शिवमहापुराण — उमासंहिता — अध्याय 16 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ श्रीसाम्बसदाशिवाय नमः ॥ श्रीशिवमहापुराण उमासंहिता सोलहवाँ अध्याय विभिन्न पापकर्मोंसे प्राप्त होनेवाले नरकोंका वर्णन और शिव – नाम – स्मरणकी महिमा सनत्कुमार बोले – हे मुनिश्रेष्ठ ! उन लोकोंके ऊपर स्थित नरकोंको मुझसे सुनिये, जहाँपर पापीजन दुःख भोगते हैं ॥ १ ॥ रौरव, शूकर, रोध,… Read More


शिवमहापुराण — उमासंहिता — अध्याय 15 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ श्रीसाम्बसदाशिवाय नमः ॥ श्रीशिवमहापुराण उमासंहिता पन्द्रहवाँ अध्याय ब्रह्माण्डदानकी महिमाके प्रसंगमें पाताललोकका निरूपण व्यासजी बोले – हे सनत्कुमारजी ! जिस एक ही दानके करनेसे सभी दानोंका फल मिल जाता है, मनुष्योंके हितके लिये उस दानको आप मुझसे कहें ॥ १ ॥ सनत्कुमार बोले – समयपर… Read More


शिवमहापुराण — उमासंहिता — अध्याय 14 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ श्रीसाम्बसदाशिवाय नमः ॥ श्रीशिवमहापुराण उमासंहिता चौदहवाँ अध्याय दानमाहात्म्य तथा दानके भेदका वर्णन सनत्कुमार बोले – हे व्यासजी ! जो घोरदान तथा महादान कहे गये हैं, उन्हें सदा सत्पात्रको ही देना चाहिये, ये आत्माका उद्धार करते हैं ॥ १ ॥ हे द्विजोत्तम! सुवर्णदान, गोदान, भूमिदान… Read More


शिवमहापुराण — उमासंहिता — अध्याय 13 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ श्रीसाम्बसदाशिवाय नमः ॥ श्रीशिवमहापुराण उमासंहिता तेरहवाँ अध्याय पुराणमाहात्म्यनिरूपण सनत्कुमार बोले— हे मुने ! जो वनके कन्द-मूल एवं फल खाकर अरण्यमें तपस्या करता है और जो वेदकी एक ऋचामात्रका अध्ययन करता है, उन दोनोंका समान फल होता है ॥ १ ॥ श्रेष्ठ ब्राह्मण वेदके अध्ययनसे… Read More


शिवमहापुराण — उमासंहिता — अध्याय 12 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ श्रीसाम्बसदाशिवाय नमः ॥ श्रीशिवमहापुराण उमासंहिता बारहवाँ अध्याय जलदान, सत्यभाषण और तपकी महिमा सनत्कुमार बोले – [ हे व्यासजी !] जलका दान सभी दानोंमें सदा अति श्रेष्ठ है; क्योंकि वह सभी जीव- समुदायको तृप्त करनेवाला जीवन कहा गया है ॥ १ ॥ अतः बिना किसी… Read More


शिवमहापुराण — उमासंहिता — अध्याय 11 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ श्रीसाम्बसदाशिवाय नमः ॥ श्रीशिवमहापुराण उमासंहिता ग्यारहवाँ अध्याय दानके प्रभावसे यमपुरके दुःखका अभाव तथा अन्नदानका विशेष माहात्म्यवर्णन व्यासजी बोले- हे प्रभो ! पाप करनेवाले मनुष्य बड़े दुःखसे युक्त होकर यममार्गमें गमन करते हैं, अब आप उन धर्मोंको कहिये, जिनके द्वारा वे सुखपूर्वक यममार्गमें गमन करते… Read More


शिवमहापुराण — उमासंहिता — अध्याय 10 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ श्रीसाम्बसदाशिवाय नमः ॥ श्रीशिवमहापुराण उमासंहिता दसवाँ अध्याय नरकविशेषमें दुःखवर्णन सनत्कुमार बोले – हे व्यासजी ! मिथ्या शास्त्रमें प्रवृत्त व्यक्ति द्विजिह्व नामक नरकमें जाता है, जहाँ जिह्वाके समान पतले, आधे कोशके विस्तारवाले तथा तीखे फालोंवाले हलोंसे उसे विशेष पीड़ा पहुँचायी जाती है । जो क्रूर… Read More


शिवमहापुराण — उमासंहिता — अध्याय 09 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ श्रीसाम्बसदाशिवाय नमः ॥ श्रीशिवमहापुराण उमासंहिता नौवाँ अध्याय नरककी यातनाओंका वर्णन सनत्कुमार बोले— [ हे व्यास!] इन नरकाग्नियोंमें पापीजन अनेक प्रकारकी विचित्र यातनाओंके द्वारा कर्मोंके विनष्ट होनेतक सताये तथा सुखाये जाते हैं ॥ १ ॥ जिस प्रकार मल दूर होनेतक धातुएँ अग्निमें तपायी जाती हैं,… Read More


शिवमहापुराण — उमासंहिता — अध्याय 08 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ श्रीसाम्बसदाशिवाय नमः ॥ श्रीशिवमहापुराण उमासंहिता आठवाँ अध्याय नरक – भेद-निरूपण चित्रगुप्त बोले – हे पापकर्मवालो! हे दूसरोंके द्रव्यका अपहरण करनेवालो ! हे रूप एवं पराक्रमपर घमण्ड करनेवालो! हे परनारीप्रसंग करनेवालो ! तुमलोगोंने स्वयं जो कर्म किया है, उसे तुम्हें भोगना पड़ रहा है। तुमलोगोंने… Read More


शिवमहापुराण — उमासंहिता — अध्याय 07 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ श्रीसाम्बसदाशिवाय नमः ॥ श्रीशिवमहापुराण उमासंहिता सातवाँ अध्याय यमलोकका मार्ग एवं यमदूतोंके स्वरूपका वर्णन सनत्कुमार बोले – चार प्रकारके पापोंके कारण विवश होकर समस्त शरीरधारी मनुष्य भयको उत्पन्न करनेवाले घोर यमलोकको जाते हैं ॥ १ ॥ यह बात गर्भस्थ, उत्पन्न बालक, युवा, मध्यम, वृद्ध, स्त्री,… Read More