत्रकी फल- श्रुति सूतजी बोले- विष्णुजीके द्वारा किये गये अपने उत्कृष्ट सहस्रनामस्तवनको सुनकर शिवजी प्रसन्न हो गये। उस समय जगत् के स्वामी महेश्वरने विष्णुकी परीक्षाके लिये उन कमलोंमेंसे एक कमलको छिपा लिया ॥ १-२ ॥ तब शिवपूजनमें… Read More


शिवमहापुराण — कोटिरुद्रसंहिता — अध्याय 35 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ श्रीसाम्बसदाशिवाय नमः ॥ श्रीशिवमहापुराण कोटिरुद्रसंहिता पैंतीसवाँ अध्याय विष्णुप्रोक्त शिवसहस्त्रनामस्तोत्र * सूतजी बोले- हे मुनिवरो ! आपलोग सुनें, जिससे महेश्वर सन्तुष्ट हुए थे, उस शिवसहस्रनामस्तोत्रको मैं कह रहा हूँ ॥ १ ॥ भगवान् विष्णुने कहा – १. शिवः- कल्याण-स्वरूप, २. हरः – भक्तोंके पाप-ताप हर… Read More


शिवमहापुराण — कोटिरुद्रसंहिता — अध्याय 34 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ श्रीसाम्बसदाशिवाय नमः ॥ श्रीशिवमहापुराण कोटिरुद्रसंहिता चौंतीसवाँ अध्याय हरीश्वरलिंगका माहात्म्य और भगवान् विष्णुके सुदर्शनचक्र प्राप्त करनेकी कथा व्यासजी बोले- उन सूतजीका यह वचन सुनकर सभी मुनीश्वरोंने उनकी प्रशंसा करके लोकहितकी कामनासे कहा – ॥ १ ॥ ऋषिगण बोले- हे सूतजी ! आप सब कुछ जानते… Read More


शिवमहापुराण — कोटिरुद्रसंहिता — अध्याय 33 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ श्रीसाम्बसदाशिवाय नमः ॥ श्रीशिवमहापुराण कोटिरुद्रसंहिता तैंतीसवाँ अध्याय घुश्मेश्वर ज्योतिर्लिंग एवं शिवालयके नामकरणका आख्यान सूतजी बोले- अपनी छोटी बहनके पुत्रको देखकर बड़ी बहन दुखी हुई और वह उसके पुत्रसुखको सहन न करती हुई उससे विरोध करने लगी ॥ १ ॥ सब लोग उस पुत्रवतीकी निरन्तर… Read More


शिवमहापुराण — कोटिरुद्रसंहिता — अध्याय 32 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ श्रीसाम्बसदाशिवाय नमः ॥ श्रीशिवमहापुराण कोटिरुद्रसंहिता बत्तीसवाँ अध्याय घुश्मेश्वर ज्योतिर्लिंगके माहात्म्यमें सुदेहा ब्राह्मणी एवं सुधर्मा ब्राह्मणका चरित – वर्णन सूतजी बोले- हे मुनिश्रेष्ठो ! इसके बाद घुश्मेश नामक ज्योतिर्लिंग कहा गया है। उसका उत्तम माहात्म्य सुनिये ॥ १ ॥ दक्षिण दिशामें श्रेष्ठ देवगिरि नामक एक… Read More


शिवमहापुराण — कोटिरुद्रसंहिता — अध्याय 31 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ श्रीसाम्बसदाशिवाय नमः ॥ श्रीशिवमहापुराण कोटिरुद्रसंहिता इकतीसवाँ अध्याय रामेश्वर नामक ज्योतिर्लिंगके प्रादुर्भाव एवं माहात्म्यका वर्णन सूतजी बोले- हे ऋषियो ! इसके बाद मैं रामेश्वर नामक ज्योतिर्लिंग पूर्व समयमें जिस प्रकार उत्पन्न हुआ, उसका वर्णन करता हूँ, आपलोग आदरपूर्वक सुनिये ॥ १ ॥ हे ब्राह्मणो! पूर्व… Read More


शिवमहापुराण — कोटिरुद्रसंहिता — अध्याय 30 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ श्रीसाम्बसदाशिवाय नमः ॥ श्रीशिवमहापुराण कोटिरुद्रसंहिता तीसवाँ अध्याय नागेश्वर ज्योतिर्लिंगकी उत्पत्ति एवं उसके माहात्म्यका वर्णन सूतजी बोले – [ हे मुनियो ! ] किसी समय उस दुष्टात्मा राक्षस दारुकके एक सेवकने वैश्यके समक्ष [स्थित हुए] शिवजीका सुन्दर रूप देखा ॥ १ ॥ उसने जाकर राक्षसराजके… Read More