आत्म-ज्योति-साधना श्रीमद्-भगवद्-गीता में व्यवहार और अध्यात्म के प्रत्येक पक्ष का वर्णन है। दैनन्दिन जीवन में गीता उपयोगी मार्ग-दर्शन करती है। साधना-क्षेत्र में गीता सहज ही अग्रसर करती है। मन्त्र-शास्त्र की दृष्टि से गीता का प्रत्येक श्लोक दिव्य मन्त्र है। साहित्य तथा तत्त्व-ज्ञान में गीता श्रेष्ठ है। यहाँ मुमुक्षु जनों के लिए अति गोपनीय साधना पहली… Read More


मृत्य्वष्टकम् ।। मार्कण्डेय उवाच ।। नारायणं सहस्राक्षं पद्मनाभं पुरातनम् । प्रणतोऽस्मि हृषीकेशं किं मे मृत्युः करिष्यति ? ।। १ गोविन्दं पुण्डरीकाक्षमनन्तमजमव्ययम् । केशवं च प्रपन्नोऽस्मि किं मे मृत्युः करिष्यति ? ।। २ वासुदेवं जगद्योनिं भानुवर्णमतीन्द्रियम् । दामोदरं प्रपन्नोऽस्मि किं मे मृत्युः करिष्यति ? ।। ३… Read More


मृत्युञ्जय-कवच विनियोगः ॐ अस्य मृत्युञ्जयकवचस्य वामदेव ऋषिः गायत्रीछन्दः मृत्युञ्जयो देवता साधकाभीष्टसिद्धयर्थं जपे विनियोग। ऋष्यादि-न्यासः वामदेव ऋषये नमः शिरसि, गायत्रीछन्दसे नमः मुखे, मृत्युञ्जयो देवतायै नमः हृदि, साधकाभीष्टसिद्धयर्थं जपे विनियोगाय नमः सर्वाङ्गे। करहृदयादि-न्यासः- ॐ जूं सः (इस मन्त्र से सभी न्यास करें) ध्यानः हस्ताभ्यां कलश-द्वयामृत-रसैराप्लावयन्तं शिरो, द्वाभ्यां तौ दधतं मृगाक्ष-वलये द्वाभ्यां वहन्तं परम्। अङ्क-न्यस्त-कर-द्वयामृत-घटं कैकाश-कान्तं शिवम्, स्वच्छाम्भोज-गतं… Read More


श्रीमहादेव-प्रोक्तं-मृत-सञ्जीवनी-कवचम् ।। पूर्व-पीठिका ।। एवमाराध्य गौरीशं देवं मृत्युञ्जयमहेश्वरं । मृतसञ्जीवनं नाम्ना कवचं प्रजपेत् सदा ॥१॥ सारात् सार-तरं पुण्यं गुह्याद्गुह्यतरं शुभं । महादेवस्य कवचं मृतसञ्जीवनामकं ॥ २॥ समाहित-मना भूत्वा श्रृणुष्व कवचं शुभं । श्रृत्वैतद्दिव्य कवचं रहस्यं कुरु सर्वदा ॥३॥ विनियोगः- ॐ अस्य श्रीमृतसञ्जीवनीकवचस्य श्री महादेव ऋषिः, अनुष्टुप् छन्दः, श्रीमृत्युञ्जयरुद्रो देवता ॐ बीजं, जूं शक्तिः, सः कीलकम्… Read More


श्री अर्जुन-कृत श्रीदुर्गा-स्तवन विनियोग – ॐ अस्य श्रीभगवती दुर्गा स्तोत्र मन्त्रस्य श्रीकृष्णार्जुन स्वरूपी नर नारायणो ऋषिः, अनुष्टुप् छन्द, श्रीदुर्गा देवता, ह्रीं बीजं, ऐं शक्ति, श्रीं कीलकं, मम अभीष्ट सिद्धयर्थे जपे विनियोगः। ऋष्यादिन्यास-  श्रीकृष्णार्जुन स्वरूपी नर नारायणो ऋषिभ्यो नमः शिरसि, अनुष्टुप् छन्दसे नमः मुखे, श्रीदुर्गा देवतायै नमः हृदि, ह्रीं बीजाय नमः गुह्ये, ऐं शक्त्यै नमः पादयो,… Read More


“शाबर मन्त्र साधना” के तथ्य १॰ इस साधना को किसी भी जाति, वर्ण, आयु का पुरुष या स्त्री कर सकती है। २॰ इन मन्त्रों की साधना में गुरु की इतनी आवश्यकता नहीं रहती, क्योंकि इनके प्रवर्तक स्वयं सिद्ध साधक रहे हैं। इतने पर भी कोई निष्ठावान् साधक गुरु बन जाए, तो कोई आपत्ति नहीं क्योंकि… Read More


सर्व-सिद्धि-दायक शाबरी ‘यन्त्र’ ‘शाबर-मन्त्रों की पूर्ण सफलता के लिये ‘शाबरी-यन्त्र’ को सिद्ध करना चाहिए। इसके लिये अपने सामने लकड़ी का एक पाटा रखें। पाटे पर पीला रेशमी वस्त्र बिछाए। रेशमी वस्त्र पर ३ या ५ मुट्ठी अक्षत रखें। अक्षत के सामने कागज पर छपा हुआ या धातु पर उत्कीर्ण सर्व-सिद्धि-दायक ‘शाबर-यन्त्र’ रखें। यन्त्र पर चन्दन,… Read More


दाम्पत्य सुख के उपाय १॰ यदि जन्म कुण्डली में प्रथम, चतुर्थ, सप्तम, द्वादश स्थान स्थित मंगल होने से जातक को मंगली योग होता है इस योग के होने से जातक के विवाह में विलम्ब, विवाहोपरान्त पति-पत्नी में कलह, पति या पत्नी के स्वास्थ्य में क्षीणता, तलाक एवं क्रूर मंगली होने पर जीवन साथी की मृत्यु… Read More


श्री भैरव मन्त्र “ॐ गुरुजी काला भैरुँ कपिला केश, काना मदरा, भगवाँ भेस। मार-मार काली-पुत्र। बारह कोस की मार, भूताँ हात कलेजी खूँहा गेडिया। जहाँ जाऊँ भैरुँ साथ। बारह कोस की रिद्धि ल्यावो। चौबीस कोस की सिद्धि ल्यावो। सूती होय, तो जगाय ल्यावो। बैठा होय, तो उठाय ल्यावो। अनन्त केसर की भारी ल्यावो। गौरा-पार्वती की… Read More


1‌‌‍॰ यदि परिश्रम के पश्चात् भी कारोबार ठप्प हो, या धन आकर खर्च हो जाता हो तो यह टोटका काम में लें। किसी गुरू पुष्य योग और शुभ चन्द्रमा के दिन प्रात: हरे रंग के कपड़े की छोटी थैली तैयार करें। श्री गणेश के चित्र अथवा मूर्ति के आगे “संकटनाशन गणेश स्तोत्र´´ के 11 पाठ… Read More