अमोघ शिव कवच भगवान् शङ्कर का नाम लेने से ही प्राणियों के सब दुःख दूर हो जाते हैं, फिर उनकी विधिवत् उपासना करने से क्या नहीं हो सकता ! निश्चय ही भगवान् शिव की पूजा करके लोग अपना सभी प्रकार का हित साधन कर सकते हैं । यहाँ श्रीस्कन्द-पुराण के ब्रह्मोत्तर खण्ड में ‘भद्रायु’ को… Read More


साबर मन्त्रों को सिद्ध कैसे करें ? ‘साबर’ मन्त्रों की साधना के पूर्व ‘सर्वार्थ-साधक’ मन्त्र को 21 बार जप लेना चाहिए । इसके बाद अपने अभीष्ट मन्त्र की साधना करें । ‘सर्वार्थ-साधक’ मन्त्र का जप करते समय ध्यान रखें कि इसका कोई भी शब्द या वर्ण उच्चारण में अशुद्ध न हो । सर्वार्थ-साधक-मन्त्र- “गुरु सठ… Read More


श्रीसाबर-शक्ति-पाठ पूर्व-पीठिका ।। विनियोग ।। श्रीसाबर-शक्ति-पाठ का, भुजंग-प्रयात है छन्द । भारद्वाज शक्ति ऋषि, श्रीमहा-काली काल प्रचण्ड ।। ॐ क्रीं काली शरण-बीज, है वायु-तत्त्व प्रधान । कालि प्रत्यक्ष भोग-मोक्षदा, निश-दिन धरे जो ध्यान ।। ।। ध्यान ।। मेघ-वर्ण शशि मुकुट में, त्रिनयन पीताम्बर-धारी । मुक्त-केशी मद-उन्मत्त सितांगी, शत-दल-कमल-विहारी ।। गंगाधर ले सर्प हाथ में, सिद्धि… Read More


श्री गोरक्ष वल्लभास्तोत्र इस गोरक्ष वल्लभा स्तोत्र का वैसे तो कोई भी विधिवत् पाठ कर फल प्राप्त कर सकता है, किन्तु विद्यार्थियों के लिए यह परम कल्याणकारक है । शुक्ल पक्ष के प्रथम मंगलवार से प्रतिदिन प्रातः-काल ब्रह्म-मुहूर्त्त में उठ जाना चाहिए तथा सूर्योदय से पूर्व स्नानादि से निवृत्त होकर धूले हुए शुद्ध वस्त्रों को… Read More


दत्तात्रेय आसन गायत्री मन्त्रः- आसन ब्रह्मा, आसन विष्णु, आसन इन्द्र, आसन बैठे गुरु गोविन्द । आसन बैठो, धरो ध्यान, स्वामी कथनो ब्रह्म-ज्ञान । अजर आसन, वज्र किवाड़, वज्र वज़ड़े दशम द्वार । जो घाले वज्र घाव, उलट वज्र वाहि को खाव । हृदय मेरे हर बसे, जिसमें देव अनन्त । चौकी हनुमन्त वीर की ।… Read More


दश महाविद्या शाबर मन्त्र सत नमो आदेश । गुरुजी को आदेश । ॐ गुरुजी । ॐ सोऽहं सिद्ध की काया, तीसरा नेत्र त्रिकुटी ठहराया । गगण मण्डल में अनहद बाजा । वहाँ देखा शिवजी बैठा, गुरु हुकम से भितरी बैठा, शुन्य में ध्यान गोरख दिठा । यही ध्यान तपे महेशा, यही ध्यान ब्रह्माजी लाग्या ।… Read More


शरीर रक्षा शाबर मन्त्र मन्त्रः- “वार को वार बाँधें, पार को पार बाँधें, मरघट-मसान बाँधें, जादू-वीर बाँधें, दीठ-मूठ बाँधें, चोरी-छीना बाँधें, भेड़िया-बाघ बाँधें, लखूरी-स्यार बाँधें, बिच्छू और साँप बाँधें, लाइल्लाह का कोट, इल्लाह की खाई, मोहम्मद रसूलिल्लाह की चौकी, हजरत अली की दुहाई ।” प्रयोग एवं विधिः-… Read More


शरीर रक्षा शाबर मन्त्र मन्त्रः- “ॐ नमः वज्र का कोठा, जिसमें पिण्ड हमारा बैठा । ईश्वर कुञ्जी, ब्रह्मा का ताला, मेरे आठों याम का यति हनुमन्त रखवाला ।” प्रयोग एवं विधिः-… Read More


शरीर रक्षा शाबर मन्त्र ‘मन्त्र-विद्या’ का प्रयोग करने वाले को देहाती भाषा में ‘ओझा’ कहते हैं : ‘ओझा’ भी जब झाड़-फूँक ले लिए कहीं जाता है, तो घर से चलते समय या उस स्थान पर पहुँच कर सबसे पहले अपने शरीर की रक्षा के लिए शरीर-रक्षा का मन्त्र पढ़ लेता है, जिससे यदि उस स्थान… Read More


शरीर रक्षा शाबर मन्त्र ‘मन्त्र-विद्या’ का प्रयोग करने वाले को देहाती भाषा में ‘ओझा’ कहते हैं : ‘ओझा’ भी जब झाड़-फूँक ले लिए कहीं जाता है, तो घर से चलते समय या उस स्थान पर पहुँच कर सबसे पहले अपने शरीर की रक्षा के लिए शरीर-रक्षा का मन्त्र पढ़ लेता है, जिससे यदि उस स्थान… Read More