शिवमहापुराण — कैलाससंहिता — अध्याय 05 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ श्रीसाम्बसदाशिवाय नमः ॥ श्रीशिवमहापुराण कैलाससंहिता पाँचवाँ अध्याय संन्यासदीक्षाहेतु मण्डलनिर्माणकी विधि ईश्वर बोले- भूमिके गन्ध, वर्ण, रस आदिकी भलीभाँति परीक्षाकर वहाँ अपने मनके अनुकूल स्थानपर वस्त्रका विशाल चँदोवा लगाकर दर्पणतलके तुल्य [सम तथा स्निग्ध] पृथ्वीतलपर दो हाथ प्रमाणके चौकोर मण्डलका निर्माण करे ॥ १-२ ॥… Read More


शिवमहापुराण — कैलाससंहिता — अध्याय 04 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ श्रीसाम्बसदाशिवाय नमः ॥ श्रीशिवमहापुराण कैलाससंहिता चौथा अध्याय संन्यासदीक्षासे पूर्वकी आह्निकविधि शिवजी बोले- हे महादेवि ! अब मैं आपके ऊपर स्नेहके कारण सम्प्रदायोंके अनुसार संन्यास लेनेसे पूर्व आह्निक कर्मका वर्णन करूँगा ॥ १ ॥ हे महादेवि! ब्राह्ममुहूर्तमें उठकर यति अपने सिरमें सहस्र दलवाले श्वेत कमलपर… Read More


शिवमहापुराण — कैलाससंहिता — अध्याय 03 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ श्रीसाम्बसदाशिवाय नमः ॥ श्रीशिवमहापुराण कैलाससंहिता तीसरा अध्याय प्रणवमीमांसा तथा संन्यासविधिवर्णन ईश्वर बोले – हे देवि ! आप मुझसे जो पूछ रही हैं, उसे मैं आपसे कह रहा हूँ, सुनिये; उसके सुननेमात्रसे जीव साक्षात् शिव हो जाता है ॥ १ ॥ प्रणवके अर्थको जान लेना… Read More


शिवमहापुराण — कैलाससंहिता — अध्याय 02 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ श्रीसाम्बसदाशिवाय नमः ॥ श्रीशिवमहापुराण कैलाससंहिता दूसरा अध्याय भगवान् शिवसे पार्वतीजीकी प्रणवविषयक जिज्ञासा व्यासजी बोले- हे ब्राह्मणो ! परम सौभाग्यशाली आपलोगोंने यह बहुत अच्छी बात पूछी है; क्योंकि प्रणवार्थको प्रकाशित करनेवाला शिवज्ञान [सर्वथा ] दुर्लभ है ॥ १ ॥ त्रिशूल नामक उत्तम आयुध धारण करनेवाले… Read More


शिवमहापुराण — कैलाससंहिता — अध्याय 01 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ श्रीसाम्बसदाशिवाय नमः ॥ श्रीशिवमहापुराण कैलाससंहिता पहला अध्याय व्यासजीसे शौनकादि ऋषियोंका संवाद नमः शिवाय साम्बाय सगणाय ससूनवे । प्रधानपुरुषेशाय सर्गस्थित्यन्तहेतवे ॥ जो प्रधान (प्रकृति) और पुरुषके नियन्ता तथा सृष्टि – पालन-संहारके कारण हैं, उन पार्वतीसहित शिवजीको पार्षदों और पुत्रोंके साथ नमस्कार है ॥ १ ॥… Read More


शिवमहापुराण — उमासंहिता — अध्याय 51 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ श्रीसाम्बसदाशिवाय नमः ॥ श्रीशिवमहापुराण उमासंहिता इक्यावनवाँ अध्याय भगवतीके मन्दिरनिर्माण, प्रतिमास्थापन तथा पूजनका माहात्म्य और उमासंहिताके श्रवण एवं पाठकी महिमा मुनिगण बोले- हे व्यासशिष्य ! हे महाभाग ! हे पौराणिकोत्तम सूतजी ! हमलोग महेश्वरी उमा जगदम्बाके अद्वितीय अनुत्तम क्रियायोगाख्यानको सुनना चाहते हैं, जिसे सनत्कुमारने महात्मा… Read More


शिवमहापुराण — उमासंहिता — अध्याय 50 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ श्रीसाम्बसदाशिवाय नमः ॥ श्रीशिवमहापुराण उमासंहिता पचासवाँ अध्याय दस महाविद्याओंकी उत्पत्ति तथा देवीके दुर्गा, शताक्षी, शाकम्भरी और भ्रामरी आदि नामोंके पड़नेका कारण मुनिगण बोले – हे महाप्राज्ञ ! हमलोग दुर्गाके चरित्रको निरन्तर सुनना चाहते हैं, अतः आप हमलोगोंसे दूसरे अद्भुत [लीला] तत्त्वका वर्णन कीजिये ॥… Read More


शिवमहापुराण — उमासंहिता — अध्याय 49 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ श्रीसाम्बसदाशिवाय नमः ॥ श्रीशिवमहापुराण उमासंहिता उनचासवाँ अध्याय भगवती उमाके प्रादुर्भावका वर्णन मुनिगण बोले- सर्वार्थवेत्ता सूतजी ! अब आप भुवनेश्वरी उमाके अवतारका वर्णन करें, जिनसे सरस्वती उत्पन्न हुईं, जो परब्रह्म, मूलप्रकृति, ईश्वरी, निराकार होकर भी साकार एवं नित्यानन्दमयी सती कही जाती हैं ॥ १-२ ॥… Read More


शिवमहापुराण — उमासंहिता — अध्याय 48 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ श्रीसाम्बसदाशिवाय नमः ॥ श्रीशिवमहापुराण उमासंहिता अड़तालीसवाँ अध्याय सरस्वतीदेवीके द्वारा सेनासहित शुम्भ निशुम्भका वध राजा बोले- हे भगवन्! देवीके द्वारा धूम्राक्ष, चण्ड-मुण्ड एवं रक्तबीजको मारा गया सुनकर देवताओंको कष्ट देनेवाले शुम्भने क्या किया ? हे ब्रह्मन् ! अब आप जगत्कारणभूता देवीके पापनाशक चरित्रको सुननेकी इच्छावाले… Read More


शिवमहापुराण — उमासंहिता — अध्याय 47 ॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ ॥ श्रीसाम्बसदाशिवाय नमः ॥ श्रीशिवमहापुराण उमासंहिता सैंतालीसवाँ अध्याय शुम्भ निशुम्भसे पीड़ित देवताओं द्वारा देवीकी स्तुति तथा देवीद्वारा धूम्रलोचन, चण्ड-मुण्ड आदि असुरोंका वध ऋषि बोले- हे राजन् ! पूर्व समयमें शुम्भ एवं निशुम्भ नामक प्रतापी दैत्य हुए। उन दोनों भाइयोंने अपने तेजसे चराचरसहित तीनों लोकोंको आक्रान्त… Read More